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Devendra Fadnavis on NCP Merger: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पार के अचानक निधन के बाद राज्य की सियासत एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गई. एनसीपी शरद पवार गुट ने दावा किया बहुत जल्द दोनों एनसीपी एक होने वाली थीं, इसको लेकर अजित पवार कई बैठकें कर चुके थे और मर्जर के ऐलान की तारीख भी तय हो चुकी थी. हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन सब दावों को खारिज करते हुए कहा कि अगर दोनों पार्टियों के विलय पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंची होती तो अजीत दादा हमें इस बारे में जरूर सूचित करते. इस दौरान सुनेत्रा पवार के जल्दबादी में किए गए शपथ समारोह से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने 1984 की एक घटना का जिक्र कर दिया.  

अजित दादा हमें जरूर बताते

मुख्यमंत्री का यह बयान एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार के उस दावे के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के घोषणा के लिए 12 फरवरी की तारीख तय कर ली गई है. देवेंद्र फडणवीस ने कहा,’अगर विलय पर बातचीत अंतिम चरण तक पहुंच गई होती, तो अजीत दादा हमें जरूर बताते … वे हमारी सरकार में हैं और बिना हमसे जानकारी लिए क्या फैसला लेते? मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उनके और शरद पवार के बीच क्या बातचीत हुई. जहां तक ​​हमारी बात है, हमें विलय के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’

कुछ लोग भ्रम पैदा करना पसंद करते हैं

मीडिया से बात करते हुए फडणवीस ने कहा,’अगर अजीत पवार विलय पर चर्चा कर रहे थे, तो क्या उन्होंने भाजपा को विश्वास में लिए बिना ऐसा किया होता? दूसरा, मान लीजिए कि वे ऐसी चर्चा कर रहे थे, तो क्या वे सरकार में स्थिर स्थिति में रहते हुए एनडीए से बाहर निकलने के लिए ऐसा कर रहे थे? कुछ लोग भ्रम पैदा करना पसंद करते हैं और फिर भ्रम को बढ़ाने के लिए अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं.’ फडणवीस ने कहा,’सभी जानते हैं कि अजीत दादा और मेरे बीच ऐसा रिश्ता था कि वे मुझसे सब कुछ साझा करते थे. यहां तक ​​कि उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से एक दिन पहले भी हम दोनों एक घंटे तक साथ बैठकर गपशप करते रहे.

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इंदिरा गांधी का क्यों दिया हवाला?

अजित पवार के देहांत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को जल्दबाजी में डिप्टी सीएम बनाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए फडणवीस ने कहा,’जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, तब कांग्रेस ने उनके अंतिम संस्कार से पहले ही राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित करने का निर्णय लिया था.’