
DNA Analysis: मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा था कि ‘हमारे पास शक्तिशाली तकनीक है, लेकिन अगर मार्गदर्शन गलत हो तो वही ताकत तबाही ला सकती है.’ सोशल मीडिया पर एंटरटेन करने के नाम पर बनाए जाने वाली रील्स ऐसी ही तबाही के कारण बनती जा रही हैं. देश का जेन-अल्फा रील्स के नशे में इस तरह डूब गया है कि वो लोगों की जान लेने लगा है. इसी रील्स के कारण दिल्ली में एक दर्दनाक हादसा हुआ है.
23 साल के एक लड़के की गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई है. जिस लड़के पर रील के चक्कर में हत्या का आरोप है वो आजाद है और जिस मां के इकलौते बेटे की जान गई है, वो इंसाफ मांग रही है. इस घटना के बाद एक बार फिर से रील्स के नशे पर बहस हो रही है.
दिल्ली में हैरान करने वाला मामला
दिल्ली के द्वारका का रहने वाला साहिल 3 फरवरी को अपनी बाइक से ऑफिस जा रहा था. इसी दौरान रील के नशे में डूबे एक लड़के ने अपनी स्कॉर्पियो कार से टक्कर मार दी. आरोप है कि लड़का उल्टी लेन में गाड़ी चला रहा था. बताया जा रहा है कि उसकी बहन बगल की सीट पर बैठकर रील बना रहा थी. गाड़ी की गति तेज़ थी. कई गाड़ियों से टक्कर होते-होते बची थी और आखिर में साहिल की बाइक को टक्कर मार दी. ये टक्कर इतनी जोरदार थी कि साहिल के सिर के बाईं ओर खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया. उसके स्कैल्प के नीचे खून का थक्का जम गया. उसकी पसलियां टूट गई थी. पोस्टरमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक साहिल की मौत सिर और छाती पर गंभीर चोट लगने के कारण हुई. घटना स्थल पर ही साहिल की मौत हो गई थी.
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— Zee News (@ZeeNews) February 17, 2026
राष्ट्रीय आपदा बन चुकी है रील!
पुलिस ने आरोपी नाबालिग ड्राइवर को गिरफ्तार किया और फिर उसे एक हफ्ते के अंदर जमानत भी मिल गई. साहिल अपनी मां की अकेली संतान था. इन्ना माकन ने अकेले ही साहिल को पाल पोसकर बड़ा किया था. अब वो नौकरी करने लगा था लेकिन रील के नशे में डूबे एक रईसजादे ने उसकी जान ले ली. साहिल की मां रो रही हैं. अपने बेटे लिए इंसाफ मांग रही हैं. ऐसा नशा जो तबाही लाने वाले हथियार के रूप में परिवर्तित हो चुका है. एक तरह से रील राष्ट्रीय आपदा जैसी बन चुकी है. हम आपको बताएंगे कि रील को राष्ट्रीय आपदा की तरह क्यों बताया जा रहा है, लेकिन उससे पहले जान लीजिए कि लाइक और कॉमेंट के लिए जो सरेआम तांडव हो रहा है उसकी जड़ में है सस्ती और आसान लोकप्रियता के साथ-साथा कमाई.
भारत में सामान्य कॉन्टेंट क्रिएटर्स 20 हजार रूपये से लेकर 15 लाख रुपये तक कमाते हैं.
कुछ कॉन्टेंट क्रिएटर्स एक पोस्ट पर 50 लाख रुपये तक कमा लेते हैं.
सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर कई लोगों ने अपनी जिंदगी बना ली है.
लेकिन इनकी संख्या बहुत ही सीमित है. ज्यादातार लोग ऐसे हैं, जो लगातार रील बनाते हैं, लेकिन उन्हें कमाई नहीं होती. फिर भी रील का नशा इतना खतरनाक होता है कि वो एक तरह से मानसिक रूप से बीमार कर देता है. यही लोग व्यूज लाइक्स और कॉमेंट्स के लिए बीच सड़क पर तांडव करते हैं.
रील और सेल्फी से होने वाली मौत के मामले में भारत सबसे आगे
रील और सेल्फी से होने वाली मौत में..भारत पहले स्थान पर है. मार्च 2014 से मई 2025 के बीच सेल्फी की वजह से 271 हादसे हुए, जिसमें 214 लोगों की जान गई. ये दुनिया में रील से होने वाले हादसे का 42 प्रतिशत है. ऐसे रीलबाजों का टारगेट वो जेन-जी है, जो हर रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताती है. जबकि 25 से 40 साल के उम्र के लोग पौन तीन घंटे ऐसे कॉन्टेंट देखते हैं. ऐसा नहीं है कि रील बनाना गलत है. सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर कुछ सेलिब्रेटी बन गए. कुछ को चुनाव टिकट मिल गया. कुछ ने अच्छी खासी कमाई की और कर भी रहे हैं. लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो सिर्फ दूसरों को देखकर रील्स बनाते हैं. सोशल मीडिया पर कई तरह के रील्स बनते हैं.
कुछ लोग कॉमेडी और मीम्स के रील्स बनाते हैं.
कुछ लोग एजुकेशनल रील्स बनाते हैं.
कुछ लोग डांस और एंटरटेनमेंट की रिल्स बनाते हैं.
जबकि कुछ लोग ज्यादा से ज्यादा लाइक्स और कॉमेंट्स के लिए खतरनाक स्टंट वाली रील्स बनाते हैं.
ये जो स्टंट वाले रीलबाज हैं, ये सबसे खतरनाक श्रेणी में आते हैं. इन्होंने ही रील्स को राष्ट्रीय आपदा बना दिया है. ऐसे रीलबाजों को काबू करने के लिए अलग-अलग देशों में नियम कानून है.
यूरोपियन यूनियन ने डिजिटल सर्विसेज एक्ट लागू किया है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सख्त नज़र रखता है.
ब्रिटेन ने विश्व की पहली ऑनलाइन सेफ्टी लॉ पॉलिसी पेश की है. लेकिन भारत में रील्स को लेकर कोई विशेष नियम कानून नहीं है.
भारत में खतरनाक रील बनाने वालों के खिलाफ कोई कानून नहीं
विशेषक खतरनाक स्टंट करने वाले रीलबाजों को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है. इसी का नतीजा है कि साहिल जैसे लड़के की जान चली गई और उसके हत्यारे को एक हफ्ते के अंदर जमानत मिल गई. मित्रो साहिल की मौत सिर्फ उनकी मां इन्ना माकन के लिए ही हादसा नहीं है, ये एक गंभीर सामाजिक बीमारी का नतीजा है. ऐसे बीमारियों के तत्काल इलाज की जरूरत है.

