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Ghooskhor Pandat Movie: जब देश में यूजीसी की गाइडलाइन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है, तब एक ऐसी फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ है, जिसपर जातिवाद का जहर फैलाने का आरोप है. बॉलीवुड में एक कुंठा क्लब है, जिसके सदस्य कथित तौर पर जाति-धर्म से ऊपर हैं. वे समय-समय पर विष वमन करते रहते हैं. एक बार फिर बॉलीवुड के बौद्धिक बेईमानों ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर विद्वेष फैलाने की कोशिश की है. बता दें कि एक हिंदी फिल्म आ रही है ‘घूसखोर पंडत’. इस फिल्म का कल ट्रेलर लॉन्च किया गया. जैसे ही पोस्टर सामने आए फिल्म के नाम को लेकर विरोध शुरू हो गया. ब्राह्मण समाज ने इसे अपने अपमान से जोड़ दिया. उनका कहना है कि पंडत संज्ञा के पीछे जो घूसखोर विशेषण लगा है, वो विशेषकर ब्राह्मण समाज को टारगेट करके लिखा गया है. ब्राह्मणों को अपमानित करने के लिए फिल्म का नाम ऐसा रखा गया है. 

‘सामाजिक जागरुकता’ के नाम पर प्रोपेगेंडा 

 जो इस फिल्म के नाम का विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि बॉलीवुड में जब से फिल्में बननी शुरू हुई तब से कथित ‘सामाजिक जागरुकता’ के नाम पर कुछ विशेष जातियों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाया जाता रहा है. देवी-देवताओं को बदनाम किया जाता रहा है. एक बार फिर से वही हुआ है. इस फिल्म को नीरज पांडेय ने बनाया है. इसमें एक्टर हैं मनोज वाजपेयी, जिसमें उनके कैरेक्टर नाम अजय दीक्षित होता है और अजय दीक्षित एक घूसखोर पुलिसवाला होता है. दीक्षित ब्राह्मण यानी पंडितों का उपनाम है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंडित को पंडत कहने का चलन है. इसलिए फिल्म का नाम ‘घूसखोर पंडत’ रख दिया गया. नेशनल क्राइम इनवेस्टिगेशन ब्यूरो की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 10 सबसे भ्रष्ट विभागों की लिस्ट में नंबर एक पर पुलिस विभाग है. दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग, तीसरे नंबर पर नगर निगम, चौथे नंबर पर बिजली विभाग और पांचवें नंबर पर सड़क परिवहन विभाग है. मतलब घूसखोरी में नंबर वन पर पुलिस विभाग है। जो फिल्म बनी है घूसखोर पंडत. उसका मुख्य कैरेक्टर भी पुलिसकर्मी ही है. घूसखोरी पर विभागीय आंकड़ा ही जारी होता है. जातिगत आकंड़ा जारी नहीं होता. फिर भी फिल्म जाति के नाम पर बनी है. इससे आप कुंठा क्लब की बौद्धिक बेइमानी का अंदाजा लगा सकते हैं. इसलिए फिल्म का विरोध करने वाले पूछ रहे हैं कि क्या सारे पंडित घूसखोर होते हैं? या सिर्फ पंडित ही घूसखोर होते हैं? हम आपको सुनाते हैं कि लोग क्या कह रहे हैं. 

जातियों को टारगेट करती फिल्में 

ये किसी एक फिल्म या एक नाम का आक्रोश नहीं है. बॉलीवुड के डिजाइनर लेखक, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर का सॉफ्ट टारगेट कुछ विशेष जातियां रही हैं. अगर हम ब्राह्मण की ही बात करें तो बहुत सारी हिंदी फिल्में देखेंगे जिसमें ब्राह्मणों को नकारात्मक कैरेक्टर में दिखाया गया है. उन्हें ढोंगी,अत्याचारी, भ्रष्ट या जातिवादी के रूप में दिखाने वाली कई फिल्में बनी हैं. उनके नाम पर भी फिल्म बनी हैं. 1950 से 1970 की फिल्मों में पंडित को ढोंगी या लालची दिखाया जाता था. ये फिल्में ज्यादातर सामाजिक सुधार और जातिवाद विरोध के मकसद से बनी थी, लेकिन इनमें ब्राह्मण परिवार को अक्सर व्यवस्था का प्रतीक बनाकर नकारात्मक दिखाया गया, जिससे आज भी कुछ लोग इन्हें ‘ब्राह्मण-विरोधी’ मानते हैं. समय बदला, परिस्थितियां बदलीं, दर्शक भी बदल गए लेकिन बॉलीवुड में बैठे कुछ लोगों के दिमाग में जाति का जहर इतनी मात्रा में भरा हुआ है कि वो कम नहीं हो रहा है. जिस दौर के दर्शक जेन-जी हैं, उस दौर में भी कुंठा क्लब जाति विद्वेष से ऊपर नहीं उठ रहा है. उसी का नतीजा है कि अभी घूसखोर पंडत फिल्म बनी है. इससे पहले पिछले साल एक फिल्म बनी थी फूले, जिसमें  ब्राह्मणों को जातिवादी और अत्याचारी दिखाने का आरोप लगा था. इसी फिल्म के समर्थन में अनुराग कश्यप ने ब्राह्मणों पर बहुत ही घिनौनी टिप्पणी की थी. 2019 में आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘Article 15’ बनी थी, जिसमें ब्राह्मणों को जातिवादी और अपराधी के रूप में दिखाने का आरोप लगा था. 

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अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जातिवाद का जहर 

इन बॉलीवुड के बौद्धिक बेइमानों के टारगेट पर सिर्फ ब्राह्मण नहीं हैं, वे बहुत ही शातिराने अंदाज़ में हिंदू देवी-देवताओं को भी लक्षित करते रहे हैं. अभी कुछ ही दिन पहले की बात है जब क्रिएटिविटी के नाम पर मां काली का अपमान किया गया था. एक फिल्म आई थी पीके, जिसमें भगवान शिव को हास्यास्पद तरीके से दिखाया गया था. OTT सीरीज तांडव में हिंदू देवताओं को गलत तरीके से दिखाया गया था. कहने का अर्थ ये है कि आज भी बॉलीवुड में जाति और धर्म का वायरस भरा हुआ है. कुंठा क्लब इसके संक्रमण से संक्रमित है. नीरज पांडेय और मनोज बाजपेयी की ये नई फिल्म इसी का प्रमाण है. वे चाहते तो इससे बच सकते थे. फिल्म का नाम कुछ और रख सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जिस तरह की क्रिएटिविटी दिखाई है, वो शतप्रतिशत विद्वेष फैलाने वाली है.