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DNA Analysis: आज सुबह बारामती में एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया. 25 जून 2025 को अहमदाबाद में एयरइंडिया के प्लेन क्रैश के महज सात महीने बाद हुए इस विमान हादसे ने एक बार फिर कुछ बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि सबसे महंगी मानी जाने वाली यात्रा कितनी सुरक्षित है. सवाल उठ रहे हैं कि बारामती हादसे के पीछे की वजह क्या है. क्या हादसा पायलट की गलती से हुआ या एयरक्राफ्ट में गड़बड़ी हादसे की वजह बनी. 

ये सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि देश में रोज 5 लाख लोग हवाई सफर करते हैं. ये संख्या बढ़ रही है. जिस जगह पर अजित पवार का विमान क्रैश हुआ उसे विमानों का श्मशान क्यों कहा जाता है. इसका भी विश्लेषण करेंगे. विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद क्यों साजिश की आशंका जताई जा रही है. क्यों हादसे की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग हो रही है हम आपको बताएंगे. 

विमान हादसे में अजित पवार का निधन

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में निधन हो गया. आज सुबह 8 बजकर 44 मिनट पर बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. अजित पवार सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर मुंबई से बारामती में एक जनसभा करने के लिए रवाना हुए थे. बारामती एयरपोर्ट पर हादसा क्यों और कैसे हुआ हम आपको बताएंगे. लेकिन पहले एक छोटी सी जानकारी आपसे साथ शेयर करते हैं. हवाई यात्रा को दुनिया में सबसे सुरक्षित यात्रा माना जाता है.  8 लाख 80 हजार उड़ानों में एक हादसे की आशंका होती है. 1 करोड़ 67 लाख उड़ानों में एक घातक हवाई हादसा होने की आशंका होती है. समय की बचत और यात्रा में हादसे की आशंका बहुत कम. फिर भारत में पिछले 7 महीने में ही दूसरी बार घातक हवाई हादसा क्यों हुआ. इसपर हम विस्तार से चर्चा करेंगे. अजित पवार का विमान रनवे से पहले ही हादसे का शिकार हो गया. एयरस्ट्रीप के ठीक बराबर में ये हादसा हुआ है. आउट ऑफ कंट्रोल विमान रनवे से पहले ही हादसे का शिकार हो गया.  

 

कैसे हुआ बारामती हादसा?

शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, बारामती में आज सुबह कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम थी. पायलट्स ने बारामती एयरपोर्ट के रनवे-11 पर लैंडिंग की कोशिश की. कोहरे के कारण उन्हें रनवे नहीं दिखा, दोनों पायलटों ने प्लेन दोबारा ऊपर ले लिया. दूसरी बार विमान फिर रनवे की ओर आया. पायलट ने बताया कि अब रनवे दिख रहा है. इसके बाद विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई. करीब 8 बजकर 43 मिनट पर विमान का संपर्क टूट गया और विमान रनवे से पहले ही हादसे का शिकार हो गया. प्रसिद्ध लेखक अलेक्जेंडर चेज ने कहा है कि हवाई यात्रा अमरता के भ्रम और मृत्यु की वास्तविकता के बीच झूलने का रोमांचकारी अनुभव है. क्या ये रोमांचकारी अनुभव भारत में सुरक्षित भी है. आज एक बार फिर सवाल यही है.

हादसे से पहले का सीसीटीवी वीडियो आया सामने 

CCTV कैमरे में प्लेन क्रैश के बाद धमाके के साथ आग की लपटें और धुआं उठता दिख रहा है. जमीन पर गिरते ही प्लेन में धमाका हुआ. जहां ये हादसा हुआ यहां से थोड़ी ही दूर पर लोग भी मौजूद थे, लेकिन स्थिति ये थी की पलक झपकते ही सबकुछ आग की लपटों में समा गया. एविएशन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक हवाई हादसे में पैसेंजर्स के जीवित रहने की औसत दर 95 प्रतिशत है. यानी हादसा हुआ तो 100 में से 95 लोग जीवित बच सकते हैं. गंभीर दुर्घटनाओं में पैसेंजर्स के बचाने की संभावना 80 प्रतिशत होती है. यानी 100 में से 80 लोग जीवित बच सकते हैं. लेकिन बारामती में जो हादसा हुआ उसमें विमान में सवार सभी 5 लोगों की जान चली गई. विमान में अजित पवार के साथ कैप्टन सुमित कपूर, कैप्टन शाम्भवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली और अजित पवार के सिक्योरिटी अफसर विदीप जाधव भी सवार थे. हादसे में कोई भी नहीं बचा. 

