
PM Modi AI Summit 2026 Interview: नई दिल्ली में ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दुनियाभर के देश AI की भूमिका और आने वाले समय इसके प्रभाव को लेकर चर्चा कर रहे हैं. वहीं पीएम मोदी ने इस सम्मेलन को लेकर न्यूज एजेंसी ‘ANI’ को एक इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने भारत में AI के युग और इसके प्रभाव पर चर्चा की.
सवाल: आपने हमेशा सशक्तिकरण और विकास के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात कही है. विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को आप किस तरीके से देखते हैं?
पीएम मोदी: भारत के विकसित भारत 2047 की जर्नी में AI एक परिवर्तनकारी अवसर पेश करता है. स्ट्रैटजिक लेंस के साथ AI का पूरी समझ के साथ इस्तेमाल करने से, विकास से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के साथ पूरी तरह से नए आर्थिक अवसर पैदा होते हैं. इससे समावेशी विकास संभव होता है, शहरी-ग्रामीण विभाजन कम होता है और अवसरों तक पहुंच बढ़ती है. हेल्थ सर्विस सेक्टर में AI पहले ही अपना प्रभाव दिखा रहा है. हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स में TB, डायबिटीज रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई अन्य बीमारियों का जल्दी पता लगाने में AI बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं. एजुकेशन सेक्टर में भारतीय भाषाओं में AI पावर्ड पर्सनलाइज्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के छात्रों को कस्टमाइज्ड एजुकेशन सपोर्ट प्राप्त करने में मदद कर रहे हैं. एक बेहद अनूठी पहल में अमूल हजारों गांवों में रहने वाली 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का लाभ उठा रहा है, उन्हें मवेशियों के हेल्थ और प्रोडक्शन पर गुजराती में वास्तविक समय में मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, जिससे जमीनी स्तर की महिला उत्पादकों को सशक्त बनाया जा रहा है. एग्रीकल्चर सेक्टर में भारत विस्तार पहल का मकसद क्रॉप एडवाइजरी, सॉइल एनालिटिक्स और मौसम संबंधी जानकारियों में AI को एकीकृत करना है, जिससे किसानों को बेहतर और स्थानीय स्तर पर फैसले लेने में मदद मिल सके. हैरिटेज प्रिजर्वेशन के सेक्टर में भी AI प्राचीन पांडुलिपियों (Ancient Manuscripts) के डिजिटलीकरण और व्याख्या को सक्षम बना रहा है, जिससे भारत के सिविलाइजेशनल नॉलेज सिस्टम को अनलॉक किया जा रहा है. ऐसे समय में जब दुनिया AI के कारण बढ़ती असमानताओं को लेकर चिंता में तो वहीं भारत इसका इस्तेमाल असमानताओं को दूर करने के लिए कर रहा है. हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आर्थिक अवसर पहुंचाने का एक कारगर साधन बना रहे हैं.
सवाल: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है. हम विश्व को एक बड़ा टेक वर्कफोर्स प्रदान करते हैं. AI युग में हम इसे और कैसे मजबूत कर सकते हैं?
जवाब: भारत में न केवल कस्टमर के रूप में बल्कि एक क्रिएटर के रूप में भी AI का पावरहाउस बनने का टैलेंट और एंट्राप्रेन्यूअल एनर्जी है. हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूट और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI बेस्ड सॉल्यूशन डेवलप कर सकते हैं, जो मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा दें, गवर्नेंस में सुधार करें और नए रोजगार पैदा करें. मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे युवा भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप AI सॉल्यूशन डेवलप कर सकते हैं, जो किसानों, छोटे-बड़े बिजनेस, महिला एंट्राप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिजाइन किए गए हों. हम अपने टैलेंटेड युवाओं द्वारा AI को इनोवेशन और समावेश के लिए एक पावर फैक्टर बनाने के हर प्रयास को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. केंद्रीय बजट 2026-27 इस नजरिए को और मजबूत करता है. यह डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समर्थन का विस्तार करता है, जिससे घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूती मिलती है. इंडियाएआई फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप्स और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स को हाई पर्फॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्सेज तक पहुंच प्रदान करके सहायता दी जा रही है. सेमीकंडक्टर मैनुफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग डेवलेपमेंट के लिए लगातार प्रयास हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मजबूत करते हैं. संक्षेप में कहें तो, हम न केवल प्रतिभाओं का पोषण कर रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर इसे आकार देने तक के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस का निर्माण कर रहे हैं.
