News in Brief

India Violence Connection With Pakistan: पाकिस्तान के आर्थिक, राजनीतिक हालात कैसे हैं ये बताने की जरूरत नहीं है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का क्या हाल है पूरी दुनिया जानती है. अल्पसंख्यक तो छोड़िए अहमदिया  मुसलमान भी पाकिस्तान में कट्टरपंथियों की नफरत के शिकार होते हैं. पाकिस्तान को अपना घर नहीं दिखता, उसे भारत दिखता है. दिल्ली के तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन को मजहबी रंग देने के लिए पाकिस्तान की प्रोपेगेंडा मशीन एक्टिव हो गई है. यहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी हो गई है. मौके से मलबा भी हटाया जा चुका है. मस्जिद पर एक्शन की अफवाह फैलाने वालों की तलाश हो रही है. हिंसा में शामिल बाहरी लोगों की पहचान की कोशिश हो रही है. अब इसपर पाकिस्तान ने अपना प्रोपेगेंडा शुरु कर दिया है. 

 नगर निगम के एक्शन को मजहबी रंग दे रहा पाकिस्तान 

इस्लामाबाद भारत में नगर निगम के एक छोटे से एक्शन को पाकिस्तान मजहबी रंग दे रहा है. पाकिस्तान के कट्टरपंथी नीति निर्धारकों को लग रहा है कि उन्हें भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का मौका मिल गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता MCD के अतिक्रमण हटाओ अभियान पर बयानबाजी कर रहा है. मतलब पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय या तो बहुत ही खाली है. उसके पास कोई काम नहीं है. या ये उसका बौद्धिक दिवालियापन है, उसे विदेश मंत्रालय की मर्यादा की समझ नहीं है. या फिर ये बयान पाकिस्तान के मजहबी प्रोपेगेंडा का साक्ष्य है.ये पाकिस्तान का महजबी प्रोपेगेंडा का साक्षात सबूत है. ये पाकिस्तान की बौखलाहट है. जानते हैं पाकिस्तान क्यों बौखलाया हुआ है. क्योंकि उसकी भारत विरोधी टूलकिट का पर्दाफाश हो गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाया गया. ये सफेद झूठ है. मस्जिद सुरक्षित है, मस्जिद पर कोई कार्रवाई भी नहीं होनी थी. मस्जिद के पास बने अवैध निर्माण को तोड़ा गया. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने महजबी प्रोपेगेंडा का विस्तार करते हुए कहा है कि भारत में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.पाकिस्तान को जानना चाहिए कि भारत का संविधान नागरिकों से भेदभाव की इजाजत नहीं देता, हां पाकिस्तान में जरूर ईशनिंदा कानून की आड़ में अल्पसंख्यकों का नरसंहार होता है

बेनकाब हुआ पाकिस्तान का टूलकिट 

दुनिया की बड़ी एजेंसियों की रिपोर्ट्स पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों यानी हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथियों की हिंसा और नफरत का प्रमाण पेश करती हैं. अल्पसंख्यकों के अधिकार के मुद्दे पर पाकिस्तान दुनिया के सबसे बदतर देशों में शामिल है. इसलिए आज भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आईना दिखाया. और पाकिस्तान को अपनी गिरेबान में झांकने की सलाह दी. भारत की छवि पर बट्टा लगाने के लिए पाकिस्तान ऐसी हरकतें पहले भी कर चुका है. बेहद स्थानीय मुद्दों को पाकिस्तान तूल देता रहा है. लेकिन तुर्कमान गेट वाले मुद्दे को पाकिस्तान ने बेहद समझ बूझ कर, एक बड़ी साजिश के तहत चुना है. अपने प्रोपेगेंडा के जरिए पाकिस्तान एक तरफ भारत में बैठे कट्टरपंथियों को भड़काना चाहता है. दूसरी तरफ अपनी टूलकिट के बेनकाब होने से उपजी बौखलाहट को ढंकना चाहता है. तुर्कमान गेट पर मस्जिद तोड़नेवाली जिस अफवाह को पाकिस्तान पूरी दुनिया में प्रचारित करने का प्रोपेगेंडा करा रहा है. वही काम पाकिस्तान के कुछ वैचारिक बंधुओं ने पुरानी दिल्ली में किया था. इसके लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया गया था. पुलिस ने अफवाह फैलानेवाले 10 सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की पहचान की है. इन्हें पूछताछ में शामिल होने का नोटिस दिया गया है. उनमें से चार प्रमुख अफवाहबाजों में पहला है सलमान खान. इंस्टाग्राम पर उसके 23 लाख फॉलोअर हैं जबकि फेसबुक पर क़रीब 4 लाख फॉलोअर है. इसने मस्जिद पर एक्शन वाली अफवाह फैलाई थी. दूसरी है ऐमन रिजवी, इसने भड़काऊ पोस्ट की थी. ये खुद को  NGO से जुड़ी बताती है. ये शाहीनबाग़ में CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भी एक्टिव थी. तीसरा है खालिद मलिक..ये यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. इसने भड़काऊ वीडियो बनाया था. अफवाह वाले टूलकिट गैंग का चौथा सदस्य है सईद उमैर अली. ये भी यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. इंस्टाग्राम पर इसके करीब 15 हजार फॉलोअर हैं. इसने भी भड़काऊ वीडियो पोस्ट किया था. 

Add Zee News as a Preferred Source

कौन है इस टूलकिट का सरगना? 

