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Tipu Sultan-Shivaji Comparison: महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान को लेकर छिड़े विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से करना इतिहास और भावनाओं दोनों के साथ अन्याय है. पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में सात बिंदुओं के जरिए दोनों ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बीच अंतर समझाने का प्रयास किया गया है. आइए देखते हैं कि इस संपादकीय में छत्रपति और टीपू सुल्तान के बीच अंतर बताते हुए किन बिंदुओं को उठाया गया है…

बता दें कि ये विवाद मालेगांव नगर निगम के उपमहापौर कार्यालय के ‘शान-ए-हिंद’ हॉल में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से जुड़ी है. तस्वीर लगाए जाने के बाद विरोध शुरू हुआ और मामला बढ़ने से पहले ही उसे हटा दिया गया. हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए. इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बयान दिया कि टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के बराबर माना जाना चाहिए. इसी बयान पर शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई है.

ठाकरे कांग्रेस नेता पर जमकर साधा निशाना 

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मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना ऐतिहासिक रूप से उचित नहीं है. पार्टी ने दावा किया कि टीपू सुल्तान मैसूर के शासक थे, जिन्हें उनका राज्य विरासत में मिला था, जबकि छत्रपति शिवाजी महाराज ने ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना की और मुगल सत्ता के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपना स्वतंत्र राज्य खड़ा किया.

शिवसेना ने यह भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगल आक्रमणों का सामना करते हुए स्वराज की रक्षा की, जबकि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा. संपादकीय में 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कुछ इतिहासकार उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला योद्धा मानते हैं, लेकिन उनके शासन को लेकर विवाद भी रहे हैं.

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टीपू सुल्तान के शासनकाल में हुआ जबरन धर्मांतरण 

लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि टीपू सुल्तान के शासनकाल में जबरन धर्मांतरण और मंदिरों के विध्वंस के आरोप इतिहास में दर्ज हैं, जिसके कारण उनके सम्मान को लेकर समय-समय पर विवाद खड़े होते रहे हैं. हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मत है कि टीपू सुल्तान ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव को चुनौती दी और सैन्य दृष्टि से आधुनिक तकनीकों जैसे रॉकेट का उपयोग किया.

शिवसेना ने अपने तर्क में यह भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज को स्त्रियों, बच्चों और ब्राह्मणों के रक्षक के रूप में याद किया जाता है और उन्होंने स्वराज की स्थापना तलवार के बल पर की. पार्टी का कहना है कि शिवाजी महाराज का हिंदवी स्वराज विश्व में एक उदाहरण बना, जबकि टीपू सुल्तान का संघर्ष मुख्यतः अपने राज्य की रक्षा तक सीमित था.

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सामना के संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि पाकिस्तान में टीपू सुल्तान को नायक के रूप में देखा जाता है, जिसे लेकर पार्टी ने आपत्ति जताई. हालांकि, इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं. इस बीच, भाजपा नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कांग्रेस के बयान की आलोचना करते हुए इसे निंदनीय बताया है. वहीं कांग्रेस की ओर से अब तक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के नेताओं का कहना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का मूल्यांकन व्यापक संदर्भ में किया जाना चाहिए. 

इस बीच आपको बता दें कि टीपू सुल्तान का मुद्दा समय-समय पर महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई राज्यों में राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है. इतिहासकारों के बीच भी टीपू सुल्तान को लेकर मतभेद रहे हैं. कुछ उन्हें औपनिवेशिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष करने वाला शासक मानते हैं, तो कुछ उनके शासनकाल की नीतियों की आलोचना करते हैं. दूसरी ओर, छत्रपति शिवाजी को मराठा साम्राज्य के संस्थापक और स्वराज के प्रतीक के रूप में व्यापक सम्मान प्राप्त है. महाराष्ट्र की राजनीति में उनका नाम अत्यंत संवेदनशील और भावनात्मक महत्व रखता है.