Dera Sachkhand: 1 फरवरी को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 पेश किया. बजट पेश होने के बाद पीएम मोदी पंजाब के दौरे पर पहुंचे. चूंकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है. आज यानी एक फरवरी को संत रविदास जयंती भी है. इस अवसर पर पीएम मोदी ने डेरा सच खंड बल्लान हेडक्वार्टर में प्रार्थना की. आज के अपने इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि डेरा सचखंड बल्लां क्यों खास है, पीएम मोदी की ये जालंधर यात्रा इतनी अहम क्यों है और राजनीतिक रूप से इसका क्या प्रभाव है. इतना ही नहीं ये दौरा पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को कितनी मदद कर सकता है…
पीएम मोदी का जालंधर दौरा सुर्खियों में…
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर के दौरे पर रहे. यहां पर उन्होंने डेरा सच खंड के प्रमुख संत निरंजन दास के साथ, संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के मौके पर जालंधर में डेरा सच खंड बल्लान हेडक्वार्टर में प्रार्थना की. बताया जाता है कि पंजाब के डेरा सचखंड बल्लां, डेरा ब्यास और दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान जैसे धार्मिक स्थल पंजाब की राजनीति में अहम योगदान निभाते हैं. माना जाता है कि इस संस्थानों के अनुयायियों की संख्या काफी ज्यादा है और यही कारण है कि वे किसी राजनीतिक पार्टी की जीत हार में अहम भूमिका निभाते हैं. यही कारण है कि छोटे से लेकर बड़ा नेता यहां इन धार्मिक स्थलों पर नतमस्तक होने से नहीं चूकता है.
पहले इस डेरा के बारे में जानिए
इंटरनेट पर मिली जानकारी के मुताबिक, डेरा सचखंड बल्लां रविदासिया पंथ का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है. इसकी स्थापना 20वीं सदी की शुरुआत में संत पीपल दास महाराज ने की थी. बताया जा रहा है कि यह डेरा मुख्य रूप से गुरू रविदास जी के अनुयायियों के एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. यह केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य और समानता के लिए काम करता है. बताया जाता है कि संत सरवन दास जी द्वारा इसको और विस्तार गिया गया और साल 2010 में इसने रविदासिया धर्म के रूप में अपनी पहचान स्थापित की. जानकारी के अनुसार, 1900 के दशक की शुरुआत में संत पीपल दास जी, जिनका पहले नाम हरनाम दास था, वह बठिंडा के गिल पट्टी गांव से आकर जालंधर के बल्लां गांव में बस गए. यहां पर एक सूखे पीपल के पेड़ को पुनर्जीवित कर डेरे की नीव रखी थी. वर्तमान में संत निरंजन दास इस डेरे के प्रमुख हैं और उनके नेतृत्व में डेरा आगे बढ़ रहा और तमाम परोपकारी काम कर रहा है.
डेरा सचखंड बल्लां प्रमुख निरंजन दास के बारे में भी जानिए
जानकार मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा से बीजेपी एक साथ कई मिशन साधने में जुटी है. माना जा रहा है कि पीएम मोदी की इस यात्रा से बीजेपी ने पंजाब के दोआबा क्षेत्र नें अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में अहम दांव चला है. यही कारण है कि इससे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की नींद उड़ी हुई है. बीजेपी ने पंजाब के सबसे बड़े दलित वोट बैंक को साधना शुरू कर दिया है. इसी साल केंद्र सरकार ने डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया. इसके बाज आज पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की है.
देश ही नहीं दुनिया में भी प्रभाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जालंधर में स्थित डेरा सचखंड बल्लां के अनुयायियों की संख्या केवल देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी अच्छी-खासी है. माना जाता है कि इस डेरे का प्रभाव केवल पंजाब तक सीमित नहीं है. चूंकि वाराणसी को संत रविदास जी की जन्मस्थली माना जाता है और यही कारण है कि काशी में भी इनके अनुयायियों की धार्मिक और राजनीतिक पैठ अच्छी है.
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डेरा सचखंड का राजनीतिक प्रभाव कितना?
उल्लेखनीय है कि आने वाले समय में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. यही कारण है बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल दलित वोटर्स को लुभाने के लिए प्रयास में लगी हैं. चूंकि पंजाब का ये दोआबा क्षेत्र राजनीतिक रूप से सभी दलों के लिए काफी अहम है. साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में इस इस क्षेत्र ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी. दोआबा क्षेत्र में स्थित यह डेरा रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र है. आपको जानना चाहिए कि पंजाब में दलित आबादी 32 प्रतिशत है. पूरे पंजाब के कुल दलित आबादी का 45 प्रतिशत हिस्सा इसी दोआबा क्षेत्र में रहता है. वहीं, इस दोआबा क्षेत्र से विधानसभा की कुल 117 में से 23 सीटें आती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स पर नजर डालें, तो पता चलता है कि डेरा बल्लां का प्रभाव इनमें से कम से कम 19 सीटों पर सीधा पड़ता है.
धर्म, राजनीति और समाज का संगम
गौरतलब है कि जानकार मानते हैं कि डेरा सचखंड बल्लां केवल एक धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि दलिच सामाजिक सशक्तिकरण, पहचान और राजनीतिक प्रभाव का अब केंद्र बन चुका है. यही कारण है कि तमाम राजनातिक दलों इस डेरे पर विशेष फोकस होता है. पीएम मोदी की आज की ये यात्रा इसी का प्रमाण है कि राजनीति में डेरा बल्लां की भूमिका काफी अहम रहने वाली है.
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