India-China Relations: भारत और अमेरिका के संबंध और ज्यादा मधुर हो रहे हैं, भारत-अमेरिका की ट्रेड डील पर दुनियाभर की निगाहें टिकी है. इसी बीच भारत के पूर्व सीनियर डिप्लोमैट विद्या भूषण सोनी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के विदेश मामलों के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर मा झाओक्सू के बीच कल हुई मीटिंग अहम थी, क्योंकि देश आने वाले सेशन की अध्यक्षता करने की तैयारी कर रहा है. साथ ही कहा कि चीन को एहसास हो गया है कि भारत की लीडरशिप के बिना BRICS कहीं नहीं पहुंच सकता.
इसके अलावा कहा कि यह मीटिंग ऐसे समय में अहम थी जब कुछ इंटरेस्टेड पार्टियां BRICS की अहमियत को कम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने मल्टीलेटरल डिप्लोमेसी के लिए भारत के कमिटमेंट पर जोर दिया और कहा कि BRICS एक अहम प्लेटफॉर्म बना हुआ है, खासकर भारत के लिए जो इसके फाउंडिंग मेंबर्स में से एक हैं. BRICS फ्रेमवर्क में चीन की भूमिका का जिक्र करते हुए, पूर्व डिप्लोमैट ने कहा कि चीन ने भारत की एक्टिव भागीदारी और लीडरशिप की अहमियत को पहचान लिया है, उन्होंने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि वे इस तरह का अप्रोच लेकर आए हैं, मुझे लगता है कि यह एक समझदारी भरा अप्रोच है.
साथ ही साथ कहा कि कृपया ध्यान रखें कि भारत BRICS सेशन की अध्यक्षता करेगा, इसलिए हम अलग-अलग सेक्टर में बातचीत को आगे बढ़ाएंगे, पिछले BRICS समिट के बाद से इंटरनेशनल लेवल पर बहुत बड़े बदलाव हुए हैं. कुछ इंटरेस्टेड पार्टियां BRICS की अहमियत कम करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन भारत मल्टीलेटरल डिप्लोमेसी के लिए कमिटेड है. हमारे लिए BRICS इसलिए जरूरी है क्योंकि हम इसके फाउंडिंग मेंबर्स में से एक हैं. मुझे लगता है कि चीन को एहसास हो गया है कि भारत की एक्टिव भागीदारी और लीडरशिप रोल के बिना BRICS असल में कहीं नहीं पहुंच सकता.
ऐसे में उन्होंने आने की पहल की और हमारी चेयरमैनशिप शुरू होने से पहले, हम कई बातों पर सहमत हुए ताकि विचारों में कोई फर्क न हो और एक जैसी बातें हों ताकि हम आगे बढ़ सकें.बीते दिन चीन के विदेश मामलों के एग्जीक्यूटिव वाइस मिनिस्टर मा झाओक्सू ने नई दिल्ली में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ चीन-भारत स्ट्रेटेजिक बातचीत का एक नया दौर किया. दोनों पक्षों ने इंटरनेशनल और रीजनल हालात, अपनी-अपनी अंदरूनी और बाहरी पॉलिसी, साझा हितों के इंटरनेशनल और रीजनल मुद्दों और चीन-भारत संबंधों पर दोस्ताना, साफ और गहराई से बातचीत की.
दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि इंटरनेशनल हालात में मुश्किल और बड़े बदलावों को देखते हुए, चीन और भारत को प्रेसिडेंट शी जिनपिंग और प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी के बीच बनी जरूरी आम समझ को ईमानदारी से लागू करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए. चीन-भारत संबंधों को स्ट्रेटेजिक और लंबे समय के नज़रिए से देखना और संभालना चाहिए, और इस स्ट्रेटेजिक सोच को बनाए रखना चाहिए कि चीन और भारत दुश्मन के बजाय कोऑपरेटिव पार्टनर हैं, और दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास का मौका हैं. चीन और भारत को आपसी भरोसा गहरा करना चाहिए और सहयोग बढ़ाना चाहिए, मतभेदों को ठीक से सुलझाना चाहिए, और चीन-भारत संबंधों को एक मज़बूत और स्थिर रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहिए.
दोनों पक्ष 2026 और 2027 के लिए BRICS चेयर के तौर पर एक-दूसरे के काम में मदद करने पर सहमत हुए. दोनों पक्ष मल्टीलेटरलिज्म और यूनाइटेड नेशंस की मुख्य भूमिका का समर्थन करने, ग्लोबल साउथ के बीच एकता और सहयोग को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय की रक्षा करने, एक मल्टीपोलर दुनिया के लिए मिलकर काम करने और एशिया और पूरी दुनिया में शांति और विकास में योगदान देने पर भी सहमत हुए. (ANI)
