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Budget 2026 Funds for Neighboring Countries: यह नया भारत है, जो पड़ोस में शांति-सद्भाव चाहता है लेकिन अगर कोई पड़ोसी दुष्टता पर उतर आए तो उस पर हंटर चलाने से भी अब परहेज नहीं करता. रविवार को संसद में पेश हुए बजट में यह बात दुनिया ने एक बार फिर महसूस की. जब भारत के साथ दोस्ती रखने वाले देशों के विकास के लिए खुलकर फंड आवंटित किया गया. वहीं हिंदुओं का निर्मम संहार कर रहे बांग्लादेश का फंड आधा घटाकर उसे करारी आर्थिक चोट दी गई. 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश किया. इसमें देश के आम लोगों के साथ ही पड़ोसी मुल्कों के लिए भी फंड का इंतजाम किया गया था. नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत भारत हर साल पड़ोसी देशों के लिए धनराशि का आवंटन करता है. इस बार भी भारत ने बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए मित्र देशों के लिए जमकर प्यार लुटाया.

भूटान पर सबसे ज्यादा बरसा प्यार

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बजट में सबसे ज्यादा आवंटन भूटान के लिए किया गया है. उसे 2,288.55 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इस धनराशि से भूटान में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम किया जाएगा. वहीं भारत के साथ रोटी-बेटी का अनोखा रिश्ता रखने वाले नेपाल के लिए मदद बढ़ाते हुए 800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. उसे पिछले साल 700 करोड़ रुपये का फंड मिला था, जिसमें इस साल 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है.

भूटान के बाद सबसे भरोसेमंद मुल्क मॉरीशस के लिए भारत ने अपनी मदद बढ़ाई है. उसे 550 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. यह पिछले साल जारी फंड 500 करोड़ रुपये से 50 करोड़ रुपये ज्यादा है. सेशल्स को पिछले साल की तरह इस बार भी 19 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है. 

चीन के इस पड़ोसी मुल्क को बड़ी मदद

वहीं चीन और रूस के बीच में बसे मंगोलिया पर भी भारत का प्यार बरसा है. उसे जारी फंड में एकदम से 5 गुणा बढ़ोतरी की गई है. मंगोलिया को पिछले साल 5 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन इस बार उसका अनुदान बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है. 

श्रीलंका के लिए जारी फंड में भी बढ़ोतरी की गई है. उसे पिछले साल आर्थिक विकाकस के लिए 300 करोड़ रुपये मिले थे. लेकिन इस बार यह मदद बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दी गई है. 

अफगानिस्तान के लिए जारी किए 150 करोड़ रुपये

इस्लामिक मुल्क अफगानिस्तान के लिए भी भारत ने मदद बढ़ाई है. उसे पिछले साल 100 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन इस साल 150 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. इस धनराशि से अफगानिस्तान में पुर्निर्माण और मानवीय मदद के कार्य किए जाएंगे. 

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लोकतंत्र को दबाकर सैन्य तानाशाही लागू करने वाले म्यांमार के लिए भारत ने अपनी मदद इस बार घटा दी है. उसे इस बार विकास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. जबकि पिछले साल उसे 350 करोड़ रुपये मिले थे. मालदीव के लिए मदद में थोड़ी कमी की गई है. उसे पिछले वर्ष 600 करोड़ रुपये का अनुदान मिला था. जबकि इस बार 550 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. 

बिना गोली चलाए बांग्लादेश का कर दिया इलाज

सबसे बड़ी चपत बांग्लादेश को लगी है. जिसके लिए जारी फंड इस साल घटाकर आधा कर दिया गया है. उसे पिछले साल 120 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया था. जिसे इस बार घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसकी वजह ये भी है कि बांग्लादेश ने पिछली बार जारी 120 करोड़ रुपये के फंड में से महज 34 करोड़ ही इस्तेमाल किए थे. जिसके चलते भारत ने उसकी नीयत भांपते हुए इस बार मदद घटा दी. 

कुल मिलाकर भारत का यह बजट दोस्ती का भाव रखने वाले मित्र देशों की तरक्की बढ़ाने और दुश्मनी चाहने वाले मुल्कों के लिए सबक सिखाने वाला है. भारत ने दिखा दिया है कि वह अपने आसपड़ोस समेत दुनिया में शांति तो चाहता है. लेकिन उसकी इस चाहत को कमजोर समझने की भूल कोई भी देश न करे वरना वह सबक सिखाना भी जानता है.