Four Stars of Destiny Book: पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे किताब को लेकर सियासी तकरार छिड़ी है. इस किताब को छपने से पहले प्रकाशक ने रक्षा मंत्रालय/सरकार के पास भेजा था जिसका अप्रूवल अभी तक नहीं मिल पाया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब (फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी) का मुद्दा लगातार उछाल रहे हैं. 2020 से 2024 तक पांच साल में कई किताबें इस प्रोसेस से गुजर चुकी है लेकिन इकलौती मनोज मुकुंद नरवणे की किताब है जिसे मंजूरी नहीं मिल पाई है. आइए इसके पीछे की वजह समझते हैं.
कई किताबों को मिली मंजूरी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से 2024 तक पांच साल के समय में जनरल नरवणे की किताब अकेली ऐसी मैन्युस्क्रिप्ट है जिसे मिनिस्ट्री से अभी भी मंजूरी मिलनी बाकी है, जबकि दर्जनों किताबें इस प्रोसेस से गुजर चुकी हैं और उन्हें मंजूरी मिल चुकी है. द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा फाइल किए गए एक RTI एप्लीकेशन के जवाब में 17 सितंबर, 2024 को रक्षा मिनिस्ट्री की आर्मी यूनिट ने कहा कि 2020 से अब तक 35 किताबें मंजूरी के लिए उसके पास आई हैं. इनमें से सिर्फ तीन को मंजूरी नहीं मिल पाई थी. उनमें से एक जनरल नरवणे की भी किताब थी.
तीन किताबे थीं अंडर प्रोसेस
RTI जवाब के मुताबिक, ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित (रिटायर्ड) की एक किताब, लीडरशिप बियॉन्ड बैरक्स, को “अंडर प्रोसेस” दिखाया गया था. इसके अलावा जनरल नरवणे की फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी और जनरल एन सी विज (रिटायर्ड) की अलोन इन द रिंग रक्षा मंत्रालय को भेजी गई थीं.
इन्हें भी मिली मंजूरी
जनरल विज की किताब मई 2025 में रिलीज हुई थी, जबकि ब्रिगेडियर राजपुरोहित की किताब को भी क्लियरेंस मिल गया है और पब्लिकेशन का इंतजार कर रही है. इस लिहाज से नरवणे की किताब अधर में लटकी है. इसे लेकर फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार पूर्व आर्मी चीफ के लिए बहुत सम्मान रखती है हालांकि विपक्ष उनका मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहा है.
इनकी किताबें हुई पास
जिन लोगों की किताबें हाल ही में पास हुई हैं, उनमें लेफ्टिनेंट जनरल एस ए हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल एस के गेडेओक, लेफ्टिनेंट जनरल एस आर आर अयंगर, मेजर जनरल (डॉ) अशोक कुमार, मेजर जनरल शशिकांत पित्रे, मेजर जनरल आर के शर्मा, मेजर जनरल जी डी बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी शामिल हैं.
