Delhi Police: सिस्टम यानी ढांचा लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सिस्टम समन्वय करता है, सबके अधिकार तय करता है. ये तय करता है कि व्यवस्था ठीक से चलती रहे. सोचिए अगर इस सिस्टम का अतिक्रमण हो, सिस्टम में शामिल लोग ही अपने अधिकार का उल्लंघन करें तो क्या होगा. निश्चित तौर पर अराजकता फैलेगी. आज हम अधिकारों के अतिक्रमण वाली ऐसी ही सोच का विश्लेषण करेंगे.
एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें गाड़ी के बोनट पर नंबर प्लेट के ऊपर लाल रंग से दिल्ली पुलिस लिखा है. यानी ये गाड़ी दिल्ली पुलिस की है. इसका बोनट खुला है. और कुछ लोग गाड़ी के आसपास मौजूद हैं.
क्यों चेक हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ी
गाड़ी खराब नहीं है. उसकी चेकिंग हो रही है. इसलिए बोनट खोला गया है. पुलिस की गाड़ी की चेकिंग सुनकर आश्चर्य मत कीजिए. ये सही है कि दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ियों की चेकिंग हो रही है. चेकिंग भी बिहार, यूपी या कर्नाटक में नहीं दिल्ली में ही हो रही है. और चेकिंग करनेवाले भी पुलिसकर्मी ही हैं. दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ियों की चेकिंग कैसे हुई, ये आपको बताते हैं.
बोनट खोलकर इंजन को स्कैन किया गया. फिर गाड़ी के दरवाजे खोलकर अंदर चेकिंग हुई. जैसे पुलिस संदेह होने पर संदिग्धों की गाड़ी चेक करती है उसी तरह बकायदा आगे से पीछे तक पूरी गाड़ी चेक की जाती है.
जो लोग दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ी को चेक कर रहे हैं, उन्हें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है. सोचिए ये कैसा गजब हो रहा है कि जिस दिल्ली पुलिस को दिल्ली में दूसरों की गाड़ी की सुरक्षा जांच करनी चाहिए वो अपनी गाड़ी की जांच करवा रही है. मतलब ये कैसी व्यवस्था है और ऐसा क्यों हुआ अब इसे समझिए.
#DNAमित्रों | दिल्ली में बंगाल पुलिस की ‘दीदी’गिरी…बंगाल पुलिस के अधिकारियों ने ली दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की तलाशी, क्या ममता बनर्जी की पुलिस ‘सर्वोपरि’ है?#DNA #DNAWithRahulSinha #Delhi #MamataBanerjee #WestBengalPolice #DelhiPolice@RahulSinhaTV pic.twitter.com/FCGOErWTQM
— Zee News (@ZeeNews) February 3, 2026
बंगाल के पुलिस अफसरों ने की चेक
वीडियो में जो लोग दिल्ली पुलिस की गाड़ी की चेकिंग कर रहे हैं वो बंगाल पुलिस के अधिकारी हैं. जहां दिल्ली पुलिस की गाड़ी की जांच हो रही है वो दिल्ली का बंग भवन है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर हैं. प्रोटोकॉल के मुताबिक दिल्ली पुलिस की टीम ममता बनर्जी को सुरक्षा देने के लिए बंग भवन पहुंची थी.
लेकिन यहां दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की तलाशी हुई. ये भारत के इतिहास में पहली बार हुआ जब दिल्ली की जमीन पर, दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार में, दूसरे प्रदेश की पुलिस ने दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की जांच की. ये अविश्वास है या राजनीति- इसपर चर्चा करेंगे. लेकिन पहले समझते हैं कि दिल्ली पुलिस किस प्रोटोकॉल के तहत बंग भवन पहुंची थी.
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प्रोटोकॉल के मुताबिक, भारत में जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाता है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मेजबान राज्य की होती है.
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मेजबान राज्य का कर्तव्य होता है कि वो अतिथि सीएम को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए.
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इसके लिए स्थानीय पुलिस के जवान, पायलट और एस्कॉर्ट गाड़ियां, जहां सीएम ठहरते हैं वहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाती है.
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इसके लिए सीएम के कार्यक्रम की जानकारी मेजबान राज्य को पहले से देना अनिवार्य होता है.
