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Gurdaspur Police Murder: पंजाब के सीमा से सटे इलाके में एक बेहद गंभीर और डराने वाली घटना सामने आई है. गुरदासपुर जिला के अधियां गांव की पुलिस चौकी में घुसकर दो जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. ये जगह पाकिस्तान सीमा से लगभग एक किलोमीटर दूर बताई जा रही है. दोनों जवान 50 वर्ष के आसपास उम्र के थे. घटनास्थल से छह खाली कारतूस मिले हैं. पूरे इलाके को घेराबंदी में ले लिया गया है. पंजाब पुलिस की कई टीमें जांच में जुटी हुई हैं. ये गांव जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर है. वहीं चंडीगढ़ से इसकी दूरी लगभग ढाई सौ किलोमीटर बताई जा रही है.

इस वारदात की जानकारी पुलिस को काफी देर से मिली थी. गांव के सरपंच को सुबह फोन करके चौकी जाकर दोनों जवानों की हालत देखने को कहा गया था. सरपंच जब लगभग 8 बजे चौकी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक सहायक उप निरीक्षक कुर्सी पर सीधा बैठा हुआ था. उसके दोनों हाथ जेब में थे. दूसरा होमगार्ड चारपाई पर रजाई ओढ़े लेटा था. 

पहली नजर में सब कुछ सामान्य लग रहा था. लेकिन पास जाकर देखने पर सच्चाई सामने आई. दोनों को गोली मार दी गई थी. इसके बाद तुरंत थाना प्रभारी और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई. कुछ ही देर में जिले के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच गए. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है.

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नए आतंकी संगठन का नाम 

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल एक नए नाम को लेकर खड़ा हो गया है. एक संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. इस संगठन का नाम तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान बताया जा रहा है. इस नाम से संदेश और पर्चे इंटरनेट माध्यमों पर फैलाए गए हैं. इनमें एक निशान, झंडा और मारे गए दोनों जवानों की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं. 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह संगठन उनके लिए अब तक लगभग अनजान रहा है. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी हो गया है कि ये कोई असली आतंकी संगठन है या किसी और गिरोह द्वारा बनाया गया नाम है.

क्या है तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान?

अब सवाल ये उठता है कि आखिर तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान क्या है. जांच एजेंसियों को अब तक ऐसा कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला है जिससे ये साफ हो सके कि ये भारत में पहले से सक्रिय कोई बड़ा संगठन रहा हो. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह जिम्मेदारी लेने का दावा झूठा तो नहीं है. 

अधिकारियों का मानना है कि कई बार अपराधी डर फैलाने के लिए किसी नए नाम से जिम्मेदारी लेने का नाटक भी करते हैं. इसलिए आतंकी कनेक्शन, अपराधी गिरोह और सीमा पार से जुड़े नेटवर्क तीनों पहलुओं पर जांच चल रही है. कुछ जरूरी सुराग मिलने की भी बात कही जा रही है.

आसपास के इलाकों की तलाशी जारी

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि चौकी की ओर जाने वाली सड़क पर बंद कैमरे लगे हुए थे. लेकिन वे काफी समय से खराब बताए जा रहे हैं. इससे हमलावरों की पहचान करना मुश्किल हो गया है. फॉरेंसिक की टीम ने मौके से सबूत जुटाए हैं. आसपास के इलाकों की तलाशी ली जा रही है. 

मोबाइल और इंटरनेट गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. पुलिस ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमलावर चौकी तक कैसे पहुंचे और बिना किसी रुकावट के वारदात को अंजाम देकर कैसे निकल गए.

संवेदनशील है ये इलाका

ये इलाका पहले भी गंभीर हमलों का गवाह रह चुका है. 2015 में दीनानगर थाना पर हमला हुआ था. इसके बाद 2016 में पठानकोट एयरफोर्स को निशाना बनाया गया था. दोनों मामलों में घुसपैठ का रास्ता यही बॉर्डर क्षेत्र बताया गया था. 

इसी वजह से पठानकोट जिला और गुरदासपुर का इलाका हमेशा से संवेदनशील माना जाता रहा है. अब तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के नाम से सामने आई इस जिम्मेदारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है.

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