राजनीतिक दलों के लिए ‘पैसा लो, वोट दो’ अब ‘वैध मॉडल’ बन गया है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि राज्य दर राज्य फ्री बीज़ और चुनावी लॉलीपॉप के वायदे सत्ता में वापसी की गारंटी बनते जा रहे हैं. ऐसे में बात अब आधुनिक पॉलिटिकल बार्टर सिस्टम की जो देशभर में जमकर यूज किया जा रहा है. बीते शुक्रवार की सुबह तमिलनाडु की महिलाएं जब नींद से जागीं तो उनका स्वागत बैंक के मैसेज ने किया. इस मैसेज में बैंक ने उनका दिन बना दिया. जिसमें उन्हें पता चला कि उनके खाते में 5 हजार रुपए आ गए हैं. आइए अब आपको विस्तार से बताते हैं कि आखिर हुआ क्या.
कलैगनार महिला अधिकार योजना
तमिलनाडु सरकार ने प्रदेश की 1 करोड़ 31 लाख महिलाओं के अकाउंट में 5-5 हजार रुपए ट्रांसफर किए. कलैगनार महिला अधिकार योजना के तहत तमिलनाडु सरकार हर महीने महिलाओं को 1-1 हजार रुपए देती है. आज जो पांच हजार रुपए दिए गए वो फरवरी-मार्च-अप्रैल का एडवांस है. 2 हजार रुपए स्पेशल समर पैकेज के रूप में दिए गए. यानी तमिलनाडु की महिलाओं को डीएमके सरकार ने जून तक के लिए पैसा एडवांस में दे दिया है. इसमें कोई बुराई नहीं है. फिर इसे पॉलिटिकल बार्टर सिस्टम क्यों कहा जा रहा है. समझिए. तमिलनाडु में 10 मई को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है. यानी विधानसभा चुनाव अप्रैल में होंगे. स्टालिन सरकार ने चुनाव से करीब ढाई महीने पहले महिलाओं को धन दिया है.
महिलाओं को पैसा देने से वोट मिलने की उम्मीद
अब इसके बदले सीएम स्टालिन को क्या चाहिए. जवाब मुश्किल नहीं है. वोट चाहिए. हुआ ना ये पॉलिटिकल बार्टर सिस्टम. हम आपको पैसा दे रहे हैं आप हमें वोट दिजिए. और सुनिए. सिर्फ एडवांस पैसा नहीं दिया गया है. वादा भी किया गया है कि अगर हमारी सरकार बनी तो हर महीने जो एक हजार रुपए दिए जाते हैं उसे बढ़ाकर दो हजार कर देंगे. समझ रहे हैं. वोट का पक्का बंदोबस्त करना इसी को कहते हैं, देश के कई राज्यों ने इस मॉडल ने सत्ताधारी पार्टी का किला ढहने से बचाया है.
स्टालिन सरकार ने शुक्रवार सुबह 65 हजार 500 करोड़ रुपए महिलाओं के खाते मे ट्रांसफर किए. अब महिलाओं पर फोकस क्यों है उसे भी समझिए. तमिलनाडु में 2021 के चुनाव में महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा था. यानी महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाला. 2021 के विधानसभा चुनाव में DMK गठबंधन को करीब 46% महिलाओं ने वोट किया था.
