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Amit Shah In Assam: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार 29 नवंबर 2025 को असम पहुंचे. यहां उन्होंने नौगांव में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस को घुसपैठ के मुद्दे पर भी खूब घेरा. गृहमंत्री ने कहा,’ असम 10 साल पहले तक एक बुरे सपने से गुजर रहा था, जब हिंसा, बंद और हत्याएं काफी ज्यादा थीं.’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी असम का विकास नहीं किया. 

‘कांग्रेस ने देश में घुसपैठियों को बसाया…’ 

अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पार्टी ने देश में घुसपैठियों को बसाया. वहीं मोदी सरकार की प्राथमिकता इन घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करना है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर की शांति के लिए कई बड़े कदम उठाए. उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौता किया गया. वहीं घुसपैठियों को भी यहां से बाहर किया जा रहा है. गृह मंत्री ने कहा कि घुसपैठियों को पूरे देश से निकाला जाएगा.   

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‘कांग्रेस ने असम आंदोलन के शहीदों का सम्मान नहीं किया…’ 

गृहमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की ओर से घुसपैठियों को अपना वोट बैंक बनाकर असम में बसाया गया. उन्होंने यहां की संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया. इतना ही नहीं कांग्रेस सरकार ने कभी भी असम आंदोलन के शहीदों का सम्मान नहीं किया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पूर्वोत्तर में कई उग्रवादी संगठनों के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते किए गए, जिनमें से 92 प्रतिशत शर्तों को लागू भी किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि तकरीबन 10,500 उग्रवादियों ने सरेंडर मुख्यधारा का रुख किया है.

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असम मे हिंसक घटनाएं 

बता दें कि असम में 1980 के दशक में असम आंदोलन, साल 1983 का नेली नरसंहार, साल 2008 का गुवाहाटी बम विस्फोट और साल 2012 का बोडो-बंगाली मुस्लिम दंगे जैसी कई हिंसक घटनाएं हुई हैं. ये हिंसा मुख्य रूप से प्रवासी मुद्दे, जमीन विवाद और भाषाई-सांस्कृतिक तनावों से प्रेरित थीं. इन हिंसा में  कई हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए. असम में एक समय पर अलगाववाद और उग्रवाद भी जोरों पर था, जिसमें यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) जैसे समूह का उदय और सुरक्षा बलों के साथ उनका टकराव शामिल है.