केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर आए दिन अपनी बयानबाजियों के लिए मीडिया की सुर्खियों में बने रहते हैं. गुरुवार को एक बार फिर उन्होंने भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट की सराहना करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का आगाज़ काफी सकारात्मक रहा और पहले दिन की चर्चाएं बेहद उपयोगी रहीं. शशि थरूर ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी की बात को नजर अंदाज करते हुए इस आयोजन के लिए केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर के आयोजन में छोटी-मोटी गड़बड़ियां तो हो ही जाती हैं.
कांग्रेस नेता थरूर ने आगे कहा, ‘जब कार्यक्रम का पैमाना बड़ा होता है, तो कुछ तकनीकी या प्रबंधन संबंधी चुनौतियां आ ही जाती हैं, लेकिन इससे आयोजन की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता.’ उन्होंने एआई समिट की खासियत बताते हुए कहा कि यह मंच केवल तकनीक की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर देता है. उनके मुताबिक, ऐसे आयोजन भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने में मदद करेंगे.
शशि थरूर ने की पीएम मोदी की तारीफ
Shashi Tharoor ने कहा कि इस समिट की सबसे बड़ी विशेषता दुनिया भर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रमुख वैश्विक नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही. उनके मुताबिक, मंच पर मौजूद सभी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विकास किसी एक देश तक सीमित न रहे, बल्कि इसके लिए एक समन्वित और साझा वैश्विक दृष्टिकोण अपनाया जाए. थरूर ने कहा कि एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि समाज को बदलने की क्षमता रखने वाला एक बड़ा माध्यम है. इसलिए इसकी प्रगति के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इसका उपयोग मानवता के हित में हो और इसके सकारात्मक प्रभाव को प्राथमिकता दी जाए.
फ्रेंच राफेल को लेकर की तारीफ
थरूर ने यह भी कहा कि इस उभरते क्षेत्र में भारत ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है. भारत ने न केवल तकनीकी नवाचार में अपनी क्षमता दिखाई है, बल्कि जिम्मेदार और समावेशी एआई विकास के पक्ष में वैश्विक स्तर पर मजबूत आवाज भी उठाई है. इंडिया में इस पर फोकस ने साफ तौर पर इस एरिया में ड्राइव को लीड किया है. जहां तक फ्रेंच राफेल की बात है, इसके कुछ हिस्से इंडिया में बन रहे हैं, और यह डील का एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पहलू है क्योंकि यह हमारे डिफेंस को मजबूत करने का हिस्सा है, लेकिन डिफेंस सेक्टर में हमारी सेल्फ-रिलाएंस को भी बढ़ा रहा है… डिफेंस इंडिया के लिए इंपॉर्टेंट है, इसलिए नहीं कि हम वॉर में जाना चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि हम नहीं चाहते कि दूसरे यह सोचें कि हम इतने कमजोर हैं कि वे वॉर में जाने के लिए ललचा सकते हैं। यह सचमुच एक डिफेंसिव डिफेंस है, और मैं इस पर सरकार का सपोर्ट करता हूं।”
केरला स्टोरी को लेकर कही ये बात
कांग्रेस MP शशि थरूर कहते हैं, ‘पहली फ़िल्म, केरल स्टोरी, नफ़रत फैलाने वाली फ़िल्म थी. उसका कोई आधार नहीं था. वे कह रहे थे कि हज़ारों लोगों का धर्म बदला गया, जो सच नहीं है. मुझे लगता है कि कई सालों में ऐसे करीब 30 मामले हुए. हमारा देश बहुत बड़ा है. अगर कोई मामला इधर-उधर होता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे बड़ी कहानी बना दें और उसे प्रोपेगैंडा के तौर पर इस्तेमाल करें… ऐसी बातें कहने का क्या मतलब है जो लोगों के मन में सिर्फ़ नफ़रत फैलाएं और जो सही भी न हों?… हमारे बचपन में अमर अकबर एंटनी जैसी फ़िल्मों को एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट मिलती थी…’