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सवाल: हमने AI के दुरुपयोग के कई उदाहरण देखे हैं. हम AI तकनीक से होने वाले संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं ?
जवाब: टेक्नेलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह केवल केवल मानवीय इरादों को बढ़ाने वाला एक साधन मात्र है. यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि यह पॉजिटिविटी की शक्ति बने, हालांकि AI मानवीय क्षमताओं को बढ़ा सकती है, लेकिन फैसले लेने की आखिरी जिम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए. दुनियाभर में समाज इस बात पर बहस कर रहे है कि AI का इस्तेमाल और इसे मैनेज कैसे किया जाना चाहिए. भारत इस चर्चा को दिशा देने में योगदान दे रहा है कि मजबूत सुरक्षा उपाय लगातार इनोवेशन के साथ-साथ चल सकते है. इसके लिए हमे AIपर एक वैश्विक समझौते की आवश्यकता है, जो कुछ फंडामेंटल प्रिंसिपल पर आधारित हो. इनमें इफेक्टिव ह्यूमन ओवरसाइट, सिक्योरिटी बेस्ड डिजाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफेक, क्राइम और टेररिज्म एक्टिविटिजी के लिए AI के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध शामिल होने चाहिए. भारत AI रेगुलेशन में एक स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अपरोच की तरफ बढ़ रहा है. जनवरी 2025 में इंडियाएआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड सिस्टम बनाया है. जैसे-जैसे AI एडवांस होते जा रहा है. वैसे ही हमारी जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होनी चाहिए. भारत का नजरिया स्थानीय जोखिमों और सामाजिक वास्तविकताओ पर फोकस होने के कारण खास है. उभरता हुआ रिस्क असिस्मेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी चिताओं के साथ-साथ संवेदनशील समूहों को होने वाले नुकसानों पर भी विचार करता है, जिनमें महिलाओ को निशाना बनाने वाले डीपफेक, बाल सुरक्षा जोखिम और बुजुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल है. डीपफेक वीडियो की बढ़ती संख्या के कारण इन सुरक्षा उपायों की आवश्यकता स्पष्ट रूप से सामने आ रही है. इसके जवाब में भारत ने AI से बने कंटेंट पर वॉटरमार्क लगाने और हानिकारक AI मीडिया को हटाने के लिए नियम की घोषणा की है. कंटेंट सिक्योरिटी मेजर्स के साथ-साथ, डिजिटल इकोसिस्टम में डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट डाटा सिक्योरिटी और यूजर्स अधिकारों को मजबूत करता है. भारत की प्रतिबद्धता वैश्विक स्तर पर भी फैली हुई है, जिस तरह एविएशन और शिपिंग में सीमाओं के पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक मानदंड है, उसी तरह विश्व को AI में भी समान सिद्धांतों और मानको की दिशा में काम करना चाहिए. चाहे 2023 के GPI घोषणापत्र में अपनी भूमिका के जरिए हो, पेरिस AI चर्चाओं में हो या वर्तमान शिखर सम्मेलन में भारत ने लगातार इनोवेशन को आगे बढ़ाने और साथ ही सभी के लिए सुरक्षित और इनक्लूसिव AI के लिए सुरक्षा उपायों का निर्माण करने के संतुलित मार्ग की वकालत की है.
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सवाल: युवाओं के एक सेक्शन में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा. अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाना मुश्किल हो जाएगा. भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?
