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यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते इजरायल की यात्रा पर जाने वाले हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि वह वहां इजरायली संसद को भी संबोधित कर सकते हैं. ऐसे में भारत का इस बयान का समर्थन करना काफी अहम माना जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ
संयुक्त राष्ट्र में 100 से ज्यादा देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एक साथ मिलकर बयान जारी किया. इस बयान में कहा गया कि इजरायल वेस्ट बैंक पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहा है जोकि सही नहीं है. इन देशों का मानना है कि ऐसे कदम इलाके में शांति और स्थिरता के लिए ठीक नहीं हैं. भारत ने इस संयुक्त बयान का समर्थन तय समय सीमा खत्म होने से ठीक पहले बुधवार देर रात किया है, इससे पहले यह साफ नहीं था कि भारत इस बयान में शामिल होगा या नहीं.

बयान में क्या कहा गया
बयान में कहा गया कि इजरायल के एकतरफा फैसले और कदम, जिनका मकसद वेस्ट बैंक में अपनी मौजूदगी बढ़ाना है वह गलत हैं. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया गया है. साथ ही कहा गया कि ऐसे फैसले तुरंत वापस लिए जाने चाहिए.

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बता दें, बयान में किसी भी तरह के कब्जे या क्षेत्र को अपने में मिलाने की कोशिश का विरोध किया गया है. इसमें यह भी कहा गया कि 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाकों में जिनमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है इसकी पहचान आबादी या स्थिति बदलने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

पीएम मोदी की यात्रा
यह पूरा घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा से ठीक पहले हुआ है. वह अगले हफ्ते इजरायल जाने वाले हैं और वहां की संसद को संबोधित करने की भी संभावना है. ऐसे समय में भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है.

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