
India NSA Ajit Doval: तुर्किये के साथ डिफेंस डील को देखते हुए पाकिस्तान का जोश High है. लेकिन आज भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने जो संदेश दिया है, उससे इस्लामाबाद के जोश के साथ होश भी उड़ गए होंगे. पाकिस्तान में लंबा वक्त बिताकर भारत के इस दुश्मन को करीब से समझने वाले जासूसी के सरताज अजित डोभाल ने ऐलान-ए-जंग कर दिया है. ये ऐलान-ए-जंग है क्या, इसके बारे में जानने से पहले आज आपको देश के NSA की युद्ध से जुड़ी परिभाषा बेहद ध्यान से समझना चाहिए.
भारत के 007 यानी अजित डोभाल के बयान का अर्थ सिर्फ किसी एक युद्ध तक सीमित नहीं है. बल्कि इसके मायने कही ज्यादा गहरे हैं. देश के युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने ये बता दिया कि कभी-कभी ऐसे मौके भी आते हैं जब युद्ध से ही लंबी अवधि के शांतिकाल को हासिल किया जा सकता है. अजित डोभाल ने बताया है किस तरह एक सोची समझी और मजबूत सैन्य कार्रवाई दुश्मन के हौसलों को जर्रा-जर्रा कर देती है. अब हम आपको आसान भाषा और तथ्यों के साथ डोवल डॉक्ट्रिन का ये चैप्टर समझाने जा रहे हैं.
ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के बहुत अंदर 11 सैन्य ठिकानों पर हमला किया था. इस सटीक हमले की वजह से पाकिस्तान का मनोबल टूटा और पाकिस्तानी फौज को हमले रोकने की अपील करनी पड़ी थी. इसी तरह गलवान के टकराव के दौरान कैलाश हाइट्स पर अचानक कब्जा करके भारत ने चीन का भी मनोबल तोड़ दिया था. इस कार्रवाई के बाद ही चीन ने LAC पर डिएस्केलेशन यानी सैनिकों को वापस भेजने पर बातचीत शुरु कर दी थी. 1971 के युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए नौसैनिक बेड़ा भेजा था. ये खबर मिलते ही भारतीय नौसेना ने कराची बंदरगाह को तबाह कर दिया था.
यह भी पढ़ें: … तो इस वजह से फोन या इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते अजीत डोभाल, खुद किया खुलासा; जानिए दूर रहने पर परिवार से कैसे करते हैं बात
अजित डोभाल का संदेश
इस एक्शन से अमेरिका को समझ आ गया कि पाकिस्तानी नौसेना की अब मदद नहीं की जा सकती. कराची में किए गए ऑपरेशन ट्राइडेंट की वजह से ही अमेरिकी नौसेना हतोत्साहित होकर वापस लौट गई थी.किस तरह युद्ध से शत्रु का मनोबल तोड़ा जा सकता है यही अजित डोवल ने आज समझाया है. ऑपरेशन सिंदूर से पहले जिसके बाद देश के युवाओं को संबोधित करते हुए अजित डोवल ने एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया है. ये संदेश आपको भी ध्यान से समझना चाहिए. वर्षों या दशकों तक नहीं बल्कि सदियों तक भारत पर आक्रमणकारियों ने हमले किए. भारत की संपदा को लूटा. इसी इतिहास को लेकर अजित डोभाल कह रहे हैं कि शत्रुबोध बहुत आवश्यक है ताकि आने वाले समय में देश के अंदर या बाहर से कोई खतरा भारत को क्षति ना पहुंचा सके.
