
DNA Analysis: जब सियासत नफरत के नाम पर होती है उसका नतीजा यही होता है. जिया उर रहमान साहब आप सही कह रहे हैं. आज बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का जो तांडव दिख रहा है, वैसा ही कुछ 24 नवंबर 2024 को संभल में भी दिखा था. तब कट्टरपंथी नफरत का हिंसक रूप पूरे देश ने देखा था.बर्क साहब यूपी पुलिस की चार्जशीट और SIT की रिपोर्ट बताती है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जो हिंसा हुई थी उसमें आपकी भूमिका भी थी. बर्क साहब आपने सही कहा है सिर्फ़ बांग्लादेश को कोस देना काफी नहीं है, आपको अपने गिरेबान में भी झांकना चाहिए. समझना चाहिए कट्टरपंथ की चिंगारी हर जगह तबाही ही मचाती है. नुकसान ही पहुंचाती है. चाहे वो संभल हो या बांग्लादेश और सुनिए बर्क साहब कट्टरपंथी नफरत के खिलाफ लड़ाई में सबसे पहले आपको अपने ही खिलाफ खड़ा होना चाहिए.
गांधी-नेहरू का हिंदुस्तान
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा है अगर तुम दुनिया को बदलना चाहते हो, तो पहले खुद को बदलो. गांधीजी की ये सीख आज सिर्फ जिया-उर-रहमान बर्क को नहीं उनके जैसी सोच वाले दूसरे लोगों को भी याद करनी चाहिए. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं विस्तार से बताएंगे. लेकिन पहले आप जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती के बयान को समझना चाहिए. प्रसिद्ध सूफी कवि रूमी ने कहा है कि कल मैं चतुर था, इसलिए दुनिया बदलना चाहता था. आज मैं बुद्धिमान हूं, इसलिए खुद को बदल रहा हूं. महबूबा मुफ्ती चतुर हैं. इसलिए वो भारत को अपने मुताबिक बदलना चाहती हैं. उन्हें अपने डिजायन का भारत चाहिए. उन्हें ऐसा भारत चाहिए जहां पत्थरबाजों, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को खुली छूट हो, वैसे ही जैसे बांग्लादेश में है. महबूबा मुफ्ती जी गांधी-नेहरू का हिन्दुस्तान नहीं बदला आपके कट्टरपंथी सोच पर जो दिखावे का पर्दा पड़ा था वो हट गया है. महबूबा मुफ्ती जी गांधी-नेहरू का हिन्दुस्तान उस दिन लिंचिस्तान बना था जब कश्मीर में कट्टरपंथियों ने चुन-चुन कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया था और आज निर्दोषों का खून बहानेवाले आतंकियों का एनकाउंटर हो रहा है तो आपको गांधी-नेहरू का हिन्दुस्तान लिंचिस्तान नज़र आता है.
बौद्धिक पाखंड
महबूबा मुफ्ती जी समझिए भारत में संविधान और कानून का शासन है. यहां बांग्लादेश की तरह अल्पसंख्यकों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है. जिन्होंने कानून तोड़ा है उनके खिलाफ एक्शन हो रहा है. अफसोस ये एक्शन आपको नागवार गुजर रहा है.भारत में बैठे कट्टरपंथियों के कुछ वैचारिक बंधु देश के संविधान को देश के कानून को चुनौती दे रहे हैं. साजिद रशीदी आप सही कह रहे है. बांग्लादेश में जो हो रहा है वो अनर्थ ही हो रहा है. अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्या करना अनर्थ है, उनके घर जला देना अनर्थ है और सड़क पर हिंसक तांडव अनर्थ हैं. जो लोग बांग्लादेश में ये अनर्थ कर रहे हैं उन्हें तो आप जानते ही है. ये वही कट्टरपंथी हैं जो वैचारिक तौर पर आपके बंधु हैं. जिनके पाप पर पर्दा डालने के लिए मौलाना आप अनर्थ की धमकी दे रहे हैं. ये बौद्धिक पाखंड है.
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हिंदू विरोधी उन्माद
बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हिंदू विरोधी उन्माद को पूरी दुनिया देख रही है. भारत का हर नागरिक इस कट्टरपंथी हिंसा से आक्रोशित है. लेकिन हर घटना को अपने खास नजरिए से देखनेवाले चंद चेहरे कट्टरपंथियों के लिए शाब्दिक ढाल बना रहे हैं. बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की हिंसा से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैला कर रहे हैं. ये बहुत महीन दर्जे की बौद्धिक बेईमानी है. ये चेहरे एक तरफ बांग्लादेश के साथ भारत की तुलना तक भारत को गरिमा को दाग लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथियों के लिए शाब्दिक ढाल बनाकर उनका बचाव कर रहे हैं. जरूरी है ऐसी सोच वालों से सावधान रहा जाए और उनके शाब्दिक प्रपंच और बौद्धिक धूर्तता को बेनकाब किया जाए.
