News in Brief

DNA Analysis: यूजीसी के नए नियम का विरोध कर रहे छात्रों ने पहली लड़ाई जीत ली है. सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की नई गाइडलाइंस पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि छात्रों को बांटनेवाले नियम देश में नहीं चलेंगे. यानी यूनिवर्सिटी परिसर में देश के युवाओं को छात्रों को जाति के खांचे में बांटनेवाले विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने कहा है कि न्याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है.

आज सुप्रीम कोर्ट ने इसी समानता के अधिकार की रक्षा करते हुए छात्रों में भेदभाव करनेवाले UGC की गाइडलाइंस पर रोक लगा दी. हम आपको विस्तार से बताएंगे की कोर्ट ने UGC की गाइडलाइंस पर क्यों रोक लगाई. हम चर्चा करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब आगे क्या होगा. UGC की गाइडलाइंस पर आज के राजनीतिक अपडेट का भी हम विश्लेषण करेंगे. लेकिन सबसे पहले बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की. 

तीन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की 

Add Zee News as a Preferred Source

सुप्रीम कोर्ट में आज UGC की नई गाइडलाइंस के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद UGC की नई गाइडलाइंस पर रोक लगाने का निर्णय लिया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी. UGC ने नए नियमों को 13 जनवरी को नोटिफाई किया गया था. इसका देशभर में विरोध हो रहा था. आरोप लगा कि UGC के ये नियम जातिवाद को बढ़ावा देनेवाले और छात्रों को बांटनेवाले हैं.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मायने

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से UGC की नई गाइडलाइंस के खिलाफ सड़क पर दिख रही आक्रोश की अभिव्यक्ति मद्धिम पड़ गई है. लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा वो समाजहित और देशहित की चिंता करनेवाले हर सजग भारतवासी को समझना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने आज जो भी टिप्पणी की वो सिस्टम की लापरवाह सोच को रेखांकित करती है. हम विस्तार से आपको बताते हैं कि कोर्ट ने UGC की नई गाइडलाइंस पर रोक लगाते हुए क्या-क्या कहा है. मित्रो ये मुद्दा समाजहित और देशहित से जुड़ा है इसलिए इसे बहुत ही गंभीरता और ध्यान से सुनिएगा और समझिएगा. आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UGC की नई गाइडलाइंस की भाषा स्पष्ट नहीं है. यानी ये साफ-साफ सीधी और सरल भाषा नहीं है. इस वजह से  इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है.

इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं?

कोर्ट ने पूछा कि जब UGC गाइडलाइन के 3E में भेदभाव की सभी कैटेगरी को शामिल किया गया है तब अलग से 3(1)(C) में जातिगत भेदभाव की बात क्यों कही गई है. कोर्ट ने कहा कि यह सोचना होगा कि क्या नए नियम हमें और पीछे ले जा रहे हैं. आजादी के 77 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं. अब क्या इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं? एक वकील ने कहा कि गाइडलाइंस में अलग-अलग हॉस्टल की बात है तो कोर्ट ने कहा कि भगवान के लिए ऐसा मत कहिए. हमारे देश में अंतर-जातीय शादियां भी होती हैं और हम खुद भी हॉस्टल में रहे हैं, जहां सभी लोग साथ-साथ रहते थे. कोर्ट ने कहा कि भारत की एकता और समावेशिता का भाव शिक्षण संस्थानों में दिखाई देना चाहिए. शिक्षण संस्था समाज से अलग-थलग नहीं हो सकते. अगर कैंपस के भीतर विभाजन वाला माहौल बनेगा तो उसका असर समाज के बाहर के व्यवहार पर भी पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये गंभीर मामला

सुप्रीम कोर्ट ने UGC की नई गाइडलाइंस पर सिर्फ रोक लगाने की वजह ही नहीं बताई. आज कोर्ट ने ये भी कहा कि ये बहुत गंभीर मामला है. अगर हम दखल नहीं देंगे तो ये नियम समाज के लिए विभाजनकारी हो सकते हैं. इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं. कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि वो एक एक्सपर्ट कमेटी बनाए जो नियमों को देखे ताकि इन्हें ज़्यादा संतुलित बनाया जा सके. इनकी भाषा को समावेशी बनाया जा सके.

‘UGC की नई गाइडलाइंस समानता के सिद्धांत के खिलाफ’

सुप्रीम कोर्ट ने UGC की नई गाइडलाइंस को समानता के सिद्धांत के खिलाफ, समाज को पीछे ले जानेवाला, समाज के लिए विभाजनकारी और खतरनाक बताया. फिलहाल इसपर रोक लगी है. इन नियमों को रद्द नहीं किया गया है. इसलिए विरोध करनेवाले कह रहे हैं ये आंशिक विजय है, लड़ाई अभी बाकी है. स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि सभी प्राणियों में समानता देखना मुक्त व्यक्ति की निशानी है, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सवाल यही है कि क्या ये नियम पूर्वाग्रह मुक्त मन से ड्राफ्ट किए गए हैं. ये सवाल बड़ा है. क्योंकि 13 जनवरी के बाद देश में विद्वेष का जो सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ वो चिंतित करनेवाला है. और ध्यान रखिए, नियम अभी रद्द नहीं किए गए हैं.