सुरक्षित होने के बाद भी क्यों बढ़ रहे विमान हादसे?

सवाल ये है कि जब हवाई यात्रा को इतना सुरक्षित माना जाता है तो भारत में होनेवाले हादसे में जनहानि क्यों हो रही है. क्या सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ हो रहा है. क्या लापरवाही हो रही है. यहां दो बड़े सवाल हैं. पहला सवाल तो ये है कि क्या पायलट की गलती की वजह से हादसा हुआ.. इस सवाल का जवाब ब्लैक बॉक्स की जांच के बाद मिलेगा..हमें ये भी समझना होगा कि पायलट की भी मौत हुई है. और दूसरा सवाल ये है कि क्या इस प्लेन में ही कोई गड़बड़ी थी?

  • अजित पवार जिस प्लेन में सफर कर रहे थे वो बॉम्बार्डियर एयरोस्पेस का लीयरजेट – 45 था.

  • ये विमान दो पायलट्स के अलावा नौ पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स को ले जाने में सक्षम है.

  • ये प्लेन एक बार में 3700 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है

  • आसमान में 900 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है.

  • अधिकतम 51 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरता है.

  • लियरजेट 45 को आमतौर पर प्राइवेज जेट और एयर एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

लेकिन यहां आपको ये भी जानना चाहिए कि आसमान में लीयरजेट 45 का इतिहास काफी दागदार रहा है. 1998 से लेकर अब तक लीयरजेट-45 के 8 बड़े हादसे हुए हैं. जिनमें 29 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. एक तरह के प्लेन में 8 बड़े हादसे. कम नहीं होते. ये डराने वाले आंकड़े हैं और इसीलिए विमान के साथ साथ इसे ऑपरेट करने वाली कंपनी भी सवालों के घेरे में है. अजित पवार जिस जेट से सफर कर रहे थे, उसे दिल्ली की VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ऑपरेट करती है,  लेकिन एक चौंकाने वाला तथ्य ये है कि ढाई साल पहले यानी सितंबर 2023 में इसी कंपनी का लीयरजेट 45 विमान मुंबई एयरपोर्ट पर हादसे का शिकार हुआ था, भारी बारिश की वजह से विमान रनवे से फिसल गया था और विमान के दो टुकड़े हो गए थे. हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई थी. कंपनी वही विमान का मॉडल वही और अंजाम भी वही क्रैश.. ऐसे में सवाल तो उठना लाजमी है.. लेकिन जब VSR वेंचर्स के डायरेक्टर वीके सिंह से ये सवाल किए गए तो उन्होंने बिना जांच के ही खुद को क्लीन चिट दे दी.

क्या बारामती एयरपोर्ट विमानों का श्मशान है?

अजित पवार के विमान हादसे में एक बड़ा सवाल तो ये भी है कि क्या बारामती का एयरपोर्ट इस हादसे का कारण बना.ये सवाल इसीलिए उठ रहे हैं क्योंकि जहां अजित पवार का विमान गिरा है.. उसे विमानों का श्मशान कहा जाता है.. अब हम हादसे के इस डेथ जोन का विश्लेषण करने वाले अजित पवार का विमान बारामती एयरपोर्ट के रनवे से 600 मीटर की दूरी पर गिरा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब हादसा हुआ तो चश्मदीदों को लगा कि कोई ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है. क्योंकि यहां ट्रेनिंग विमान हादसा आम बात है. इसी वजह से ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या बारामती एयरपोर्ट विमानों का श्मशान है और अगर ऐसा है तो फिर हादसों को रोकने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है.

विमान हादसों का हॉटस्पॉट कैसे बना बारामती एयरपोर्ट

बारामती एयरपोर्ट या यूं कहें कि बारामती एयरस्ट्रिप महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक छोटा क्षेत्रीय एयरफील्ड है. यह मुख्य रूप से पायलट ट्रेनिंग और प्राइवेट या चार्टर फ्लाइट्स के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन बीते कुछ वक्त में ये विमान हादसों का हॉटस्पॉट यानी केंद्र बन गया है. इसे विमानों का श्मशान कहने के पीछे कुछ ठोस कारण हैं..

