
India Stops Ravi Water To Pakistan: पाकिस्तान के लिए इस बार की गर्मी भारी संकट लाने वाली है. जिन्ना की ये धरती इस बार बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाली है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस्लामाबाद जाने वाले रावी नदी के पानी को भारत में ही स्टोर करने का इंतजाम तकरीबन पूरा हो चुका है. बता दें कि शाहपुर कंडी बैराज के पूरा होते ही भारत रावी नदी से ज्यादा पानी के बहाव को रोकने वाला है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है.
रावी नदी से कितना पानी पाकिस्तान जाता है?
रावी नदी से तकरीबन 4.549 मिलियन एकड़ फीट पानी माधोपुर हैडवर्क्स के नीचे से पाकिस्तान में बहता है, हालांकि अब भारत सरकार ने शाहपुर कंडी डैम बनाकर इस इस पानी को भारत में ही रोकने की प्लानिंग की है. इस बैराज के पूरा बनने के बाद रावी नदी का अधिकतर पानी पाकिस्तान न जाकर भारत के जम्मू-कश्मीर में कठुआ और सांबा जिलों समेत पंजाब में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होगा. शाहपुर कंडी बैराज के मार्च 2026 तक पूरा करने का टारगेट है.
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पाकिस्तान पर क्या असर होगा?
माधोपुर हेडवर्क्स से नीचे रावी नदी का एनुअल फ्लो11.52 मिलियन एकड़-फीट है, जिसमें से तकरीबन 4.549 मिलियन एकड़ फीट का बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे की कमी के चलते अबतक पाकिस्तान में बह जाता था, हालांकि अब इस पानी का जम्मू-कश्मीर के सूखे इलाकों और पंजाब में लगभग 37,000 हेक्टेयर से ज्यादा के एग्रीकल्चर लैंड में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. पाकिस्तान भी एक कृषि प्रधान देश है. इसकी GDP का 25 प्रतिशत हिस्सा खेती से ही आता है, जिसमें 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी सिस्टम पर निर्भर है, लेकिन भारत के कड़े रुख के चलते उसके लिए संकट बढ़ता जा रहा है. रावी का अतिरिक्त पानी रोकने से पाकिस्तान के पंजाब में सिंचाई और लाहौर-मुल्तान जैसे बड़े शहरों में वॉटर सप्लाई पर संकट छा सकता है. पानी की कमी से पाकिस्तान की खेती में समस्या आएगी, जिसका पूरा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
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क्या है शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्ट?
शाहपुर कंडी डैम 3,394.49 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है, जिसमें पंजाब सरकार की ओर से 2,694.02 करोड़ रुपये यानी 80 प्रतिशत खर्चा किया जा रहा है. वहीं बाकी 20 फीसदी यानी 700.45 करोड़ रुपये भारत सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं. यह डैम 55.5 मीटर ऊंचा है, जिसमें इसमें 7.7 किलोमीटर लंबी हाइडल नहर भी शामिल है. अधिकारियों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में 32,173 हेक्टेयर से ज्यादा और पंजाब में लगभग 5,000 हेक्टेयर इलाकों की सिंचाई होगी.

