News in Brief

West Bengal News: ED ने जवाब में कहा है कि कानून का शासन आर्टिकल 14 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है. इस मामले में ED अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप की जांच कर रही है. मामला अवैध कोयला खनन से जुड़ा है. प्राकृतिक संसाधन जनता की संपत्ति हैं. यदि उनके अवैध दोहन से धन अर्जित कर उसे छुपाया जाता है, तो वास्तविक पीड़ित पूरी जनता होती है. ऐसे में अगर अपराध की सही और निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो यह जनता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. ममता बनर्जी और उनके अधिकारियों ने ED अधिकारियों और जनता के  मौलिक अधिकार का हनन किया है. इसलिए ED ने आर्टिकल32 के तहत याचिका दायर की है.

FIR की मांग ने जवाब

इस स्टेज पर सिर्फ FIR की मांग ने जवाब में कहा है कि बंगाल सरकार का यह कहना गलत है कि मामले में विवादित तथ्य होने के चलते रिट याचिका में सुनवाई नहीं हो सकती. इस केस में ED अपनी याचिका के रखे गए तथ्यों पर सुप्रीम कोर्ट से कोई अंतिम फैसले नहीं मांग रही. ED का सिर्फ इतना कहना कहना है कि पहली नजर में गंभीर अपराध का मामला बनता है. इसलिए  मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों  के खिलाफ FIR दर्ज कर CBI जांच होनी चाहिए. चूंकि इस केस मेंआरोप राज्य सरकार और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच राज्य पुलिस से संभव नहीं है.

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सत्ता के दुरुपयोग का मामला
ED के मुताबिक बंगाल सरकार का कहना गलत है कि कि केंद्र और राज्य के बीच विवाद होने के चलते इस पर सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ आर्टिकल 131 के तहत सुनवाई हो सकती है. हकीकत में यह मामला संघीय ढांचे में केन्द्र -राज्य संबंधों के बीच विवाद का नहीं है. यह राज्य के अधिकारियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग और अपराध करने का है. इसलिए यह Article 131 के तहत नहीं बल्कि आर्टिकल 32 के तहत सुनवाई लायक है.

अभी ममता का पक्ष सुनने की जरूरत नहीं
ED ने कहा है कि कानून के मुताबिक FIR दर्ज करने या जांच के चरण पर आरोपी खुद का भी पक्ष सुने जाने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह बात स्पष्ट की गई है. इसलिए अभी इस स्टेज पर ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं है.

बंगाल पुलिस झूठ बोल रही
ED के मुताबिक बंगाल पुलिस की यह दलील गलत है कि वो इस बात की जांच कर रहे थे कि क्या सेंट्रल एजेंसी से होने का दावा कर फर्जी अधिकारी तो नहीं आये है. ED अधिकारियों ने  अपना पहचान पत्र और सर्च वारंट दिखाया था. अगर पुलिस सच में ‘फर्जी अधिकारियों’ वाले पहलू की जांच कर रही होती, तो वे पहले सर्च कर रहे अधिकारियों की पहचान की पुष्टि करती. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसके बजाय पुलिस ने मुख्यमंत्री को वहां चल रहे सर्च के दौरान परिसर में एट्री करने में मदद की और वहां से डेटा ले जाने में साथ दिया.

ममता ने सबूतों की चोरी की
ED का कहना है कि जब उसकी सर्च चल रही थी, उसी वक्त ममता बनर्जी परिसर में घुसी और बाद में जबरदस्ती वहां से डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट लेकर चली गई. ममता बनर्जी का यब दावा बिल्कुल गलत है कि उन्होंने परिसर में घुसने के लिए ED के अधिकारियों से आग्रह किया था और ED ने बिना किसी ऐतराज के उन्हें एट्री करने और डिवाइस ले जाने दिया. हकीकत यह है कि वे क़ानूनी प्रकिया को धता बताकर  Z+ सुरक्षा कर्मियों, सादे कपड़ों में लोगों और कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अंदर गईं. वहां सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी ही इसलिए थी ताकि ED के अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके. उस समय डिजिटल बैकअप की प्रक्रिया चल रही थी, इसलिए ऐसी सूरत में  ED द्वारा  अपनी मर्जी से किसी भी डिजिटल सामग्री को ममता बनर्जी को  सौंपने का सवाल ही नहीं उठता. ED का अधिकारियों के अनुरोध को दरकिनार कर ममता बनर्जी दस्तावेज और डिजिटल सामग्री जबरन ले ली गई. ED का कहना है कि सर्च वाली जगह पर ममता बनर्जी का एंट्री करना और डिजिटल डिवाइस और डॉक्यूमेंट ले जाना न केवल जांच में बाधा डालने जैसा है, बल्कि चोरी जैसे अन्य संज्ञेय अपराधों की कैटेगरी में भी आता है.

चुनावी डेटा की चोरी का आरोप गलत
ED ने अपने जवाब में ममता बनर्जी के इस दावे को खारिज किया है कि ED की रेड राजनीतिक वजह से प्रेरित थी और इसका मकसद टीएमसी पार्टी का चुनावी डाटा हासिल करना था. ED ने कहा कि उसकी कार्रवाई राजनीतिक नहीं होकर बल्कि कानून के तहत की गई वैध कार्रवाई है. उसने PMLA के तहत अधिकृत वारंट के आधार पर Indian PAC Consulting Pvt. Ltd. पर रेड की थी. न कि Indian Political Action Committee पर. इस आरोप का कोई आधार नहीं है कि ED ने इस रेड के ज़रिए TMC का चुनावी डेटा देखा.