  • पहला कारण- अनियंत्रित एयरफील्ड: इसका मतलब ये है कि यहां बड़े एयरपोर्ट्स की तरह आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल या रडार व्यवस्था हर वक्त उपलब्ध नहीं है. यहां का एयर ट्रैफिक अकसर पायलट्स के आपसी समन्वय पर निर्भर करता है.

  • दूसरा कारण- ट्रेनिंग हब का दबाव: यहां रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी और कार्वर एविएशन जैसे फ्लाइंग स्कूल हैं.. आसमान में यहां आमतौर पर नौसिखिये पायलट्स रहते हैं.. जिसकी वजह से यहां का एयरस्पेस खतरनाक बन जाता है..

  • तीसरा कारण- खराब विजिब्लिटी और मौसम: बारामती के पठारी इलाकों में सर्दियों के मौसम में घना कोहरा रहता है.  जिसकी वजह से अचानक विजिब्लिटी कम हो जाती है.. आज के हादसे में खराब विजिब्लिटी को ही बड़ी वजह माना जाता है..

देश के कई एयरपोर्ट्स पर कम विजिब्लिटी में भी लैंडिंग हो जाती है. ऐसे में अजित पवार का विमान लैंड क्यों नहीं कर पाया.तो जबाव है कि VVIP मूवमेंट वाले इस एयरपोर्ट पर वो खास तकनीक मौजूद ही नहीं है. जिसकी मदद से कोहरे जैसी स्थिति में भी प्लेन को लैंड करवाया जाता है. बारामती एयरपोर्ट की लोकेशन और यहां संसाधनों की कमी की वजह से हादसे आम बात हैं. Aviation Safety Network और अन्य विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, यहां अभी तक 8 से 10 हवाई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं.

 

  • 9 अगस्त 2025 को  लैंडिंग के दौरान ट्रेनिंग विमान का आगे का चक्का अलग हो गया.
  • 22 अक्टूबर 2023 को बारामती के पास ट्रेनिंग विमान की इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी. विमान एयरफील्ड पर पलट गया.
  • 19 अक्टूबर 2023 को टेकऑफ के दौरान ट्रेनिंग विमान क्रैश हो गया.
  • 25 जुलाई 2022 को उड़ान के दौरान एक और ट्रेनिंग विमान क्रैश हो गया.
  • 7 जून 2022 को ट्रेनिंग विमान की हार्ड लैंडिंग करवानी पड़ी जिससे विमान का अगला हिस्सा टूट गया.
  • 5 फरवरी 2019 को बारामती के पास एक ट्रेनिंग विमान को सड़क पर क्रैश लैंड करवाना पड़ा.
  • 14 मार्च 2008 को एयरपोर्ट के दक्षिण में नीरा नदी में एक विमान क्रैश हो गया.

 
इतने विमानों के क्रैश होने के बाद भी नहीं खुली नींद

एक ही जगह पर बार बार विमानों का क्रैश होना संयोग नहीं हो सकता है.. ये एक फेलियर है.. अभी तक इतने ट्रेनिंग विमान क्रैश हो चुके हैं.. लेकिन किसी की नींद नहीं खुली और आज आखिरकार बड़ा हादसा हो गया. बारामती एयरपोर्ट में इतने ट्रेनिंग विमान क्रैश होते हैं कि इसे ट्रेनिंग क्रैश कैपिटल कहा जाता है. लेकिन देश में ये इकलौता खतरनाक एयरपोर्ट नहीं है.

अब आपको हम ऐसे एयरपोर्ट्स का नाम बताने जा रहे हैं जो खतरनाक एयरपोर्ट्स की श्रेणी में आते हैं.

 

  • इसमें पहला नाम है मैगलोर एयरपोर्ट ये टेबलटॉप रनवे की वजह से ये एयरपोर्ट काफी खतरनाक है. टेबलटॉप रनवे यानी रनवे खत्म होते ही गहरी खाई है. 2010 में एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 812 यहां दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, हादसे में 158 लोगों की जान चली गई थी.