जवाब: मैं जॉब मार्केट में AI से जुड़ी बाधाओं को लेकर हमारे युवाओं की चिंताओं को समझता हूं. डर का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है. इसीलिए हम AI से जुड़े भविष्य के लिए अपने लोगों को स्किल प्रदान करने और उन्हें नए स्किल सिखाने में इन्वेस्ट कर रहे हैं. सरकार ने दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी स्किल डेवलेपमेंट इनिशिएटिव्स में से एक की शुरुआत की है. हम इसे भविष्य की समस्या के रूप में नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे वर्तमान की आवश्यकता के रूप में ले रहे हैं. मैं AI को एक ऐसे शक्ति बढ़ाने वाले कारक के रूप में देखता हूं, जो हमारी सोच से परे जाकर नई संभावनाओं को साकार करने में हमारी मदद करेगा. यह डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने और उनकी मदद करने में सक्षम बनाएगा. इतिहास गवाह है कि टेक्नोलॉजी के चलते काम खत्म नहीं होता बल्कि उसका नेचर बदलता है और नई तरह की जॉब क्रिएट होती है. कुछ नौकरियों की परिभाषा भले ही बदल जाए, लेकिन डिजिटल परिवर्तन से भारत की अर्थव्यवस्था में भी नई तकनीकी नौकरियां जुड़ेंगी. सदियों से यह आशंका बनी हुई है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजी रिवॉल्यूशन से रोजगार खत्म हो जाएंगे. फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी कोई इनोवेशन होता है, नए अवसर पैदा होते हैं. AI के युग में भी यही सच होगा. भारत इस बदलाव के अनुकूल ढलने के लिए पहले से ही अच्छी तरह से तैयार है. स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया, जो AI रिसर्च और डेवलेपमेंट, टैलेंट और अर्थव्यवस्था में मजबूत बढ़ोत्तरी को दर्शाता है. इनोवेशन और समावेशिता के संयोजन से हमें विश्वास है कि AI भारत के वर्कफोर्स को सशक्त बनाएगा. सही स्किल और तैयारी के साथ, हमारे युवा कार्य जगत के भविष्य का नेतृत्व करेंगे.
सवाल: भारत में एक जीवंत IT सेक्टर है, जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट्स में महत्वपूर्ण योगदान देता है. आप AI को हमारे IT सेक्टर पर किस तरह का प्रभाव डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
जवाब: भारत का IT सेक्टर हमारी सर्विस एक्सपोर्ट की बैकबोन है और आर्थिक विकास का की ड्राइवर है. AI इस सेक्टर के लिए कई मौके और चुनौतियां दोनों पेश करता है. AI मार्केट के अनुमानों से पता चलता है कि AI एनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन स्पेसिफिक ऑटोमटेशन की नई लहरों के कारण भारत का IT सेक्टर साल 2030 तक 400 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. मूल परिवर्तन यह है कि AI IT सेक्टर को रीपलेस नहीं कर रहा है, बल्कि इसे ट्रांसफॉर्म कर रहा है, हालांकि जनरल पर्पज वाले AI टूल्स इस्तेमाल में आ चुके हैं, बिजनेस लेवल AI का इस्तेमाल अभी भी कुछ विशेष सेक्टरों तक ही सीमित है और स्थापित IT कंपनियां कॉम्पलैक्स बिजनेस प्रॉब्लम्स को हल करने में जरूरी भूमिका निभाती रहती हैं. भारत में एक सशक्त AI इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सरकार ने इंडियाएआई मिशन पर फोकस्ड एक स्ट्रैटजी अपनाई है. हमने GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर लिया है और हम स्टार्टअप्स और बिजनेस को वर्ल्ड क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक किफायती पहुंच प्रदान करने के लिए और भी ज्यादा प्रयास कर रहे हैं. हमने हेल्थ सर्विस, एग्रीकल्चर, शिक्षा और सस्टेनेबल सिटीज में एक्सीलेंस के 4 सेंट्रल और स्किल डेवलेपमेंट के लिए एक्सीलेंस के 5 नेशनल सेंटर्स स्थापित किए हैं ताकि हमारे वर्कफोर्स को इंडस्ट्री रेलेवेंट AI एक्सपर्टीज से लैस किया जा सके. हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न केवल सर्विस डिलीवरी बल्कि ऐसे AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफॉर्म्स और सॉल्यूशन के निर्माण में भी बेस्ट हो, जो भारत और दुनिया के लिए काम करें.

