
जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए CRPF ने बड़ा कदम उठाया है. पहलगाम के बैसरन में हुए आतंकी हमले के बाद अब पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए 43 हाई-एल्टीट्यूड अस्थायी ऑपरेटिंग बेस यानी (Temporary Operating Bases) (TOBs)TOBs स्थापित किए गए हैं.
6 हजार फीट और अधिक ऊंचाई पर CRPF ने बनाए ऑपरेटिंग बेस
जम्मू-कश्मीर के दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में CRPF ने करीब 6 हजार फीट और उससे अधिक ऊंचाई पर 43 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए हैं, जिससे आतंकवाद विरोधी अभियानों को और मजबूती मिलेगी. यह फैसला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था.
घुसपैठ करने वालों की अब खैर नहीं!
CRPF ने अक्टूबर महीने में कश्मीर में 26 TOBs स्थापित किए, जबकि नवंबर में जम्मू क्षेत्र में 17 नए बेस बनाए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 43 हो गई है. इन बेस को खास तौर पर ऐसे दुर्गम पहाड़ी और जंगल इलाकों में बनाया गया है, जहां पहले आतंकी घुसपैठ और छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाते थे.
जवान कैसे लंबे समय तक रहेंगे तैनात:
इन हाई-एल्टीट्यूड बेस पर तैनात जवानों को लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में डटे रहने के लिए विशेष सुविधाएं और उपकरण दिए गए हैं. जवानों को एर्गोनोमिक बैकपैक दिए गए हैं, जिससे लंबे ट्रेक के दौरान थकान कम होगी. डबल और ट्रिपल लेयर वाले विशेष सुरक्षा जैकेट दिए गए हैं, जो ठंड और खराब मौसम से सुरक्षा प्रदान करेंगे. स्पेशल ट्रेकिंग बूट्स दिए गए हैं, ताकि जवान पत्थरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आसानी से गश्त कर सकें. इन बेस पर जवान लंबी अवधि तक लगातार तैनात रहकर 24 घंटे निगरानी और एरिया डोमिनेशन सुनिश्चित करेंगे. CRPF के इन नए हाई-एल्टीट्यूड बेस से अब पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह खत्म होंगे, और सुरक्षा बलों की निगरानी, प्रतिक्रिया समय और आतंकवाद विरोधी क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.

