Digital Currency: गुर्गों की ऑनलाइन भर्ती इस बात का सबूत है कि गैंगस्टर भी हाईटेक हो गए हैं. पिछले 10 सालों में ऑनलाइन कामकाज में सैकड़ों गुना बढ़ोतरी हुई है. ऑनलाइन इंटरव्यू, ऑनलाइन मीटिंग, ऑनलाइन शॉपिंग,ऑनलाइन पेमेंट सबकुछ डिजिटल होता जा रहा है. पिछले एक दशक में पैसों के डिजिटल लेनदेन में 10 हजार गुना ज्यादा की वृद्धि हुई है. यही कारण है कि सरकार अब डिजिटल करेंसी को भी राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. इसके लिए नई शुरुआत सबसे निचले स्तर यानी पीडीएस से की गई है. गुजरात के गांधीनगर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डिजिटल करेंसी का दूसरा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया. वहां ऐसी हाईटेक व्यवस्था की शुरुआत हुई जिसमें एटीएम से कैश की तरह मशीन से गेहूं, चावल या फिर चीनी निकलेगी और बदले में डिजिटल करेंसी से भुगतान करना पड़ेगा.
डिजिटल करेंसी को बढ़ावा दे रही सरकार
सरकार का लक्ष्य हर स्तर पर समूचे देश में इसको बढ़ावा देना है. मतलब अगर आज आप डिजिटल करेंसी का प्रयोग नहीं कर रहे हैं तो आने वाले समय में आप भी इसका प्रयोग करें, ऐसी सरकार की कोशिश है.डिजिटल करेंसी जिसे हिंदी में ई-रुपया कहा जाता है, वो आपके नोटों और सिक्कों का डिजिटल अवतार है. इसे भी भारतीय रिजर्व बैंक ही जारी करता है. इसका मूल्य आपके कागज के नोट के बराबर ही है. अभी देश में 50 पैसे से लेकर 500 रूपये तक नोट और सिक्के की तरह डिजिटल करेंसी है. दैनिक जीवन में डिजिटल रुपये का उपयोग नोट और सिक्कों की तरह ही किया जा सकता है. इसको आप ऐसे समझिए कि आपको अगर किसी को छुट्टे पैसे देने हैं, सब्जी खरीदना है या चाय का पेमेंट करना है तो आप डिजिटल करेंसी से आसानी से पेमेंट कर सकते हैं. जैसे यूपीआई से पेमेंट करते हैं, उसी तरह डिजिटल करेंसी से भी लेन-देन कर सकते हैं. लेकिन ये यूपीआई की तरह नहीं है.दोनों में मूल अंतर ये है कि यूपीआई एक पेमेंट सिस्टम है जबकि ई-रुपया डिजिटल करेंसी है. यूपीआई एक साधन है जिसके माध्यम से आप पैसा ट्रांसफर करते हैं, जबकि डिजिटल रुपया वह पैसा है जिसे आप ट्रांसफर करते हैं. यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए एक बैंक खाता होना अनिवार्य है, क्योंकि यह एक खाते से दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करता है. डिजिटल रुपया वॉलेट बैंक खाते से स्वतंत्र रूप से काम कर सकता है. डिजिटल रुपया सीधे आरबीआई की लाइबिलिटी है और यह आरबीआई के बैलेंस शीट पर दिखाई देता है. जबकि यूपीआई में आपके बैंक खाते में जमा राशि बैंक की लाइबिलिटी होती है.
क्या होगा फायदा?
ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में NFC यानी वायरलेस कम्युनिकेशन तकनीक से बिना इंटरनेट के भी ई रुपया से भुगतान हो सकता है. यूजर अपने फोन या डिवाइस को रिसीवर के डिवाइस से ‘टैप’ करके तुरंत पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं. डिजिटल करेंसी बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी भी नहीं है. क्रिप्टोकरेंसी को पैसे से खरीदा जाता है, लेकिन ई-रुपया आपका पैसा ही है, उसे खरीदना नहीं पड़ता. बल्कि आप अपने बैंक अकाउंट में जमा राशि को डिजिटल टोकन में बदल सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आप एटीएम से नकदी निकालते हैं.इसका प्रयोग करने के लिए पहले आपको अपने बैंक का ई-रुपये ऐप डाउनलोड करना होगा. फिर रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद आपका एक डिजिटल वॉलेट बन जाता है. उसी वॉलेट में कोई दूसरा आपको डिजिटल करेंसी में पेमेंट कर सकता है या आप अपने अकाउंट से ई-रुपये वॉलेट में पैसा ट्रांसफर करके डिजिटल करेंसी बना सकते हैं. अगर पैसे का इस्तेमाल ना हो तो आप वॉलेट ऐप में जाकर ई-रुपये को फिर से अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर भी कर सकते हैं. डिजिटल करेंसी पर ना तो किसी तरह का कोई ब्याज मिलता है और ना ही ई वॉलेट में पैसे रखकर टैक्स बचाया जा सकता है. आप अपने ई-रुपया वॉलेट ऐप से यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं. ई-रुपया का ट्रांजैक्शन फटाफट सेटल हो जाता है. आप डिजिटल करेंसी को यूपीआई का पूरक कह सकते हैं. इस समय दुनिया के 137 देश और मुद्रा संघ डिजिटल करेंसी पर काम कर रहे हैं. 49 देशों में पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और कंबोडिया जैसे देश हैं.जबकि 5 देश ऐसे हैं, जहां डिजिटल करेंसी पूरी तरह लॉन्च हो चुकी हैं. इनमें संयुक्त अरब अमीरात, जमैका, नाइजीरिया और बहामास अहम हैं. इसके अलावा ईस्टर्न कैरिबियन करेंसी यूनियन में भी डिजिटल करेंसी चल रही है.
कब से तैयारी कर रही सरकार
अब भारत भी पूरी तरह से डिजिटिल करेंसी की ओर आगे बढ़ रहा है. डिजिटल करेंसी से पेमेंट का पायलट प्रोजेक्ट तीन साल पहले शुरू हुआ था तब सरकार ने 1 दिसंबर 2022 को पहली बार डिजिटल करेंसी लॉन्च किया था. मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर में चार बैंकों से इसकी शुरुआत हुई थी. आज देश के 17 बैंकों में 60 लाख लोग डिजिटल करेंसी से लेनदेन कर रहे हैं. इस समय 587 करोड़ रूपये की डिजिटल करेंसी चलन में है. सरकार डिजिटल करेंसी पर क्यों फोकस कर रही है..इसे भी समझना जरूरी है. हर साल नोट और सिक्कों पर करीब 5 हजार करोड़ रुपये का खर्च होता है, अगर पूरी तरह से डिजिटल करेंसी लागू हो गई तो पैसे बचेंगे. डिजिटल करेंसी से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन तेज और सस्ता होगा. बिटकॉइन जैसी अनियंत्रित क्रिप्टो के बजाय सरकारी नियंत्रित डिजिटल मुद्रा जारी कर रही है. सबसे अहम बात ये है कि डिजिटल करेंसी के जरिए सरकार भ्रष्टाचार पर स्ट्राइक करना चाहती है क्योंकि इसका लेनदेन रियल टाइम ट्रैक होता है. मतलब जो लोग टैक्स की हेरफेर करते हैं वो नहीं बच पाएंगे. डिजिटल करेंसी के जरिए उनकी चोरी आसानी से पकड़ में आ जाएगी. जबकि आमलोगों के अकाउंट में सीधा पैसा आएगा और बड़ी बात ये है कि जिस काम के लिए पैसा आएगा, उसी में उसका प्रयोग होगा. पिछले दिनों ओडिशा में सुभद्रा योजना के तहत 88 हजार लाभार्थियों को ई-रुपये के माध्यम से ही पैसे दिए गए थे. आंध्र प्रदेश की ‘दीलम 2.0’ योजना में रसोई गैस सब्सिडी को डिजिटल रुपये के माध्यम से वितरित किया जा रहा है. अब गुजरात में इसका विस्तार हो रहा है. धीरे-धीरे इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाने की पूरी और पक्की तैयारी है. उम्मीद है कि इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता मिलेगी.
