काफी समय से तनाव और हिंसा झेल रहे मणिपुर में अब शांति की उम्मीद जगी है. विधायक दल की बैठक में भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह को नेता चुना गया यानी वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे. मणिपुर में 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला है. इधर, नई सरकार के गठन का फैसला दिल्ली में हो गया है. जातीय हिंसा के बाद सीएम एन. बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था. ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या बहुसंख्यक मैतेई समुदाय से आने वाले पूर्व स्पीकर और ताइक्वांडो प्लेयर खेमचंद सिंह के नाम पर कूकी समुदाय साथ आएगा?
वैसे, मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि दोनों समूहों को साधने के लिए कूकी-जो समुदाय के विधायक नेमचा किपजेन को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो डिप्टी सीएम बनने वाली वह समुदाय की पहली महिला होंगी. इसके अलावा नगा पीपुल्स फ्रंट से एक और डिप्टी सीएम बन सकता है.
सबसे बड़ी वजह
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है. अभी यह निलंबित रखी गई थी. अब हर कोई जानना चाहता है कि सिंगजामेई से विधायक और राज्य विधानसभा के पूर्व स्पीकर को सीएम चुनने की सबसे बड़ी वजह क्या है? पहली नजर में इसका कनेक्शन मैतेई और कूकी दोनों समुदायों को साधने से है. हां, मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद को कुकी-जो विधायकों के भी करीब रहे हैं. ऐसे में उन्हें आम सहमति वाला नाम या कहें कि ‘स्वीकार्य पसंद’ बताया जा रहा है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी उनके नाम पर राजी है. वाई. खेमचंद सिंह का नाम पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने ही आगे बढ़ाया. वह सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिलने वाले हैं.
Honoured to be part of the special Vijaya Dashami Utsav, commemorating the Satabdi Varsh of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), celebrated at CRYDA Community Hall, Singjamei Chingamakhong.
Warm wishes to all on the auspicious occasion of Vijaya Dashami.#RSS100Years pic.twitter.com/XJyjT29wlP— Khemchand Yumnam (@YKhemchandSingh) October 5, 2025
खेमचंद का वो अंदाज, जो भाजपा को पसंद आया
हां, 8 दिसंबर को अपनी तरह की पहली कोशिश में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद ने उखरुल और कामजोंग के दो नगा-बहुल जिलों में दो कूकी-जो गांवों का दौरा किया था. उन्होंने पास के एक रिलीफ कैंप में रहने वाले कूकी-जो लोगों से मुलाकात की, जो मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान इंफाल घाटी में अपने घरों से विस्थापित हो गए. आदिवासी कूकी-जो और मैतेई लोगों के बीच हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी और इसमें 250 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. तब से 60,000 से ज्यादा लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं. उनका यह अंदाज सभी को पसंद आया. इससे उनकी छवि सर्वसमाज को साथ लेकर चलने वाले नेता की बनी.
For a peaceful & progressive Manipur, it is imperative that we uphold unity & coexist in an atmosphere of peace and harmony.Let us collectively eschew all forms of violence & work towards mutual understanding,respect,& lasting development for our State.@narendramodi @AmitShah pic.twitter.com/InT2QQtpGy
— Khemchand Yumnam (@YKhemchandSingh) December 8, 2025
राज्य में 37 बीजेपी विधायक हैं, जिनमें सात कुकी-जो विधायक शामिल हैं. मंगलवार की बैठक में पांच कुकी-जो विधायकों ने हिस्सा लिया था. कुल मिलाकर विधानसभा में 10 कुकी-जो विधायक हैं. विधानसभा में छह विधायक नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) से और पांच नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं.
बीजेपी के ही कूकी-जो विधायक सहमत नहीं
हां, मंगलवार (3 फरवरी) की बैठक में पांच कूकी-जो विधायकों ने हिस्सा लिया, लेकिन वे सभी सहमत नहीं थे. कूकी-जो समुदाय से आने वाले चुराचांदपुर के एक बीजेपी विधायक पाओलिनलाल हाओकिप ने कहा है कि उन्होंने पार्टी नेताओं से अलग से मुलाकात की और उन्हें बताया कि जब तक समुदाय के लिए राजनीतिक समाधान का आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. कूकी-जो नागरिक समूह और विद्रोही समूह कूकी-जो क्षेत्रों के लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश और विधानसभा की मांग कर रहे हैं.
