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Has Soul of Mahmud Ghaznavi Returned: सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक देवभवन नहीं है. यह एक शिलालेख है. जिसपर लिखा शब्द-शब्द ये संदेश दे रहा है कि सनातन पर वैचारिक, आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य आक्रमण करने वालों का वजूद मिट्टी में मिल गया. लेकिन हजारों वर्ष पुराना आस्था का वो केंद्र आज भी समुद्र के किनारे भगवा विचार और विश्वास का प्रसार कर रहा है.  

सनातन पर हमला सिर्फ ग्यारहवीं शताब्दी में नहीं हुआ, आज भी हो रहा है. एक हजार साल पहले आक्रमणकारी का नाम महमूद गजनवी था. आज उसका नाम,उसकी पहचान कुछ और है. तब महमूद गजनवी ने धन के लिए धर्म को हथियार बनाया था.आज भी महमूद गजनवी के कुछ वैचारिक वंशज पैसे के लिए सनातनी आस्था पर चोट कर रहे हैं.गजनवी तलवार से वार करता था. आज उसके विचारधारा के वाहक प्रोपेगेंडा से प्रहार कर रहे हैं.वो संपदा के लिए मंदिर को लूटता था और ये डॉलर के लिए आस्था को लूट रहे हैं.

यूपी पुलिस ने पकड़े दो ‘कालनेमी’

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ऐसे ‘कालनेमी’ पकड़े गए हैं, जो व्यवस्थित ढंग से हिंदुत्व को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे. जो एजेंडाधारी संगम के तट पर सनातनी श्रद्धा से खिलावाड़ कर रहे थे. उनके ही कुछ वैचारिक सहोदरों ने 4 दिन पहले दिल्ली में दंगा फैलाने की कोशिश की थी. दोनों का उद्देश्य एक ही है. इसलिए हम इन्हें “आज के गजनवी” कहकर संबोधित कर रहे हैं.

सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि ‘आज के गज़नवी’ ने प्रयागराज में क्या किया है? जहां आस्था का संगम है. जहां सनातनी श्रद्धा का मेला लगा हुआ है. उस माघ मेले में. लाखों सनातनियों के बीच खड़े होकर. साधु-संतों और महंतों की उपस्थिति में. ‘आज के गज़नवी’  सनातन को बदनाम करने की साजिश कर रहे थे. पूरी तरह से स्क्रिप्टेड षड्यंत्र, जो ‘कुंठा क्लब’ के लिए बौद्धिक खुराक बन रहा था.

सोशल मीडिया के लिए कॉन्टेंट क्रिएट करने वाले प्रदीप साहू और चंदन कुमार माघ मेले में पहुंचे थे. प्रदीप साहू ने चंदन कुमार के माथे पर चंदन लगाया. उसे भगवा कपड़ा पहनाया. गले में रूद्राक्ष की माला डाली. माथे पर भगवा मुरेठा बांधा. कुल मिलाकर उसे एक साधु के भेष में माघ मेले में खड़ा कर दिया. इसे बहुत ही ध्यान से सुनिएगा. प्रदीप साहू ने चंदन नाम के छद्म बाबा से टीका लगवाया. 

व्यूज पाने के लिए बनाया फर्जी वीडियो

फिर गायत्री मंत्र पूछा. गायत्री मंत्र का नाम सुनकर ये छद्म भेषधारी चंदन भागने लगा. प्रदीप साहू ने ये वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया. जिसमें ये दिखाने की कोशिश की कि माघ मेले में पहुंचे बाबाओं को गायत्री मंत्र तक नहीं आता है. एक ही दिन में 60 लाख लोगों ने इस वीडियो को देख लिया. वीडियो के नीचे लोगों ने टिप्पणी की. विशेषकर बौद्धिक बेइमानों ने इसे सत्य मानकर सनातन के खिलाफ अपनी दूषित सोच की उल्टी करनी शुरू कर दी.

जब पुलिस को पता चला. तब पुलिस ने प्रदीप साहू और छद्मभेषधारी बाबा चंदन को गिरफ्तार किया. दोनों ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया में अपनी पहचान बनाने के लिए और व्यूज के जरिए पैसा कमाने के लिए ये स्क्रिप्टेड वीडियो बनाया था. 

जरा सोचिए. ये कितनी महीन साजिश है. जहां हम साधु-संतों और ऋषि-मुनियों को पूजते हैं. जिस संगम के तट पर साधुओं का मेला लगा है. जहां इटली से आकर लुक्रेशिया नाम की एक लड़की हिंदू धर्म अपनाती है. वहां पर डॉलर के लिए साधु-संतों को बदनाम किया जा रहा है.

दिल्ली वाले गजनवियों को भी पहचानो!

इसलिए कह रहे हैं कि ये प्रदीप साहू और चंदन जैसे लोग ‘आज के गजनवी’ हैं. जो धन के लिए आस्था पर प्रोपगेंडा से प्रहार कर रहे हैं. ऐसे एक-दो नहीं हैं, बल्कि कई छद्मभेषधारी गज़नवी हैं, जो भगवा आवरण ओढ़कर पाखंड के हथियार से सनातन पर प्रहार कर रहे हैं. यही कारण है कि साधु-संत आज के गजनवियों के आक्रमण से आहत हैं. 

