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Parliament Budget Session: केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को संसद में बजट सत्र के दौरान बोलते हुए कहा कि ईरान में आर्थिक मंदी को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत सरकार वहां की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है. विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान में भारतीय दूतावास वहां मौजूद छात्रों समेत भारतीय नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और जरूरत के मुताबिक सहायता और एडवाइजरी जारी कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी स्पेशल इवैकुएशन की कोई प्लानिंग नहीं है, क्योंकि ईरान का एयर स्पेस खुला है और कमर्शियल फ्लाइट्स जारी हैं. 

भारतीय नागरिकों के संपर्क में है दूतावास 

जयशंकर ने सदन में कहा कि सरकार ईरान में फंसे भारतीयों को फिलहाल फंसा हुआ नहीं मानती है, क्योंकि ईरान-भारत और अन्य क्षेत्रीय देशों के बीच एयर कनेक्शन जारी है. उन्हें कहा,’  ईरान का एयर स्पेस खुला है और नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं. इसलिए इस स्तर पर किसी स्पेशल इवैकुएशन एक्सरसाइज की कोई जरूरत नहीं है.’ उन्होंने बताया कि अधिकारियों की ओर से स्थिति का आंकलन किया जा रहा है. विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय दूतावास भारतीय नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में और लोगों को मदद पहुंचा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया की अधिकारियों ने ईरान छोड़ने के इच्छुक भारतीयों को उपलब्ध कमर्शिल फ्लाइट्स का ऑप्शन चुनने की सलाह दी है.   

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स्थिति पर नजर रख रहा भारत 

जयशंकर ने संसद को बताया कि मौजूदा समय में लगभग 9,000010,000 भारतीय नागरिक ईरान के 16 प्रांतों में रह रहे हैं.  इस समुदाय में छात्र और उनके परिवार, वर्कर्स, तीर्थयात्री, टूरिस्ट, व्यापारी और सेलर शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि डिप्लोमैटिक चैनल्स के जरिए इन समूहों तक सटीक जानकारी पहुंचे. इसके साथ ही तेहरान में प्रदर्शनों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखी जा रही है. एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सतर्क और स्थिति-आधारित दृष्टिकोण (Situation Based Approach) अपना रहा है और अगर परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो इमरजेंसी प्लानिंग की तैयारी की गई है.   

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नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा भारत 

जयशंकर ने यह भी बताया कि उन्होंने हाल ही में ईरान और पड़ोसी इलाकों में पैदा हो रही स्थिति पर चर्चा करने के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात की. उन्होंने कहा कि भारत डिप्लोमैसी के तहत कई स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संपर्क में है. उन्होंने कहा कि सरकार का रुख यह है कि डिप्लोमैटिक कॉर्डिनेशन के जरिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए. बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर का यह बयान आर्थिक दबावों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बढ़ने और कई देशों की ओर से ट्रेवल एडवाइजरी जारी करने के बीच आया है. फिलहाल भारत ने अभी तक किसी भी इमरजेंसी इवैकुएशन की घोषणा नहीं की है और इस बात पर जोर दिया है कि सामान्य हवाई सेवाएं जारी हैं और दूतावास के सभी संपर्क पूरी तरह से सक्रिय हैं.