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Maharashtra Municipal Election: महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के मामलों की जांच शुरू कर दी है. आयोग ने विभिन्न अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या विपक्षी उम्मीदवारों पर चुनाव से हटने के लिए दबाव या प्रलोभन दिया गया था. एसईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव जीत की घोषणा नहीं की जाएगी.

बता दें, राज्य के पिंपरी-चिंचवड, जलगांव, और छत्रपति संभाजी नगर नगर निगमों में भाजपा के कम से कम एक-एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, जबकि कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम में पांच भाजपा और चार शिवसेना उम्मीदवारों के निर्विरोध चुनाव जीतने की संभावना है. चुनाव से पहले आरोप लगाए गए हैं कि सत्ताधारी दल ने विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के लिए डराने-धमकाने की रणनीतियां अपनाईं.

रेखा रेडकर ने लगाया गंभीर आरोप 

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इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) की नेता रेखा रेडकर ने आरोप लगाया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया. उन्होंने कहा कि चुनाव तंत्र पक्षपाती है. भाजपा उम्मीदवारों को समय सीमा के बाद भी दस्तावेज जमा करने की अनुमति दी गई, जबकि मुझे समय सीमा से पहले पहुंचने के बावजूद नामांकन का टोकन नहीं दिया गया. रेडकर के आरोपों के बाद, चुनाव आयोग को कई अन्य वार्डों और निगमों से भी इसी तरह की शिकायतें मिली हैं.

एसईसी के अधिकारी ने बताया कि आयोग को उन नौ वार्डों से रिपोर्ट मिलेंगी जहां निर्विरोध चुनाव हुए हैं. अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट 3 जनवरी तक प्राप्त होगी. उसके बाद संबंधित नगर निगमों के रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ), बीएमसी आयुक्त और पुलिस आयुक्तों से यह जांच की जाएगी कि क्या विपक्षी उम्मीदवारों पर चुनाव से हटने के लिए दबाव डाला गया था. इस बीच, पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ ने भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने अन्य उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के लिए चुनाव अधिकारियों के साथ मिलीभगत की. राठौड़ ने कहा कि नरवेकर अपने रिश्तेदारों के नामांकन के लिए आरओ के साथ बैठे थे और भाजपा उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित करने की कोशिश कर रहे थे.

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विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी आरोप केवल पार्टी की हार के डर से लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर तक सभी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने का अवसर दिया गया था. आरोप लगाने वाले लोग निर्धारित समय सीमा के बाद आए थे. इसके अलावा, एसईसी ने ठाणे पुलिस यातायात विभाग के उप पुलिस आयुक्त पंकज शिरसात द्वारा किए गए चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की जांच भी शुरू कर दी है. शिरसात ने एक समाचार पत्र के कार्यक्रम में प्रशासन की समृद्धि एक्सप्रेसवे और ठाणे में यातायात जाम को कम करने की योजनाओं का खुलासा किया था जो आचार संहिता का उल्लंघन प्रतीत होता है. एसईसी ने इस मामले में डीजीपी रश्मी शुक्ला से रिपोर्ट मांगी है.