
Indian Army Rocket Force: भारतीय सेना रॉकेट फोर्स बनने जा रही है. रॉकेट फोर्स बनाने के ऐलान के साथ ही रॉकेट फोर्स का आधारभूत ढांचा भी देश के सामने रखा गया है. आइए जानते हैं रॉकेट फोर्स क्या होती है और किसी देश की थलसेना को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है. रॉकेट फोर्स सेना की उस इकाई को कहा जाता है जहां मिसाइल और लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्चर्स को एक साथ लाया जाता है. आप इसे कुछ इस तरह समझ सकते हैं कि एक रॉकेट फोर्स के जरिए. एक ही कमांड से दुश्मन पर जरूरत के मुताबिक अलग-अलग किस्म की मिसाइल और लंबी दूरी के रॉकेट दागे जा सकते हैं.
रॉकेट फोर्स जैसी इकाई होने से सेना को ये फायदा होता है कि उसे किसी लक्ष्य को बर्बाद करने के लिए दूसरी इकाई की मदद नहीं लेनी पड़ती. ऐसा करने से समय बचता है और हमले की सटीकता बढ़ती है. यानी युद्ध या किसी सीमित टकराव में दुश्मन को पस्त करने के फैसले और कदम. दोनों एक ही कमांड से उठाए जा सकते हैं.
चीन-रूस के पास ही रॉकेट फोर्स
फिलहाल दुनिया के बस दो देशों के पास रॉकेट फोर्स हैं. पहला रूस (Russia Army Rocket Force) और दूसरा चीन (PLA Rocket Force). अब भारत भी इसी लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने की तरफ कदम बढ़ा रहा है. आइए बताते हैं कि अपनी रॉकेट फोर्स की बुनियाद रखने के लिए भारत के आर्मी चीफ ने किन हथियारों को चुना है.
रॉकेट फोर्स के लिए जो पहला वेपन सिस्टम चुना गया है वो है भारत की सबसे भरोसेमंद ब्रह्मोस मिसाइल. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस को 100 प्रतिशत कामयाबी मिली थी. यानी ब्रह्मोस को जिस टारगेट पर दागा गया था वो ध्वस्त हुआ. ब्रह्मोस से पाकिस्तानी वायुसेना के 20 प्रतिशत संसाधन बर्बाद कर दिए गए थे.
दूसरा वेपन सिस्टम है प्रलय मिसाइल. ये मिसाइल 500 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है. 1 हजार किलोग्राम तक का विस्फोटक ले जाने वाली प्रलय मिसाइल अपनी उड़ान के अंतिम चरण में हाइपरसोनिक गति हासिल कर लेती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रलय का सक्सेस रेट भी 100 परसेंट रहा था.
तीसरा वेपन सिस्टम होगा भारत का पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम. आर्मीनिया जैसे देश इस रॉकेट सिस्टम को खरीद चुके हैं और फ्रांस जैसी शक्तियों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है. ये लिस्ट बताती है कि सेना ने रॉकेट फोर्स की नींव रखने के लिए घातक और भरोसेमंद हथियारों को चुना है.
भारत के पहले CDS ने देखा था सपना
भारतीय सेना के लिए अलग रॉकेट फोर्स का विचार सबसे पहले भारत के पहले CDS जनरल बिपिन रावत ने रखा था. जनरल रावत कहते थे कि भविष्य के युद्ध जीतने के लिए हमें ऐसे हथियार तैयार करने होंगे जिनके जरिए हम शत्रु की धरती पर जाए बिना उसे नुकसान पहुंचा पाएं. सेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी इसी सोच पर भारत अब रॉकेट फोर्स के साथ आगे बढ़ रहा है. भारतीय सेना का प्लान है कि इस वर्ष के अंत तक रॉकेट फोर्स का विचार हकीकत में तब्दील हो जाए. इसी वजह से प्रस्तावित रॉकेट फोर्स में नए वेपन सिस्टम को भी शामिल किया जाएगा. ऐसा ही एक हथियार है सूर्यास्त्र. भारत के मिशन सूर्यास्त्र को आपको भी ध्यान से देखना और समझना चाहिए.
भारतीय सेना के लिए एक ऐसा रॉकेट लॉन्चर तैयार किया जा रहा है जिससे अलग अलग कैलिबर यानी क्षमताओं के रॉकेट फायर किए जा सकेंगे. इस रॉकेट लॉन्चर को सूर्यास्त्र नाम दिया गया है. इजरायल के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे इस सिस्टम से निकलने वाले रॉकेट्स की रेंज 300 किलोमीटर होगी और इस सिस्टम से रॉकेट्स के साथ ही साथ 100 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन को हिट करने वाले ड्रोन भी दागे जा सकेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी दुनिया को भारत की मिसाइल पावर से परिचित करा दिया था. जिस दिन सेना की रॉकेट फोर्स तैयार हो जाएगी तो इन मिसाइलों की प्रहार क्षमता दोगुनी हो जाएगी.
#DNAमित्रों | भारत की रॉकेट फोर्स Vs PAK की रॉकेट फोर्स…सेना प्रमुख ने आज कैसे मुनीर की ‘मरम्मत’ की?#DNA #DNAWithRahulSinha #UpendraDwivedi #IndianArmy #Pakistan@RahulSinhaTV pic.twitter.com/eOQFeNflNG
— Zee News (@ZeeNews) January 13, 2026
अब से ठीक 5 महीने पहले पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बात कही थी, जिसपर पूरी दुनिया में चर्चा हुई थी. अमेरिका में पाकिस्तानी मूल के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि आज भारत मर्सीडीज जैसी चमचमाती गाड़ी बन चुका है और पाकिस्तान कूड़ा ढोने वाला ट्रक बन गया है. रॉकेट फोर्स के मुद्दे पर भी पाकिस्तान की हालत कुछ ऐसी ही है. पाकिस्तान की रॉकेट फोर्स का प्लान और दयनीय हालत समझने के लिए आपको कुछ तथ्य बेहद गौर से देखने चाहिए.
ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान ने रॉकेट फोर्स बनाने का ऐलान किया था लेकिन ये रॉकेट फोर्स आज तक तैयार नहीं हो पाई है. पाकिस्तानी फौज के इस प्लान में सबसे बड़ी अड़चन साबित हो रही है पैसा. फौज को रॉकेट फोर्स बनाने के लिए फंडिंग नहीं मिल पाई है. दूसरी तरफ इस रॉकेट फोर्स को तैयार करने के लिए पाकिस्तान ने जो संसाधन चुने थे उनमे से 81 प्रतिशत चीन के हैं. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने मेड इन चाइना हथियारों का हाल देख लिया है. ऐसे कमजोर हथियारों की वजह से भी पाकिस्तान ने रॉकेट फोर्स को लेकर कोई नई जानकारी सामने नहीं रखी है. तीसरी बड़ी दिक्कत है पाकिस्तान की अपनी मिसाइलें. पाकिस्तान के पास छोटी या मध्यम दूरी की कोई भी प्रभावशाली मिसाइल नहीं है. ये भी एक बड़ी वजह है पाकिस्तानी रॉकेट फोर्स का मिशन अब तक ठंडे बस्ते में ही पड़ा हुआ है.
पाकिस्तान की रॉकेट फोर्स कब बनेगी. बनेगी भी या नहीं बनेगी. ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब शायद शहबाज और मुनीर के पास भी नहीं है. मगर भारतीय सेना ने अपना प्लान और डेडलाइन दोनों बता दी है. ये खाका और तारीख ही पाकिस्तान के होश उड़ाने के लिए काफी हैं.
