News in Brief

Bangladesh Violence Dipu Chandra Das News: बांग्लादेश के हालात दिनोंदिन खराब हो रहे हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार में कट्टरपंथियों के हौंसले बुलंद हैं. जिसका फायदा उठाकर वे हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं. पड़ोसी मुल्क में हिंदुओं पर हो रहे इस जुल्म पर भारत में रह रहे कई कट्टरपंथी बहुत खुश हैं. वे इसे उत्सव की तरह सेलेब्रेट कर रहे हैं. ऐसे ही एक कट्टरपंथी ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास (25 वर्ष) की बांग्लादेश में हुई हत्या को सही बताते हुए व्हाट्स ऐप पर शेयर किया. असम पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है. 

हिंदू दीपू की बर्बर मौत की खुशी मना रहा था एजाजुर

पुलिस के मुताबिक, आरोपी का नाम एजाजुर रहमान लस्कर (19 वर्ष) पुत्र मोजैद अली लस्कर है. वह असम के श्रीभूमि जिले के गमोरिया गांव का रहने वाला है. उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो शेयर कर दीप चंद्र दास की हत्या को सही बताते हुए इसे सांप्रदायिक आधार पर सही ठहराने की कोशिश की थी. पुलिस के अनुसार, उसका यह वीडियो उत्तेजक और आपत्तिजनक था. यह राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव को भंग कर सकता था. 

Add Zee News as a Preferred Source

इस भड़काऊ पोस्ट का संज्ञान लेते हुए हैलाकांडी पुलिस ने 23 दिसंबर 2025 को उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ राष्ट्रीय एकीकरण को नुकसान पहुंचाने वाले दावे करने, विभिन्न जातीय-धार्मिक समहों में दुश्मनी फैलाने के आरोप लगाए गए हैं.

असम पुलिस ने आरोपी का मोबाइल किया जब्त

पुलिस ने आरोपी एजाजुर रहमान लस्कर का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है. इस बात की जांच की जा रही है कि इस भड़काऊ पोस्ट को कितने लोगों ने लाइक और शेयर किया था. इसकी पहचान होने के बाद इस वीडियो को वायरल करने वाले बाकी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

बताते चलें कि दीपू चंद्र दास (25 वर्ष) बांग्लादेश की एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे. उनकी फैक्ट्री में काम रने वाले मुस्लिम वर्करों ने आरोप लगाया कि दीपू ने पैगंबर के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की. इसके बाद गुस्साए मुसलमानों की भीड़ ने उन्हें फैक्ट्री से बाहर खींच कर पीट-पीटकर मार डाला. फिर शव के गले में रस्सी डालकर पेड़ पर लटकाया और पेट्रोल डालकर जला दिया.

फर्जी आरोप लगाकर हुई थी दीपू की हत्या

भारत समेत विश्व समुदाय के दबाव में हुई जांच में पुलिस और रैपिड एक्शन बेटालियन ने पाया कि ईशनिंदा का कोई ठोस सबूत नहीं है. यह घटना संभवतः फैक्ट्री में नौकरी या व्यक्तिगत विवाद से जुड़ी थी. इस घटना में बांग्लादेश पुलिस ने 12 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है. इस घटना के बाद से बांग्लादेश के हिंदुओं में डर बढ़ा हुआ है.