Sonam Wangchuk Detention: लद्दाख के प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारत सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई. अदालत का कहना है कि वांगचुक की भाषणों और सरकार द्वारा दिए गए उनके वीडियो की लिखित प्रतिलिपि (ट्रांसक्रिप्ट) में काफी अंतर है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने उनके वीडियो की सटीक लिखित प्रतिलिपि मांगी है. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने स्पष्ट किया है कि आज की तकनीक में अनुवाद बिल्कुल सटीक होना चाहिए, ऐसे में ये गलती चौंकाने वाली है. इसलिए साथ ही कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए है कि वह वांगचु के भाषणों की मूल रिकॉर्डिंग और उसकी सटीक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे.
गलत अनुवाद पर उठे सवाल
अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात सामने आई कि दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए उनके भाषणों के अनुवाद और असल भाषण में काफी अंतर है. सोनम वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वांगचुक ने वे बातें कभी कही ही नहीं, जो सरकार उन पर थोप रही है. अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि जिस भाषण का वीडियो केवल 3 मिनट का है, उसका अनुवाद 8 मिनट का कैसे हो सकता है? कोर्ट का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जमाने में अनुवाद जहां 98% तक सटीक हो सकता है, वहीं सरकार ऐसी गलती कैसे कर सकती है?
हिरासत पर चुनौती
सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया है. सरकार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने भाषणों के जरिए युवाओं को भड़काने और उकसाने की कोशिश की है. वहीं उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने इसे ‘अवैध हिरासत’ बताया है. उन्होंने इस हिरासत को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है. उन्होंने ये तर्क दिया है कि वांगचुक हमेशा शांतिपूर्ण तपस्या और अहिंसा की बात करते रहे हैं और उन पर लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है.
सरकार की दलील
सोनम वांगचुक में हिरासत में लेने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी दलील में कहा कि लद्दाख चीन और पाकिस्तान की सीमा से सटा है, ऐसे में ये बेहद संवेदनशील इलाका है. इसलिए वहां किसी भी प्रकार की उत्तेजना देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती है. सरकार का ये भी कहना है कि जेल में वांगचुक की सेहत का पूरा ख्याल रखा जा रहा है और अब तक 24 बार मेडिकल जांच किया जा चुका है.