भारत के खिलाफ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को साजिश वाली टूलकिट का हथियार बनाना, ये पाकिस्तान का पुराना पैटर्न है. यू-ट्यूबर ज्योति मल्होत्रा से पाकिस्तान ने भारत की संवेदनशील जानकारी जुटाई थी. यही पैटर्न तुर्कमान गेट हिंसा में भी दिख रहा है. तुर्कमान गेट पर एक्शन को लेकर अफवाह फैलती है. सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मस्जिद तोड़ने की अफवाह फैलाते हैं. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय भी इसी अफवाह को विस्तार देता है. यानी यहां अफवाहबाज सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और पाकिस्तान विदेश मंत्रालय दोनों एक ही पेज पर हैं. ये पाकिस्तान की भारत विरोधी टूककिट की साजिश हो सकती है. एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं कि तुर्कमान गेट पर मस्जिद तोड़ने की अफवाह फैलाने वाले क्या सिर्फ वैचरिक तौर पर पाकिस्तान से जुड़े हैं या उनका पाकिस्तान के कट्टरपंथी नेटवर्क से कोई सीधा कनेक्शन भी है. तुर्कमान गेट पर हुई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से पाकिस्तान को इसलिए दर्द हो रहा है क्योंकि उसकी भारत विरोधी टूलकिट बेनकाब हो गई, नाकाम हो गई. सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के जरिए हिंसा कराने की उसकी साजिश को ध्वस्त कर दिया गया है. अफवाह वाली टूलकिट के सदस्यों से पूछताछ में साजिश के तार खुलेंगे. सच सामने आएगा कि हिंसा की साजिश किसने रची थी. इस टूलकिट का सरगना कौन है. पुलिस ने पत्थरबाजी के आरोप में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है. आज पथराव करेवाले मोहम्मद इमरान को भी दिल्ली पुलिस ने पकड़ा. पुलिस ने आज एक वीडियो भी जारी किया. वीडियो में पुलिस ने बताया है कि कैसे पत्थर बरसानेवालों के खिलाफ एक्शन हो रहा है. जिन लोगों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए, कैसे उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है. दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट पर हुई पत्थरबाजी के आरोप में सुल्तानपुरी के इमरान को गिरफ्तार किया है. जामिया इलाके में रहनेवाले एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से पूछताछ हो रही है. अब समझिए, तुर्कमान गेट से 20 किलोमीटर दूर है सुल्तानपुरी का इलाका. तुर्कमान गेट पर रात के करीब 1 बजे के बाद पत्थरबाजी हुई थी. सवाल ये है कि इमरान तुर्कमान गेट पर क्या कर रहा था. क्या तुर्कमान गेट पर हुए पथराव की घटना में बाहर से आए उन्मादी शामिल थे. ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि संभल और बरेली में हुई पत्थरबाजी में भी यही पैटर्न दिखा था.

घटनाओं का एक जैसा पैटर्न 

नवंबर 2024 में संभल में जामा मस्जिद के बाहर पुलिस पर पथराव हुआ था. अफवाह मस्जिद पर एक्शन की उड़ाई गई थी. यहां पथराव में बाहर से आए उन्मादी शामिल थे. सितंबर 2025 में बरेली में पुलिस पर पथराव हुआ. यहां भी अफवाह के बाद हिंसा हुई. जांच में ये तथ्य सामने आया कि हिंसा से पहले बाहर से आए 5 हजार उपद्रवी मस्जिदों में रुके थे. अब 2026 की शुरुआत में ही दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास पुलिस पर पत्थर बरसे हैं. बाहर से आया एक पत्थरबाज पकड़ा गया है. तो क्या दिल्ली में भी संभल और बरेली वाला पैर्टन दोहराया गया है. ये तथ्य संकेत दे रहे हैं कि तुर्कमान गेट के पास पथराव अचानक नहीं हुआ था. ये पथराव तात्कालिक आक्रोश की उपज नहीं था. कट्टरपंथियों ने हिंसा की साजिश की थी. पथराव के लिए बाहर से उन्मादियों को बुलाया गया था. पहले से ही मस्जिद तोड़ने की अफवाह फैलाने की तैयारी थी. यानी सोच समझ कर हिंसा की टूलकिट तैयार की गई थी. इस टूलकिट में शामिल हर हिंसक औजार की भूमिका तय थी. सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को मस्जिद पर एक्शन की अफवाह फैलानी थी. बाहर से आए पत्थरबाजों को पुलिस पर पथराव शुरू करना था. उसके बाद अफवाह के शिकार दूसरे लोग तो थे ही. इसलिए अब मुस्लिम धर्मगुरु भी इस पथराव पर सवाल उठा रहे हैं. मुसलमानों को तुर्कमान गेट की मस्जिद फैज-ए-इलाही के मामले से दूर रहना चाहिए। यह स्थिति तब्लीगी जमात के दो ग्रुपों के बीच अंदरूनी दुश्मनी और झगड़े की वजह से पैदा हुई है। मौलाना साद और मौलाना जुबैर के बीच काफी असहमति और मनमुटाव है, और इसी अंदरूनी झगड़े की वजह से मस्जिद फैज-ए-इलाही में घटना हुई और बुलडोजर की कार्रवाई हुई. पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए इस हिंसक टूलकिट वाली साजिश को फ्यूज कर दिया. इसी की बौखलाहट तुर्कमान गेट के कट्टरपंथियों और इस्लामाबाद में बैठे उनके वैचारिक आकाओं में दिख रही है. पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी इस बौखलाहट की तीव्रता वैसे-वैसे ही बढ़ेगी.