हमने DNA में UGC के नए नियम को लेकर चल रहे आंदोलन की जानकारी लगातार आपको दी. हमने DNA में 23 जनवरी को UGC के नए नियम का विश्लेषण किया था. 27 जनवरी के संस्करण में हमने, यूजीसी का नया नियम ड्राफ्ट करनेवालों की मंशा को लेकर कुछ सवाल खड़े किए थे. हमने सिस्टम से ये सवाल पूछा था कि आज छात्रों के लिए, शिक्षण संस्थाओं के लिए क्या जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी में भी उसी भावना और चिंता की अभिव्यक्ति हुई है. हमने सिस्टम को सचेत करते हुए कहा था UGC के नए नियम युवाओं को बांटनेवाले हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि UGC के नए नियम विभाजनकारी हैं. हमने नियम ड्राफ्ट करनेवाले अधिकारियों को सचेत किया था कि युवाओं को जाति के आधार पर बांटने से देश को नुकसान होगा.  आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बांटनेवाली गाइडलाइंस के खतरनाक परिणाम होंगे

‘UGC के नियम भारत की भावना के खिलाफ’

हमने 27 जनवरी को DNA में सिस्टम की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर काम करना चाहिए. छात्रों को बांटनेवाली गाइडलाइंस पर नहीं. और आज सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि ये नियम पीछे ले जानेवाले हैं. यानी शिक्षा में सुधार करनेवाले नहीं हैं. हमने DNA के विशेष एडिशन में यूजीसी के कर्ताधर्ताओं को सतर्क करते हुए बताया था कि ये नियम एकजुट भारत की भावना के खिलाफ हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि इन नियमों से भारत की एकता और समावेशिता की भावना को नुकसान पहुंचेगा. हमने ये तर्क ये सवाल अपनी तरफ से नहीं गढ़े थे. हमने भारत प्रथम की भावना रखनेवाले हर भारतीय की संवेदनाओं को मंच दिया था. आज जब सुप्रीम कोर्ट ने UGC की नई गाइडलाइंस को विभाजनकारी और खतरनाक बताया है तो वो सभी लोग खुशी जता रहे हैं जिन्होंने इन नियमों का पहले दिन से विरोध किया था. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद UGC पर सवाल वो लोग भी उठा रहे हैं जिन्होंने समाज की समानता के लिए राजनीतिक लड़ाई लड़ी है. बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पोस्ट कर कहा कि यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का फैसला उचित है. इन्हें लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था. यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने कहा है कि प्रत्येक को उसके योग्य देना न्याय है. न्याय समानता और असमानता दोनों को ध्यान में रखता है. UGC की नई गाइडलाइंस के खिलाफ सबसे बड़ी शिकायत यही है कि ये समानता के अधिकार के खिलाफ है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगाई है..लेकिन हर विवाद के कई पक्ष होते हैं. 

UGC के नए नियम पर आगे क्या होगा? 

जैसे इन नियमों को लेकर समाज दो हिस्सो में बंट गया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी छात्र दो हिस्सों में बंट गए हैं. ये UGC की बंटवारे वाली नीतियों का असर है. छात्रों का एक वर्ग सुप्रीम कोर्ट के रोक वाले फैसले से असंतुष्ट है. इनका तर्क है कि भेदभाव सच्चाई है. इसलिए ऐसे नियम की जरूरत थी. जश्न और विरोध के बीच सवाल ये भी है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद UGC के नए नियम को लेकर आगे क्या होगा. समझिए सुप्रीम कोर्ट ने अभी सिर्फ रोक लगाई है. इन नियमों को रद्द नहीं किया है. इसलिए ये सवाल बड़ा है कि आगे क्या होगा. मित्रों अब ध्यान से सुनिएगा और समझिएगा. क्योंकि ये मुद्दा सिर्फ कानून का नहीं राजनीतिक भी हो गया है. 

19 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई 

केंद्र सरकार और यूजीसी को कोर्ट में 19 मार्च तक अपना जवाब दाखिल करना है. ऐसे में पहला विकल्प ये है कि सरकार चाहे तो अपने जवाब में इन नियमों को सही बता सकती है. दूसरा विकल्प ये है कि सरकार कोर्ट की आपत्तियों को देखते हुए नियमों में बदलाव कर सकती है. तीसरा विकल्प ये है कि सरकार कोर्ट की सलाह के मुताबिक एक्सपर्ट कमेटी बना सकती है. ये कमेटी कोर्ट के निर्देश को देखते हुए नियमों को नए सिरे से ड्राफ्ट कर सकती है. कोर्ट में जो कुछ भी होगा वो 19 मार्च को होगा. लेकिन उससे पहले UGC चाहे तो इन नियमों को वापस भी ले सकता है. जो संगठन UGC के नए नियम का समर्थन कर रहे हैं वो भी कोर्ट जा सकते हैं. ये कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है.