  • इसी तरह कोझीकोड एयरपोर्ट भी टेबलटॉप रनवे की वजह से खतरनाक की श्रेणी में आता है. 2020 में एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 1344 हादसे का शिकार हो गई थी जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी.

  • इंफाल एयरपोर्ट को भी काफी खतरनाक माना जाता है. पहाड़ों के बीच स्थित इस एयरपोर्ट के आसपास मौसम अचानक बदलता है जिससे पायलट्स को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 1991 में यहां हादसे में 69 लोगों की जान चली गई थी.

  • 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बने लेह एयरपोर्ट को भी खतरनाक माना जाता है.. हालाकि यहां कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है.

इन आंकड़ों को भी जानिए 

एक धारणा है कि हवाई यात्रा सबसे सुरक्षित होती है.. इसमें हादसे की संभावना सबसे कम होती है.. इसके आंकड़े हमने आपको विश्लेषण की शुरुआत में भी बताएं.. लेकिन जब बात छोटे विमानों की हो तो ये धारणा क्यों गलत साबित हो जाती है.. आज हम एविएशन सेक्टर के इसी पहलू का विश्लेषण करने वाले हैं.. लेकिन सबसे पहले आपको कुछ हार्ड फैक्ट्स जानिए 

AAIB यानी  Aircraft Accident Investigation Bureau के अनुसार, जुलाई 2012 से नवंबर 2025 तक कुल 112 एक्सीडेंट और 128 सीरियस इंसिडेंट्स की जांच हुई. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में सालाना 10 से 15 छोटे विमान दुर्घटनाग्रस्त होते हैं.

ग्लोबल ट्रेंड्स भी यही कहते हैं कि जनरल एविएशन यानी प्राइवेट यूज में इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे विमानों में जानलेवा हादसों की दर कमर्शियल विमानों से 10 से 50 गुना ज्यादा होती है. लेकिन सवाल है कि ऐसा क्यों होता है..

छोटे विमान क्यों साबित हो रहे उड़ता ताबूत?

क्या छोटे विमानों में सफर कर रहे लोगों की जान. कमर्शियल फ्लाइट्स में सफर करने वाले लोगों से सस्ती है.. क्या छोटे विमानों के संचालन का स्तर भी कमर्शियल फ्लाइट्स जैसा नहीं होना चाहिए.. आखिर कहां दिक्कत आ रही है.. क्यों ऐसा हो रहा है. 

इसकी एक बड़ी वजह है पुराना बेड़ा और रखरखाव में लापरवाही. भारत में चार्टर्ड और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले कई विमान 20 से 30 साल पुराने होते हैं. अजित पवार जिस विमान में सवार थे वो भी 16 साल पुराना था. छोटे विमानों के उड़ते ताबूत बनने की एक वजह इनका जुगाड़ मेंटेनेंस भी है. कई छोटे ऑपरेटर पैसे बचाने के लिए ऑथराइज्ड सर्विस की जगह स्थानीय इंजीनियर्स से मेंटेनेंस करवाते हैं. जहां पुराने प्लेन्स से पुर्जे निकालकर दूसरे में लगा दिया जाता है. जो कई बार खतरनाक साबित होता है. छोटे विमानों के संचालन में कई बार खामियां भी पाई गई हैं, जिनमें से एक उदाहरण आपको देखना चाहिए.. जो बारामती एयरपोर्ट से ही जुड़ा है..

19 अक्टूबर 2023 और 21 अक्टूबर 2023  को रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के दो अलग अलग विमान बारामती एयरस्ट्रिप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गए. कंपनी ने दुर्घटना के बाद विमान के ब्लैक बॉक्स के साथ ही छेड़छाड़ कर दिया. कुछ रिपोर्ट्स तो ये भी बताती हैं कि प्राइवेट चार्टर विमानों का संचालन करने वाले ऑपरेटर्स का सुरक्षा ऑडिट समय पर नहीं होता है. जिसकी वजह से इनके लॉग बुक की जांच समय से नहीं हो पाती है और इसका असर क्या हो रहा है ये आंकड़े भी बता रहे हैं. आसमान की ऊंचाई नापना सबका सपना होता है, लेकिन जब सुरक्षा के मानकों को ताक पर रख दिया जाता है तो आसमान में उड़ते यही विमान ‘उड़ते ताबूत’ बन जाते हैं.