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DNA: ट्रंप ने पहली बार दुनिया को अराजकता के दलदल में नहीं धकेला है. जब से वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं अपनी नीतियों से उन्होंने पूरी दुनिया में अराजकता का माहौल बनाया है. दुनिया को आर्थिक अस्थिरता के समंदर में डुबाने के लिए ट्रंप ने टैरिफ को हथियार बनाया. वो मनमाने तरीके से दुनिया के हर देश पर टैरिफ लगा चुके हैं. कई बार यू टर्न भी ले चुके हैं. ट्रंप ने एक बार फिर यू टर्न लिया है. इस बार उनका यू टर्न धमकी वाले अंदाज में सामने आया है। अब हम ट्रंप के इसी धमकी वाले यू-टर्न का विश्लेषण करेंगे.

वेनेजुएला में एक्शन के बाद अपनी बाहुबली वाली छवि को और चमकाने के लिए ट्रंप ने इस बार भारत को आर्थिक हमले की धमकी दी है. हां सही सुनाआपने, भारत को आर्थिक हमले की धमकी दी है. कहा है भारत पर टैरिफ बढ़ा देंगे. भारत को अपना मित्र बताने वाले ट्रंप के स्वर वेनेजुएला एक्शन के बाद बदल गए हैं. पहले भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुके ट्रंप फिर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं. अब सवाल ये है कि ट्रेड डील की बात करने वाले ट्रंप अचानक क्यों टैरिफ बढ़ाने की धमकी देने लगे हैं. क्या ये वेनेजुएला पर भारत की प्रतिक्रिया का रिएक्शन है. या डीलर ट्रंप भारत को धमकी देकर अमेरिका के लिए अच्छी ट्रेड डील की संभावना तलाश रहे हैं.

आखिर क्या है ट्रंप की धमकी के पीछे की खीझ?
पहले ट्रंप की धमकी के पीछे छिपी खीझ को समझते हैं. ट्रंप चाहते हैं कि भारत अपने पुराने मित्र रूस से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दे. और अमेरिका से ही कच्चा तेल खरीदे. भारत ने ट्रंप की इन मनमानी को नहीं माना है. नवंबर में कच्चे तेल आयात का जो आंकड़ा आया है उसके मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत ने रूस से 7.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया है. ये देश के कुल तेल आयात का करीब 35% है, यह आंकड़ा मई 2025 के बाद सबसे ज्यादा है. नवंबर में ही भारत ने अमेरिका से 1 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया. ये भारत के कुल तेल आयात का 6.6 प्रतिशत है. ये आंकड़ा पिछले 7 महीने में सबसे ज्यादा है. साफ है भारत ने अपने राष्ट्रीय हित का ध्यान रखते हुए कच्चा तेल आयात किया है. कच्चे तेल के आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन भारत ने रूस से आयात बंद नहीं किया है.

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ट्रेड डील को लेकर भारत-अमेरिका की वार्ता जारी
चीन के प्रसिद्ध विद्वान कन्फ्यूशियस ने कहा है कि ‘सज्जन व्यक्ति न्याय को महत्व देते हैं; छोटे व्यक्ति लाभ को’ ट्रंप उसी छोटे व्यक्ति की तरह सिर्फ अपने लाभ को महत्व दे रहे हैं. ये ट्रंप का स्वभाव है. वो अपने फायदे के लिए राष्ट्रपति कम और डीलर की तरह ज्यादा व्यवहार करते रहे हैं. ट्रेड डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच अब तक 6 राउंड की वार्ता हो चुकी है. यानी बातचीत चल रही है. समझिए ट्रंप ने जो टैरिफ वाली नई धमकी दी है उसके पीछे दवाब बनाने की रणनीति है. दरअसल भारत औऱ अमेरिका के बीच जल्द ही ट्रेड डील पर अगले दौर की बातचीत शुरू होनेवाली है. अमेरिका चाहता है कि भारत उसके डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए अपना बाजार खोले. भारत किसानों के हित को देखते हुए इसके लिए तैयार नहीं है.

भारत का फोकस ‘मेड इन इंडिया’ पर
अमेरिका मेडिकल डिवाइसेस के लिए भी अधिक एक्सेस मांग रहा है. जबकी भारत का फोकस मेड इन इंडिया पर है. अमेरिका दवाओं के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स को लेकर कड़े नियम चाहता है. ऐसे में दवाएं महंगी हो जाएंगी. भारत जेनेरिक दवाओं के लिए लचीलापन चाहता है. समझिए ट्रंप मनमानी ट्रेड डील चाहते हैं, जबकी भारत बैलेंस्ड डील चाहता है. अब वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करने की उम्मीद लगाए ट्रंप चाहते हैं कि भारत अपनी जरूरत का पूरा तेल अमेरिका से ही खरीदे. लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों को देखते हुए फैसला कर रहा है.

टैरिफ के बाद अमेरिकी परिवारों पर पड़ा बोझ
प्रसिद्ध आर्थिक विद्वान ओरिसन स्वेट मार्डन ने कहा है कि हर व्यापारी के लिए स्वर्णिम नियम यह है, खुद को ग्राहक की जगह पर रखो. ट्रंप यही नहीं करना चहते हैं. वो हमेशा अपने पक्ष को मजबूत रखना चाहते हैं. या मजबूत होने का दिखावा करना चाहते हैं. भारत से ट्रेड डील ट्रंप की मजबूरी बन गई है. इसे कुछ आंकड़ों के जरिए समझते हैं. रिपोर्टस के मुताबिक भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिका परिवारों पर सालाना 1,200 से 2,300 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है. अमेरिका में कोर गुड्स यानी टीवी, कपड़े, फर्नीचर जैसे सामान करीब 2% तक महंगा हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिका की GDP पर 0.3% का नकारात्मक असर पड़ेगा.

ट्रंप के टैरिफ के बावजूद अमेरिका-भारत का निर्यात बढ़ा
दूसरी तरफ ट्रंप के टैरिफ के बाद भी अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ा है. इतना ही नहीं भारतीय भारतीय अर्थव्यवस्था भी करीब 8 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है. यानी ट्रंप का टैरिफ भारत पर बेअसर साबित हुआ है. वही टैरिफ से अमेरिका में परेशानी बढ़ी है. इसलिए अमेरिकी सांसद ट्रंप पर भारत से ट्रेड डील करने का दवाब बना रहे हैं. लेकिन वेनेजुएला पर हमला करने के बाद ट्रंप अब अपनी बाहुबली वाली छवि को और चमकाने के लिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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