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Indian Army Western Command: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर आज भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड के दौर पर पहुंचे. ये सामान्य दिखने वाला दौरान दुनिया के लिए बेहद असान्य है. जैसे ही गोर के विजिट की जानकारी सामने आई, इसको लेकर राजनीति भी तेज हो गई. गोर इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर सेमुअल पपारो के साथ गए. दरअसल, किसी विदेशी डिप्लोमेट का सेना के कमांड हेडक्वार्टर में आना सामान्य नहीं है. हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि ऐसा पहली बार हुआ है. 

अतीत के पन्नों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि रॉबर्ट ब्लेकविल साल 2001 से 2003 तक भारत में अमेरिका के राजदूत थे. उस वक्त वह पूर्वोत्तर सीमा पर विजिट के लिए गए थे. इसके अलावा साल 2002 में सेना की 2-कोर के हेडक्वार्टर गए थे. बता दें कि भारतीय सेना की वेस्टर्न कमांड की जिम्मेदारी वाले एरिया में पाकिस्तान बॉर्डर भी आता है. 

सामने आया वीडियो 

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अमेरिकी राजदूत के इस विजिट का वीडियो भी सामने आया है. समाचार एजेंसी एएनआई ने एक एक्स पोस्ट में बताया कि भारत में अमेरिकी राजदूत, सर्जियो गोर और US-INDOPACOM कमांडर, एडमिरल सैमुअल जे. पापारो ने वेस्टर्न कमांड के हेडक्वार्टर का दौरा किया और वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के साथ भारत के वेस्टर्न फ्रंट पर स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी डायनामिक्स पर अहम बातचीत की. डेलीगेशन को वेस्टर्न फ्रंट के नज़रिए के बारे में पूरी जानकारी दी गई, जिसमें ऑपरेशनल तैयारी, खास विरासत, ऑपरेशन सिंदूर का काम और देश बनाने और इलाके की स्थिरता को मज़बूत करने में भारतीय सेना की अहम भूमिका शामिल है.

सर्जियो गोर ने दी थी जानकारी 

सोमवार सुबह सर्जियो गोर की ओर से एक एक्स पोस्ट किया गया. इस पोस्ट में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने लिखा था कि अभी चंडीगढ़ पहुंचा हूं. भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड का दौरा करने के लिए काफी एक्साइटेड हूं. जैसे ही उन्होंने ये पोस्ट किया इसकी विजिट को लेकर तमाम प्रकार की चर्चाएं होने लगीं. वहीं, इस दौरा के पूरा होने पर गोर की ओर से दो तस्वीरों को साझा किया गया है और लिखा गया कि U.S. Indo-Pacific Command एडमिरल पापारो और भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड की रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद.

जानकारों ने क्या कहा? 

सर्जियो गोर के एक्स पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुए, जिसमें पूछा जा रहा है कि विदेशी राजदूत को सेना के कमान में जाने की क्या आवश्यकता है. हालांकि, जानकार बताते हैं कि यह एक सामान्य राजनयिक गतिविधि है, इससे पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जब ऐसी गतिविधि देखने को मिली है. यह कमान पंजाब और राजस्थान सेक्टर संभालती है, यह पाकिस्तान सीमा के पास है. चूंकि इस कमान ने ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए गोर का दौरा अहम हो जाता है. 

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