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Dal lake Kashmir: श्रीनगर की बुलेवार्ड रोड पर, खासकर डलगेट से शंकराचार्य घाट तक लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी पर, जो डल झील का मुख्य हिस्सा है. वहां पर चूहों के भारी आतंक ने मशहूर डल झील के बांध को काफी नुकसान पहुंचाया है. जिससे पब्लिक सेफ्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता के लिए तुरंत खतरा पैदा हो गया है. चूहों की बड़े पैमाने पर बिल खोदने की वजह से झील के किनारे की मिट्टी कमजोर हो गई है, जिससे साफ दरारें, गहरे गड्ढे और पैदल चलने के रास्ते अस्थिर हो गए हैं.

हाल ही में, फरवरी से सितंबर 2025 के बीच उस खास इलाके में फुटपाथ और डल झील बांध के बड़े हिस्से तीन बार ढह चुके हैं. कटाव से बांध की नींव कमजोर हो रही है, जिससे यह नाजुक हो गया है. इसके और ढहने का खतरा है, जो पैदल चलने वालों और बांध के किनारे बैठने वाले लोगों दोनों के लिए खतरा है. इस सड़क पर भारी वाहनों का ट्रैफिक स्थानीय लोगों और वहां से गुजरने वाले टूरिस्टों के लिए एक बड़ा खतरा है.

टूरिस्टों की वजह से चूहे?
डल झील में शिकारा चलाने वाले स्थानीय लोगों ने कहा कि यह एक बड़ी चिंता का विषय है. उनका आरोप है कि चूहों की आबादी अब हजारों में बढ़ गई है और इसका कारण झील के किनारे आने वाले टूरिस्टों और स्थानीय लोगों द्वारा फेंके गए खाने के कचरे और बचे हुए खाने का खराब मैनेजमेंट है.  डलगेट से शंकराचार्य घाट तक बांध और सड़क पर सैकड़ों गहरे गड्ढे और दरारें साफ दिखाई दे रही हैं. शिकारा चलाने वाले उमर अहमद ने कहा, ‘हमने मिलकर इन छेदों को बंद करने के लिए उनमें बहुत सारे पत्थर डाले हैं. अगर आप शाम को आएंगे तो देखेंगे कि यहां कितने चूहे घूमते हैं, 6-7 इंच के बड़े-बड़े चूहे यहां घूमते हैं. वे मिट्टी खोदते हैं, यह दीवार गिर सकती है, हमारी शिकारा खराब हो सकती है. स्थानीय लोग या टूरिस्ट, सबके हाथों में खाने-पीने की चीजें होती हैं और वे यहीं फेंक देते हैं. मैं सरकार से रिक्वेस्ट करता हूं कि यहां कचरा फेंकने पर फाइन लगना चाहिए, देखिए यहां कितने चूहे हैं, उन डस्टबिन में चूहे जाते हैं, वे छेद बंड में हैं, जो खोखला हो गया है और कभी भी गिर सकता है’.

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क्यों बढ़ रही चूहों की संख्या?
एक और शिकारा वाला फिरोज अहमद ने कहा, ‘जब शाम को टूरिस्ट यहां बैठते हैं, तो वे कुछ खाते हैं और इससे चूहे आकर्षित होते हैं और वे बंड और सड़क को खोखला कर रहे हैं. यह खतरनाक है अगर चूहे हमारी शिकारा में चले जाएं और अचानक चूहे दिख जाएं तो वे झील में कूद सकते हैं और इससे बाउंड्री वॉल भी कमजोर हो गई है. जो लोग यहां खाने-पीने की चीजें बेचते हैं जैसे भेलपुरी, इससे चूहों की संख्या बढ़ रही है’. निवासियों और नाव वालों ने J&K लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA) और अन्य अधिकारियों से किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया है. यह सिर्फ सामने की तरफ नहीं है, डल झील की स्थिरता के लिए काम करने वाले वॉलंटियर्स का आरोप है कि लापरवाही के कारण अंदरूनी डल झील लगभग खत्म होने की कगार पर है.

टूरिस्टों पर जुर्माना? 
तारिक अहमद (डल झील वॉलंटियर) ने कहा, ‘कुछ महीनों से हमने देखा है कि डल झील की बाउंड्री एक तरफ झुक गई है, कहीं-कहीं यह खराब हो गई है और जैसे ही वे एक जगह रिपेयर करते हैं, दूसरी जगह खराब हो जाती है.  हमें पता चला कि यह चूहों के कारण है और जो लोग यहां खाने-पीने की चीजें छोड़ते हैं, उन पर यूरोप की तरह फाइन लगना चाहिए. यह सिर्फ यहीं नहीं है, आप मेरे साथ आइए, डल झील का अंदरूनी हिस्सा देखिए, सब खत्म हो गया है, डल झील के अंदर बहुत सारे कुत्ते और दूसरे जानवर हैं, हमें सिर्फ फोटो नहीं खींचनी चाहिए, हमें इसके बारे में गंभीरता से कुछ करना चाहिए’. 

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