News in Brief

Tipu Sultan Portrait Row: राष्ट्रवादियों के आक्रोश के आगे आखिरकार झुकते हुए मालेगांव की डिप्टी मेयर ने अपने ऑफिस से टीपू सुल्तान की फोटो हटा दी है. शुक्रवार को जी न्यूज़ ने आपको बताया था, मालेगांव की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद ने अपने सरकारी ऑफिस में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई थी. उन्होंने कहा, ‘हम अपनी सोच के महापुरुषों की फोटो लगाएंगे. टीपू सुल्तान की फोटो का विरोध हुआ था. टीपू सुल्तान की फोटो हमारे हॉल में थी. हालांकि रेनोवेशन के लिए फोटो हटा दी गई थी. रेनोवेशन के बाद फोटो फिर लगाई जाएगी. 

कौन है टीपू?

शब्दों को समझिए, अपनी सोच के महापुरुष की फोटो लगाएंगे. मतलब इतिहास में जिस टीपू सुल्तान पर हिंदुओं के नरसंहार का आरोप लगता है. जिस पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगता है. इतिहास में टीपू सुल्तान मंदिरों को तोड़नेवाला शासक बताया गया है. वही टीपू सुल्तान मालेगांव की डिप्टी मेयर को अपनी सोच का महापुरुष लगता है. टीपू सुल्तान की तस्वीर मालेगांव की मेयर और डिप्टी मेयर को कुछ कट्टरपंथियों ने भेंट दी थी. महाराष्ट्र में लोग छत्रपति शिवाजी को आदर्श मानते हैं लेकिन कुछ लोग टीपू सुल्तान को अपना आदर्श मानते हैं.  डिप्टी मेयर टीपू सुल्तान को अपनी सोच का महापुरुष बताते हुए कहा कि रेनोवेशन के बाद इसे हॉल में लगाएंगे. यानी सरकारी दफ्तर की दीवार पर फिर से टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने की तैयारी है.

तस्वीर गिफ्ट में मिली, डिप्टी मेयर ने ऑफिस में लगाई

Add Zee News as a Preferred Source

टीपू सुल्तान की तस्वीरें मालेगांव की मेयर और डिप्टी-मेयर दोनों को गिफ्ट की गई थीं. मेयर नसरीन शेख ने तस्वीर तो ले ली लेकिन उसे दफ्तर में नहीं लगाया. लेकिन डिप्टी मेयर ने उस तस्वीर को अपने सरकारी दफ्तर में सजा लिया. टीपू ने 1785 से 1787 तक मराठों के खिलाफ युद्ध लड़ा उसी टीपू की तस्वीर छत्रपति शिवाजी के महाराष्ट्र में सरकारी ऑफिस में सम्मान के साथ टांग दी गई. सवाल ये है कि आखिर मालेगांव की डिप्टी मेयर के ऑफिस में टीपू सुल्तान की तस्वीर क्यों हैं. टीपू की तस्वीर के विरोध में तीव्र प्रदर्शन हुआ.

आपको याद होगा, मालेगांव नगर निगम में इस्लाम पार्टी की जीत हुई थी. पार्टी का नाम ही इस्लाम है. इसकी विचारधारा समझ सकते हैं. इस्लाम पार्टी वाली विचारधारा को टीपू सुल्तान अपनी सोच वाला महापुरुष लगता है. जबकि उसने हिंदुओं पर अत्याचार किए, मंदिर तोड़े, धर्मातरण कराए. सोचिए एक नगर निगम में सत्ता में आते ही इस्लाम पार्टी और उसके वैचारिक मित्रों ने महापुरुषों की सूची अपडेट कर दी. अपनी सोच वाले महापुरुष की तलाश की और टीपू सुल्तान की तस्वीर टांग दी.

अगर इस्लाम पार्टी और उसके वैचारिक मित्र महाराष्ट्र में सत्ता में आए तो क्या छत्रपति शिवाजी की जगह औरंगजेब और अफजल खान की तस्वीर लगाएंगे. क्या ये महाराष्ट्र की पहचान छत्रपति शिवाजी के शौर्य ,समावेशी नीति और स्वराज से नहीं औरंगजेब, अफजल खान और टीपू सुल्तान की सोच से करना चाहते हैं.

fallback

इसलिए अब छत्रपति शिवाजी महाराज को आदर्श माननेवाले कह रहे हैं कि महाराष्ट्र के हर सरकारी ऑफिस में एक तस्वीर लगाई जाएगी. इस तस्वीर में शिवाजी महाराज अफजल खान का वध करते दिख रहे हैं और ये तस्वीर कट्टरपंथ पर स्वराज की जीत का प्रतीक है.

कोई अपने घर में किसी की भी तस्वीर लगाए आपत्ति नहीं होगी. लेकिन सरकारी दफ्तरों में किसकी तस्वीर लगेगी इसको लेकर प्रोटोकॉल होता है. सरकारी दफ्तर में आमतौर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, वर्तमान राष्ट्रपति, वर्तमान प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाई जाती है. कुछ राज्यों में महात्मा गांधी के साथ डॉ. बीआर अंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल की फोटो भी लगाई जाती है.

राज्य सरकार के कार्यालयों में महात्मा गांधी, वर्तमान राष्ट्रपति,  वर्तमान प्रधानमंत्री के साथ वर्तमान मुख्यमंत्री की फोटो लगाई जाती है. वहीं
कुछ राज्यों में इनके साथ ही स्थानीय महापुरुषों की फोटो भी लगाई जाती है.

प्रोटोकॉल तोड़ टीपू की Photo डिप्टी मेयर के ऑफिस में टांग दी गई, हालांकि तस्वीर हट गई है. लेकिन टीपू प्रेमी भावना कुछ लोगों के मन में जिंदा है, जो मनभेद की दीवार खड़ा करके समाज को बांटती है. इसका विस्तार हो सकता है.