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Manishankar Aiyar on Hindutva: इस समय देश-दुनिया में कई ज्वलंत मुद्दे हैं, जिसपर दुनिया भर के ज्ञानी और बुद्धिजीवी अपनी राय रख रहे हैं. लेकिन हमारे देश में एक ऐसे भी नेता हैं,जिनकी गाड़ी अभी भी हिंदुत्व के खिलाफ ही दौड़ रही है. एक वरिष्ठ नेता, पूर्व डिप्लोमेट और मशहूर लेखक हैं मणिशंकर अय्यर. अक्सर चर्चा में रहते हैं. 3 बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं. कांग्रेस की सरकार में मंत्री रहे हैं. कई सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित हैं. संक्षेप में इनमें वो हर गुण हैं जो कथित उदारवादी में होते हैं. इसलिए ये स्वघोषित लिबरल हैं. अय्यर साहब कोलकाता में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. कार्यक्रम में मुद्दा था ‘हिंदुत्व से हिंदू धर्म को बचाना चाहिए’. मणिशंकर अय्यर ने यहां क्या कहा, चलिए आपको बताते हैं.

अय्यर बोले- हिंदू धर्म हिंदुत्व के डर में जी रहा

उन्होंने कहा, हिंदुत्व डर में जी रहा हिंदू धर्म है. यह 80% हिंदुओं से कहता है कि वे 14% मुसलमानों से कांपें.सावरकर ने लिखा था- हिंदू हिंसा के कामों से खुद को हिंदू समझते हैं. महात्मा ने लिखा- हिंदू की सभ्यता पुराने जमाने की है. वो असल में अहिंसक हैं. आपने देखा होगा कि हिंदुत्व के स्वयंभू ठेकेदार बीफ़ जमा करने,खाने या ट्रांसपोर्ट करने के शक में किसी को भी पीटते हैं और मार भी डालते हैं. जबकि गांधीजी ने लिखा था, गाय की रक्षा के लिए किसी इंसान को मारना हिंदू धर्म और अहिंसा को नकारना है.

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अपनी कथित लिबरल सोच के शिकार मणिशंकर अय्यर ने जो कहा उसे समझिए. उनके भाषण का सार यही है कि आज हिंदू हिंसक हो गए हैं. हिंदुत्व कट्टरपंथ का पर्याय बन गया है. आज का हिंदू इतना असहिष्णु हो गया है कि किसी भी छोटी-छोटी बात पर गैर हिंदुओं की हत्या कर देता है.

पूरी दुनिया में मची है हलचल

सोचिए इस समय दुनिया में क्या-क्या नहीं हो रहा है. ईरान में कट्टरपंथी शासन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. ईरान में मस्जिदों में आग लगाई जा रही हैं. वेनेजुएला के राष्ट्रपति को ट्रंप ने अगवा करा लिया. रूस और यूक्रेन में जंग हो रही है. ग्रीनलैंड को लेकर जंग की तैयारी हो रही है. हमारे पड़ोस में कट्टरपंथी चुन-चुन कर हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं. यानी मानवता की चिंता में कथित तौर पर दुबले हो रहे मणिशंकर अय्यर जैसे कथित लिबरल्स के लिए कई मुद्दे हैं. वो ईरान में लोकतंत्र के पक्ष में बोल सकते थे. वो वेनेजुएला के लोकतांत्रिक अधिकारों पर बोल सकते थे.

वो चाहते तो अपने कथित उदारवाद के वैचारिक दायरे को थोड़ा विस्तार देते हुए तो इन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार भी दिखता. लेकिन नहीं ये ईरान, वेनेजुएला, रूस-यूक्रेन, बांग्लादेश, पर नहीं बोलेंगे. मणिशंकर अय्यर और उनकी कथित लिबरल जमात सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ बोलेगी, जानते हैं क्योंकि क्योंकि इन्हें अहिंसक सनातनियों को हिंसक और कट्टरपंथी बताना है. इसलिए आज इनसे सवाल भी पूछे जा रहे हैं.

कौन सी संस्कृति आपको धार्मिक ग्रंथों पर भी बहस करने का अधिकार देती है. यह सिर्फ हिंदू है. मैं पूछना चाहता हूँ कि हिंदुइज़्म शब्द क्यों? ‘इज़्म’ को भारत में पैदा हुए सभी धर्मों के साथ क्यों जोड़ा जाता है? हिंदूइज़्म, बौद्धइज़्म, सिखइज़्म और जैनइज़्म. आपने कभी इस्लामइज़्म और ईसाईइज़्म के बारे में नहीं सुना… ‘इज़्म’ शब्द को सिर्फ़ नीचा दिखाने के लिए जोड़ा जा रहा है.