
Football CLub Linked To Radicalistaion: दिल्ली बम ब्लास्ट से पता चला कि मेडिकल कॉलेज भी कट्टरपंथ के केंद्र बन गए थे लेकिन अब फुटबॉल क्लब्स में कट्टरपंथ की जड़ें फैली मिली हैं. जानते हैं कि कैसे देश के एक बड़े राज्य में फुटबॉल के जरिये कट्टरपंथ का किक लगाया जा रहा है. इस किक को कुछ लोग फुटबॉल जिहाद का नाम दे रहे हैं. कैसे खेल-खेल में युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है, उन्हें कट्टरपंथी बनाया जा रहा है. फुटबॉल को कट्टरपंथ का हथियार बनाने का ये मामला सामने आया है महाराष्ट्र से.
फुटबॉल के नाम पर फैलाई जा रही कट्टरता
महाराष्ट्र ATS की जांच में सामने आया है कि यवतमाल और अहिल्यानगर जिलों में फुटबॉल क्लब्स को नौजवानों का ब्रेनवॉश करने का केंद्र बना दिया गया था. इसी हफ्ते ATS ने 21 ठिकानों पर छापेमारी की थी जिसमें सामने आया था कि फुटबॉल खिलाने की आड़ में नौजवानों के अंदर कट्टरपंथ का जहर भरा जा रहा था. इन छापों के दौरान पुलिस ने कट्टरपंथ से जुड़ा साहित्य और तलवार जैसे धारदार हथियार बरामद किए हैं. माता पिता अपने बच्चों को खिलाड़ी बनाने के लिए क्लब्स में भेज रहे थे और वहां कट्टरपंथी इन बच्चों का ब्रेनवॉश कर रहे थे. पहले विश्वयुद्ध के दौरान बेल्जियम में ब्रिटिश और जर्मन साम्राज्य की सेनाएं आमने-सामने थीं. जब क्रिसमस आया तो दोनों देशों के फौजियों ने फुटबॉल खेलने के लिए एक दिन का युद्धविराम किया था. वर्ष 1969 में पेले और उनका क्लब सांतोस FC फ्रेंडली मैच खेलने के लिए गृहयुद्ध से जूझते नाइजीरिया गया था. पेले को देखने के लिए दोनों पक्षों ने 48 घंटे के युद्धविराम की घोषणा की थी. यही पहल आगे जाकर पूर्ण युद्धविराम में बदली थी. वर्ष 2006 में आइवरी कोस्ट की फुटबॉल टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया था तब टीम के खिलाड़ियों ने अपने देश में गृहयुद्ध समाप्त करने की गुहार लगाई थी. इस अपील के एक हफ्ते बाद दोनों पक्ष युद्धविराम पर सहमत हो गए थे.
महाराष्ट्र के बाहर जुड़े तार
इसी दीवानेपन और प्यार की भावना की वजह से फुटबॉल को दुनिया में BEUATIFUL GAME की संज्ञा दी गई है लेकिन महाराष्ट्र के दो जिलों में इसी फुटबॉल को बारूदी इरादों का हथियार बना दिया गया. ATS को जानकारी मिली थी कि यवतमाल के पुसाड इलाके में स्थित एक क्लब में नौजवानों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है. जब जांच की गई तो सामने आया कि पुसाड के एक क्लब में खेलने वाले कुछ नौजवानों को राज्य के बाहर भी भेजा गया था. पुलिस ने जब पुसाड के फुटबॉल क्लब्स में छापेमारी की तो पता चला कि फुटबॉल की आड़ में कट्टरपंथी बनाने का ये रैकेट कई जगह चल रहा था. ये कोई छोटा मोटा कट्टरपंथी रैकेट नहीं है. इसके तार महाराष्ट्र के बाहर भी जुड़े हैं.
फुटबॉल से खतरा
बीजेपी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में अब ऐसी साजिशों की आड़ में फुटबॉल जिहाद को अंजाम दिया जा रहा है. महाराष्ट्र ATS के सूत्रों ने ज़ी न्यूज़ को ये भी बताया है कि सिमी से जुड़े तत्व इस कट्टरपंथी गैंग का हिस्सा थे. ये तथ्य बताता है कि कागजों पर भले ही सिमी को बैन कर दिया गया हो, लेकिन सिमी का मजहबी कट्टरपंथ आज भी अलग-अलग शक्ल में जिंदा है. यूरोप के कुछ देशों में फुटबॉल क्लब्स को राजनीतिक विचारों के प्रचार-प्रसार का जरिया बनाया गया था. मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे देशों में तो फुटबॉल के जरिए सत्ता और सिस्टम का विरोध भी किया गया लेकिन ये दुनिया में ये पहली बार है जब फुटबॉल जैसे खूबसूरत खेल के साथ मजहबी कट्टरपंथ से जुड़ा खतरा सामने आया है.
