
DNA Analysis: हम आज विस्तार से समझेंगे कि कैसे भारत में बैठे भारत विरोधी सोच से संक्रमित लोग देश के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं. आज हम ऐसी सोच वालों की वैचारिक मरम्मत करेंगे. एक महीने में बांग्लादेश में दीपू समेत 13 से ज्यादा हिंदुओं की बर्बर हत्या हो चुकी है. हिंदुओं की हत्या ही नहीं हो रही है उनके घर जलाए जा रहे हैं. उनकी संपत्ति को आग के हवाले किया जा रहा है. समझिए बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है. लेकिन भारत में बैठे कट्टरपंथियों के वैचारिक संरक्षक कैसे इस पाप पर पर्दा डालने के लिए बौद्धिक जुगाली कर रहे हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने कानून की पढ़ाई की है. कानून के मामलों में ड्राफ्टिंग बहुत अहम होती है. ड्रॉफ्टिंग यानी शब्दों का चयन. ओवैसी के बयान को समझिए. बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की बर्बर हत्या की उन्होंने निंदा तो की लेकिन किन्तु-परन्तु वाली शैली में. ओवैसी के इस महीन बौद्धिक बेईमानी को समझते हैं.
ओवैसी का बयान
ओवैसी ने कट्टरपंथी उन्माद के शिकार हुए दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या की निंदा करने से पहले भारत में कुछ छिटपुट घटनाओं का संदर्भ दिया. यहीं कट्टपंथियों को बचानेवाली बौद्धिक बेईमानी है. ओवैसी साहब को याद दिलाना चाहेंगे कि अपराध और कट्टरपंथी उन्माद से फर्क होता है. अपराध का शिकार कोई भी आम नागरिक हो सकता है. अतहर और एंजेल चकमा के साथ जो हुआ वो अपराध है. लेकिन ओवैसी साहब दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल के साथ जो हुआ वो अपराध नहीं है. वो कट्टरपंथी उन्माद है. दीपू पर पहले ईशनिंदा का आरोप लगा, फिर उनकी हत्या हुई.
बांग्लादेश से तुलना?
ओवैसी साहब भारत में ऐसा नहीं होता है. ओवैसी साहब ने बड़ी चालाकी से कहा कि जहां बहुसंख्यक राजनीति को संचालित करते हैं वहां कानून का शासन टूट जाता है. आज ओवैसी साहब को ये समझना चाहिए कि भारत में बहुसंख्यक आजादी के बाद से ही राजनीति को संचालित करते रहे हैं. लेकिन भारत में कभी कानून का शासन नहीं टूटा, ओवैसी साहब समझिए भारत में बहुसंख्यक राजनीति को संचालित करते हैं इसलिए भारत बांग्लादेश से अलग है. ओवैसी साहब धर्म को आधार बनाकर जैसा हिंसक तांडव बांग्लादेश में हुआ है वैसा भारत में कभी नहीं हुआ, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत के बहुसंख्यक यानी सनातनधर्मियों का जीवन दर्शन सद्भाव, सहिष्णुता और वसुधैव कुटुम्बकम है.
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