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Mehbooba Mufti on India-US trade deal: भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पर निशाना साधते हुए जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई इंडिया-यूएस ट्रेड डील जम्मू-कश्मीर (J&K) के हॉर्टिकल्चर सेक्टर को तबाह कर देगी. महबूबा ने आगे ये भी कहा, ‘अमेरिकी सेब पर कम से कम 50 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगानी होगी, तब जाकर कश्मीरी किसानों के हितों की रक्षा होगी.

बेरोजगारी बढ़ने का खतरा

श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए महबूबा ने कहा, ‘हॉर्टिकल्चर सेक्टर जम्मू-कश्मीर की इकॉनमी की रीढ़ है और इससे लाखों परिवारों का गुजारा होता है. अगर ये ट्रेड डील अपने मौजूदा रूप में होती है, तो ये हमें आर्थिक रूप से कमजोर कर देगी और बेरोजगारी बढ़ेगी’.

ट्रेड डील के गंभीर नतीजे होंगे: महबूबा

महबूबा ने दावा किया कि इंपोर्टेड सेबों की आमद ने लोकल मार्केट में पहले ही परेशानी पैदा कर दी है. उन्होंने ईरान से घरेलू मार्केट में आने वाले सेबों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कीमतों में अंतर के कारण लोकल प्रोडक्ट को मुकाबला करने में मुश्किल हो रही है. अमेरिकी किसानों को उनकी सरकार से काफी सब्सिडी मिलती है, जिससे कश्मीरी बागवानों को नुकसान होता है हमारा सेब भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी सेब का मुकाबला नहीं कर सकता. इस ट्रेड डील के गंभीर नतीजे होंगे.’

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PDP चीफ ने प्रधानमंत्री से प्रस्तावित एग्रीमेंट पर फिर से विचार करने की अपील की और इसे किसानों और हॉर्टिकल्चर सेक्टर से जुड़े लोगों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया. उन्होंने मांग की कि घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए देश के बाहर से आने वाले सेब पर कम से कम 50 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाए.

किसानों पर पहले ध्यान दे केंद्र सरकार: महबूबा मुफ्ती

महबूबा ने कहा कि हॉर्टिकल्चर से जुड़े लोग अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं और उन्होंने केंद्र से किसी भी ट्रेड कमिटमेंट को फाइनल करने से पहले किसानों की रोजी-रोटी की सुरक्षा करने की अपील की है.

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जम्मू-कश्मीर में सेब की खेती

अकेले कश्मीर में 22 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है. जबकि हिमाचल में 6 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है. कश्मीर सबसे बड़ा सेब उत्पादक राज्य है और जम्मू कश्मीर की जीडीपी वृद्धि में इसका 15% योगदान है. कश्मीरी सेब के उत्पादन से जम्मू-कश्मीर में करीब 7 लाख लोगों की रोजी रोटी चलती है. इस उद्योग में सिर्फ सेब के व्यापारी ही नहीं हैं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और मजदूरी से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार भी मिलता है.

2020-2025 तक कश्मीर और हिमाचल के किसान तुर्की और ईरान से आयात किए जाने वाले सस्ते सेबों की वजह से परेशानी का सामना कर रहे थे. 2024 में देश में बाहर से आए सेबों में से 23 फीसदी तुर्की से थे, इससे कश्मीर के किसानों को अच्छे दाम मिलना मुश्किल हो गया था, तुर्की से आए सेब बाजार में कश्मीरी सेब से सस्ते थे और लोगों में विदेशी सेब खरीदने का फैशन यानी क्रेज बढ़ गया था. बाद में तुर्की के सेब का बॉयकाट होने से कश्मीरी सेब व्यापारियों को नई आस जगी थी.