जिन यूट्यूबरों ने संगम के तट पर सनातन को बदनाम करने की साजिश रची. डॉलर बनाने के लिए छल किया. उन्हीं के वैचारिक बंधुओं ने दिल्ली में मस्जिद के नाम पर फरेब किया था. प्रोपेगेंडा किया. झूठ बोलकर दंगा फैलाने की कोशिश की थी. प्रदीप और चंदन नाम के ‘गजनवी के वैचारिक वंशजों’ ने धन के लिए साधु-संतों को बदनाम किया. लेकिन सलमान, ऐनम रिजवी, खालिद और उमैर जैसे ‘आज के गजनवियों’ ने धार्मिक कट्टरता और राजनीतिक संदेश के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग किया.

इन्होंने मस्जिद के नाम पर अफवाह फैलाकर भीड़ इकट्ठी की. पत्थरबाजी हुई. पुलिस पर हमला हुआ. सोचिए गजनवी भी तो धन और धार्मिक कट्टरता के लिए ही ये सब करता था. उसने सीधा आक्रमण करके लूटा. ये सलमान, ऐनम रिजवी, खालिद और उमैर जैसे यूट्यूबर  झूठ बोलकर यूट्यूब से धन कमा रहे हैं और लोगों को भड़काकर धर्मांधता का विस्तार कर रहे हैं. इसलिए हम इन्हें आज के गजनवी कह रहे हैं. 

सीएम योगी की बात सुननी कितनी जरूरी?

कंटेंट क्रिएक्शन के नाम पर ये सनातन को सॉफ्ट टारगेट करते हैं. हम आपको कुछ पुरानी घटना याद दिलाना चाहेंगे, जब कुछ यूट्युबरों ने प्रोपगेंडा से सनातन पर प्रहार कर पैसा कमाया. 2023 में एक यूट्यूब चैनल ने एथीस्ट के नाम पर रामायण को “ब्राह्मणों द्वारा लिखा” बताकर इतिहास का सच ठहराने की कोशिश की. ये झूठ फैलाया कि रावण स्वर्ग चला गया. मार्च 2024 में एक यूट्यूबर ने विदेशी चैनल पर हिंदूइज्म को बुरा बताया, नौजवानों को मिसलीड किया. 2025 में एक यूट्यूबर ने धर्मस्थल टेम्पल पर AI-जनरेटेड फेक वीडियोज बनाकर लाखों लोगों को मिसलीड किया.

ये जो आज के गजनवी हैं ये एक इको-सिस्टम के पार्ट हैं. इनके लिए सनातन सॉफ्ट टारगेट है. इन्हें वो लोग खाद-पानी देते हैं, जो स्वयंभू उदारवादी बुद्धिजीवी कहलाते हैं. जो असल में बौद्धिक रूप से बेईमान होते हैं. जो लोग प्रदीप साहू और चंदन के बनाए फेक वीडियो पर हंसते हैं. वो सलमान, ऐनम रिजवी, खालिद और उमैर जैसे यूट्यूबर के फर्जी वीडियो पर उत्तेजित हो जाते हैं. वैचारिक रूप से छल करने वाले ऐसे ही लोगों पर योगी आदित्यनाथ ने वैचारिक प्रहार किया. उन्होंने क्या कहा, वो जानिए.

सीएम योगी ने कहा, बांग्लादेश पर मौन रहने वाले ऐसे ही लोगों को साधु-संतों के अपमान पर आनंद आता है. जो लोग किसी फर्जी बाबा को खड़ा करके संत समाज का अपमान करते हैं, क्या वो किसी दूसरे धर्म के लोगों के साथ ऐसा कर सकते हैं? नहीं कर सकते. करना भी नहीं चाहिए. लेकिन सनातन उनका सॉफ्ट टारगेट है. इसलिए वो वो ऐसा कर रहे हैं.

विक्षिप्त लेकिन मंदिर में नमाज पढ़ना नहीं भूला?

इसीलिए गजनवी के वैचारिक वंशजों की हिम्मत बढ़ती है. और उन्हीं के वैचारिक साथी राम मंदिर परिसर में जाकर नमाज पढ़ने की जुर्रत करते हैं. आज अयोध्या में पुलिस ने अहमद शेख नाम के संदिग्ध को पकड़ा . उसकी उम्र 50 साल है. श्रीनगर का रहने वाला है. वो राम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने की कोशिश कर रहा था. अहमद शेख के परिवारवाले कह रहे हैं कि वो मानसिक रूप से विक्षिप्त है. लेकिन ये कैसा विक्षिप्त है जो श्रीनगर से अयोध्या पहुंच गया और वो नमाज पढ़ना नहीं भूला. 

नमाज पढ़ने के लिए उसे राम मंदिर का परिसर ही दिखा? हो सकता है कि अहमद शेख किसी का प्रयोग हो. किसी का हो या ना हो लेकिन ये कट्टरता का प्रयोग तो हो ही सकता है. जिसने राम मंदिर के पवित्र परिसर में नमाज पढ़ने का अशुद्ध प्रयास किया. 

याद रखना चाहिए कि महमूद गजनवी ने भी सोमानथ मंदिर पर आक्रमण किया था. बार-बार सनातनी आस्था पर चोट की थी. हजार साल बाद फिर से ऐसी ही कोशिश हो रही है. गजनवी के वैचारिक वंशजों में से कोई मंदिर परिसर में तो कोई संगम के तट पर यही करने का प्रयास कर रहा है.