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Congress Digvijay Singh RSS – BJP Comment: पहले लालकृष्ण आडवाणी के सामने नरेंद्र मोदी के जमीन पर बैठने वाली तस्वीर शेयर की फिर कांग्रेस की बैठक में संगठन की कमजोरी और स्लीपर सेल एक्टिव होने की बात कह दी. सवाल उठता है कि पिछले 11 साल से खामोश दिग्विजय सिंह अचानक कांग्रेस की दुर्दशा पर क्यों बोल पड़े. ऐसे समय में जब कुछ ही महीने बाद दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्हें अचानक संगठन की याद क्यों आई? वह किससे नाराज थे, या मंशा कुछ और ही है. 

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी कहते हैं कि दिग्विजय के मन में क्या है, ये तो वही जानते हैं लेकिन ऐसे बयान वह बीच-बीच में देते रहे हैं. अभी ये संगठन की बात कर रहे हैं, कुछ साल पहले कहा था कि कांग्रेस को एक बड़ी सर्जरी की जरूरत है. असल में ये अपने महत्व को बनाए रखने के लिए ऐसा कहते हैं. टाइमिंग देखिए. इनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. हो सकता है ये कुछ और उम्मीद कर रहे हों. वैसे भी लोकसभा चुनाव ये हार गए थे. अब कांग्रेस में वो पोजीशन भी नहीं रही.  

राहुल के कभी ‘गुरु’ थे लेकिन अब…

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प्रमोद जोशी साफ कहते हैं कि पहला, जनता के बीच में दिग्विजय सिंह का कोई बड़ा आधार नहीं है. पहले यह राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु के तौर पर जाने जाते थे. खुद को प्रगतिशील मानते हैं. हालांकि एमपी में इनके सीएम कार्यकाल के बाद ही कांग्रेस का डाउनफाल शुरू हो गया. दूसरा, जब 2008 का मुंबई हमला हुआ था तब इन्होंने हमले के पीछे आरएसएस का हाथ बता दिया था. इस तरह से देखें तो ये समय-समय पर सनसनीखेज बयान देते रहे हैं. 

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इस वक्त भी आशय हो सकता है कि कांग्रेस में अपने महत्व को बनाए रखा जाए. अलग किस्म का बयान देने की यह एक बड़ी वजह हो सकती है. वैसे भी पार्टी के अंदर इनकी स्थिति अलग-थलग हो चुकी है. अब पहले वाली स्थिति नहीं है लेकिन यह तो चाहते ही हैं कि महत्व बरकरार रहे. इस समय कांग्रेस पार्टी में संशय का दौर है. एक तबका चाहता है कि राहुल की जगह प्रियंका गांधी को आगे लाया जाना चाहिए. अब इनका कांग्रेस में ज्यादा महत्व नहीं है, पार्टी भी उसी हिसाब से इन्हें देखती है. ये भी चाहते हैं कि राहुल या प्रियंका वाले खेमे में खुद को बनाकर रखा जाए.  

चर्चा यह भी है

हां, अंदरखाने चर्चा यह भी है कि दिग्विजय सिंह की नाराजगी के दो बड़े कारण हो सकते हैं. पहला, वह केसी वेणुगोपाल की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं. दूसरा, मध्य प्रदेश की राजनीति में उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं मिल रही है. कुछ ही महीने में राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है तो हो सकता है पुरानी प्रेशर पॉलिटिक्स वाला दांव चल रहे हों. 

वेणुगोपाल से नाराजगी की वजह?

दिग्विजय का कहना है कि भाजपा-संघ से मुकाबला करने के लिए वार्ड स्तर पर हमारा संगठन मजबूत होना चाहिए. साथ ही संगठन का विकेंद्रीकरण होना चाहिए. उनका इशारा यह था कि किसी एक के हाथ में सारी पावर न हो. इस समय संगठन का सारा काम महासचिव केसी वेणुगोपाल पर ही है तो इशारा भी उन पर सीधा था. वेणुगोपाल राहुल के करीबी हैं. कुछ लोग अब इसे दिग्विजय VS वेणुगोपाल की फाइट भी कह रहे हैं. चर्चा है कि दोनों के बीच में उस दिन बहस भी हुई थी. सच जो भी हो, कांग्रेस आलाकमान इसे ज्यादा तूल नहीं दे रहा है. दिग्विजय को अब आगे सोचना है. 

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