
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा के विस्फोटक प्रदर्शन के बाद अब बीएमसी चुनाव के समीकरण बनने लगे हैं. पूरे देश की नजरें मुंबई के इस बड़े आयोजन पर हैं. मुंबई सहित राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए इलेक्शन 15 जनवरी 2026 को होगा और नतीजे 16 को आएंगे. बृहन्मुंबई महानगर पालिका एशिया का सबसे बड़ा और अमीर नगर निगम है. हां, देश के कई राज्यों का बजट भी इससे कम ही होगा. बजट के लिहाज से अरुणाचल, गोवा जैसे राज्य इसके सामने छोटे नजर आते हैं. BMC का सालाना बजट करीब 75 हजार करोड़ का है. और इस निगम पर काफी समय से ठाकरे परिवार का दबदबा है. ऐसे समय में जब पार्टी दो टुकड़ों में बंट चुकी है. विधानसभा और हाल के चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बीच उद्धव ठाकरे आखिरी किले को बचाने के लिए अपने परिवार को मजबूत कर रहे हैं. हां, 20 साल के लंबे गैप के बाद ठाकरे ब्रदर्स एक हो रहे हैं.
उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) मिलकर BMC का चुनाव लड़ेंगी. औपचारिक घोषणा बुधवार दोपहर में हो जाएगी. संजय राउत ने बताया है कि BMC के अलावा ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, नासिक और पुणे नगर निगमों में फिलहाल एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला हुआ है. खबर फैली तो भाजपा और शिंदे सेना के नेता कहने लगे हैं कि कोई फायदा नहीं होगा. जनता मूड बना चुकी है.
चाचा-भतीजे का अलग प्लान
अंदरखाने से पता चला है कि बीएमसी चुनाव लड़ने के लिए सीट-बंटवारे का फॉर्मूला यह है कि उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना मुंबई के कुल 227 वार्डों में से लगभग 145 से 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि राज ठाकरे की पार्टी करीब 65 से 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बाकी 10 से 12 सीटें शरद पवार की NCP के लिए छोड़ी जाएगी. फिलहाल माना जा रहा है कि ठाकरे भाइयों के साथ पवार का दल गठबंधन कर सकता है. हालांकि इस बात की गारंटी नहीं है कि ठाकरे भाइयों का शरद पवार के साथ गठबंधन हो पाएगा क्योंकि चाचा पवार की NCP भतीजे अजीत पवार के नेतृत्व वाली NCP के साथ पुणे नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने के लिए बातचीत कर रही है. यह घटनाक्रम उद्धव ठाकरे की शिवसेना को मंजूर नहीं होगा.
एक सवाल के जवाब में राउत ने कहा कि अगर पुणे में दोनों NCP एक साथ आते हैं तो अजित पवार को BJP के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में रहने का कोई हक नहीं है. अगर दोनों NCP गठबंधन बनाते हैं तो (उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली) शिवसेना उनके साथ गठबंधन नहीं करेगी. पुणे में MNS और उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना का गठबंधन होगा. अगर कांग्रेस पुणे में हमारे साथ आना चाहती है तो वे आ सकते हैं. हम पुणे और नासिक में गठबंधन के बारे में कांग्रेस से बात कर रहे हैं.
आज प्रेस कॉन्फ्रेंस से साफ हो जाएगा कि इन चुनावों में शरद पवार का स्टैंड क्या रहने वाला है. राउत ने भी कहा कि शरद पवार हमारे मार्गदर्शक हैं. अगर पवार के साथ हमारी बातचीत सफल होती है तो वह भी हमारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आएंगे.
कांग्रेस गठबंधन से निकली
पहले कहा जा रहा था कि उद्धव ठाकरे की ओर से राउत अब भी कांग्रेस को ठाकरे भाइयों के साथ गठबंधन करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी फोन किया है जबकि कांग्रेस इस बात पर अड़ी है कि वह BMC चुनाव अकेले लड़ेगी. राउत ने अब साफ कर दिया है कि कांग्रेस के साथ आगे कोई चर्चा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि चुनाव बाद अगर जरूरी हुआ तो हम कांग्रेस का समर्थन लेंगे. साफ है कांग्रेस राज ठाकरे से उद्धव की दोस्ती के कारण गठबंधन में नहीं जा रही है.
