What is SCALP Missile: भारत से पाकिस्तान ने जब-जब सीधा युद्ध किया है तो हार पाकिस्तान की ही हुई है. इसी वजह से पाकिस्तान छद्म युद्ध यानी आतंकियों का सहारा लेता है. पाकिस्तान की इस आतंक परस्ती से निपटने के लिए भारत ने एक NEW NORMAL तैयार किया है. ये नीति कहती है अगर पाकिस्तान के इशारों पर भारत में आतंकी हमले होंगे तो उसकी कीमत पाकिस्तानी फौज और आतंकियों को चुकानी होगी. इसी नीति को ऑपरेशन सिंदूर में अपनाया गया था और ऑपरेशन सिंदूर को जारी रखते हुए भारत ने अपनी शक्ति को भी लगातार बढ़ाया है. आज जिस मेगा डील पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सहमति जताई है, उसमें एक गेमचेंजर हथियार भी शामिल है. ये हथियार है स्कैल्प मिसाइल.
भारतीय एयरफोर्स में कितनी मिसाइलें खरीदी जाएंगी?
DAC से सहमति मिलने के बाद भारतीय एयरफोर्स के लिए 300 स्कैल्प मिसाइलें खरीदी जाएंगी. इस ऑर्डर की कुल लागत 3200 करोड़ रुपए होगी. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन 300 मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना में मौजूद 36 रफाल जेट्स के लिए किया जाएगा. इसका मतलब है कि जो अतिरिक्त 114 रफाल खरीदे जाएंगे उनके लिए स्कैल्प मिसाइलों का नया ऑर्डर जारी किया जाएगा. जो स्कैल्प मिसाइलें भारत खरीद रहा है वो हाफिज सईद और मसूद अजहर के लिए दहशत का दूसरा नाम बन चुकी हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुरीदके में हाफिज के हेडक्वार्टर और बहावलपुर में मसूद के आतंकी अड्डे को स्कैल्प मिसाइलों ने ही मिट्टी में मिलाया था. इन मिसाइलों से आतंकी इतना खौफ क्यों खाते हैं ये समझने के लिए आपको स्कैल्प मिसाइल की खासियतों को ध्यान से देखना और समझना चाहिए.
स्कैल्प मिसाइल की खासियतों
स्कैल्प मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये एक फायर एंड फॉर्गेट वेपन सिस्टम है. इसका मतलब है कि स्कैल्प मिसाइल को टारगेट की दिशा में दागने के बाद इसे कंट्रोल करने की जरूरत नहीं पड़ती. ये मिसाइल सीधे टारगेट पर जाकर ही गिरती है. इस मिसाइल की दूसरी खासियत है इसका डेटोनेशन सिस्टम यानी धमाका करने की प्रक्रिया. स्कैल्प मिसाइल में दो विस्फोटक लगे होते हैं. पहला विस्फोटक इमारत की छत को तबाह करता है और दूसरा विस्फोटक इमारत के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाता है. यानी अगर शत्रु बंकर के अंदर भी छिपा है तब भी वो स्कैल्प के वार से बच नहीं सकता. इस मिसाइल की तीसरी और सबसे बड़ी खासियत है सटीक वार. स्कैल्प को जिस लोकेशन पर दागा जाता है, वो उसके एक मीटर के दायरे में जाकर फटती है. यानी दुश्मन के बचने का 1 प्रतिशत चांस भी नहीं रहता.
ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी का राज
ऑपरेशन सिंदूर को सामरिक दुनिया में एक TEXTBOOK यानी सबक देने वाली किताब का दर्जा दे दिया गया है. दुनिया की कई सेनाएं और थिंक टैंक अब तक ऑपरेशन सिंदूर में किए गए सटीक और घातक प्रहार को स्टडी कर रही हैं. भारत ने भी इस कामयाबी को देखते हुए अपनी सामरिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. रफाल फाइटर जेट्स के साथ ही साथ भारत ने एक और घातक फाइटर जेट खरीदने का फैसला कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय नेवी के लिए रफाल-M फाइटर जेट खरीदे जाएंगे. ये रफाल का ही नेवल वर्जन है यानी ये फाइटर जेट विमानवाहक पोत से इस्तेमाल किए जाते हैं. अब हम आपको रफाल-M की खासियत बताने जा रहे हैं ताकि आप समझ सकें कि नेवी के लिए इसी फाइटर जेट को खरीदने की तैयारी क्यों की जा रही है.
फाइटर जेट को खरीदने की तैयारी क्यों की जा रही है?
रफाल-M की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी रेंज यानी उड़ान की दूरी. रफाल-M की मैक्सिमम रेंज 3700 किलोमीटर है. इतनी रेंज के साथ एक रफाल-M अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक का फासला तय कर सकता है. इस विमान की दूसरी विशेषता है इसके हार्ड प्वाइंट्स यानी हथियार ले जाने की क्षमता. रफाल -M में 13 हार्ड प्वाइट्स हैं यानी ये विमान एक साथ 13 किस्म की मिसाइल, बम और अन्य हथियार लेकर उड़ सकता है. रफाल-M को RBE-2 राडार से लैस किया गया है. ये एक अत्याधुनिक राडार है जो एक साथ 40 टारगेट का पता लगा सकता है.
भारतीय वायुसेना में रफाल का दम-खम
भारतीय वायुसेना के परचम तले रफाल अपना दम-खम साबित कर चुका है. अब बारी है रफाल के नौसैनिक वर्जन की. नेवी के लिए पोसाइडन और एंटी सबमरीन एयरक्राफ्ट भी खरीदे जा रहे हैं. ये फैसले और तैयारी इशारा देते हैं अगर ऑपरेशन सिंदूर 2.0 हुआ तो उसका आगाज समंदर की लहरों से ही होगा. हमारे इस विश्लेषण ने आपको देश की बढ़ती सामरिक शक्ति का शुभ समाचार दिया है. तो साथ ही हाफिज और मसूद जैसे किरदारों को ये पैगाम भी दिया है कि अगर उन्होंने भारत को दोबारा नुकसान पहुंचाया तो इस बार भारत का जवाब पिछली बार से कही ज्यादा घातक होगा.