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ये प्रोटोकॉल आमतौर पर सभी विशिष्ट लोगों के लिए होता है. इसका पालन सभी राज्य करते हैं. तो पश्चिम बंगाल की सीएम दिल्ली आईं थी. दिल्ली में आजकल हाईअलर्ट है.
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ममता बनर्जी के थ्रेट परसेप्सन यानी उनकी सुरक्षा से जुड़े खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस अपना कर्तव्य निभाने पहुंची थी.
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लेकिन हुआ क्या. ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात पश्चिम बंगाल पुलिस के अधिकारियों ने दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की चेकिंग कराई.
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और सिर्फ चेकिंग की नहीं कराई चेकिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई. देखिए एक महिला अधिकारी पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग कर रही है.
ये शुद्ध राजनीति है. ममता बनर्जी दिल्ली पुलिस पर बंगाल से आए लोगों को धमकाने और जासूसी का आरोप लगा रही हैं. ममता आरोप लगा रही हैं कि दिल्ली पुलिस पश्चिम बंगाल से आए उन लोगों को धमका रही है जो एसआईआर की शिकायत करने दिल्ली आए हैं. अपनी सुरक्षा के लिए ममता जी ने पश्चिम बंगाल से 22 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को दिल्ली बुलाया था. यानी उन्हें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं था.
ये कैसी राजनीति?
पहले दिल्ली पुलिस पर आरोप, फिर गाड़ियों की तलाशी. इससे साफ है कि ये मुद्दा सुरक्षा में चूक का नहीं सियासत में मौका नहीं चूकने का है. इसलिए सवाल भी यही है कि क्या राजनीतिक हित के लिए संवैधानिक व्यवस्था को तोड़ना सही है. बीजेपी यही सवाल ममता बनर्जी से पूछ रही है.
अमेरिकी संविधान के पिता कहे जानेवाले प्रसिद्ध विद्वान जेम्स मैडिसन ने कहा है कि शक्ति स्वभाव से अतिक्रमण करने वाली होती है, और इसे अपने निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़ने से प्रभावी रूप से रोका जाना चाहिए.
दिल्ली में पश्चिम बंगाल की पुलिस ने जो किया वो अधिकारों का अतिक्रमण है. ये संवैधानिक व्यवस्था का अतिक्रमण है. आमतौर पर कोर्ट के आदेश के बाद ही सुरक्षाबलों की गाड़ियों की तलाशी होती है. एक प्रदेश की पुलिस जब दूसरे प्रदेश में जाती है तो इसके लिए भी व्यवस्था है. लेकिन प्रोटोकॉल तोड़कर दूसरे प्रदेश में उसी प्रदेश की पुलिस की गाड़ियों की चेकिंग ये अराजकता है. ये अधिकारों का शुद्ध अतिक्रमण हैं.
ऐसे तो फैल जाएगी अराजकता
अधिकारों का ये अतिक्रमण अगर ऐसा ही चलता रहा तो अराजकता फैल जाएगी. समझिए आज पश्चिम बंगाल की पुलिस दिल्ली में दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की चेकिंग कर रही है, कल पंजाब की पुलिस दिल्ली पुलिस को बताए बिना ही दिल्ली में किसी को गिरफ्तार कर ले. सोचिए क्या होगा अगर पीड़ित के घरवाले अपहरण का केस करें और दिल्ली पुलिस कथित दोषियों को पकड़े तो पता चले कि वो पंजाब पुलिस के जवान हैं.
सोचिए कल को कर्नाटक पुलिस बिना सूचना दिए उत्तर प्रदेश में किसी ठिकाने पर छापेमारी कर दे. जहां छापा पड़ा हो वहां से यूपी पुलिस को डकैती की सूचना मिले. जब यूपी पुलिस मौके पर पहुंचे तो पता चले कि ये कर्नाटक पुलिस की छापेमारी है.
अगर ऐसा होने लगे तो अराजकता फैलेगी. प्रशासनिक टकराव के साथ ही राजनैतिक टकराव भी शुरू हो जाएगा. इसलिए देश के संविधान में पुलिसिंग को राज्य सूची में रखा गया है, राष्ट्रीय सुरक्षा और समन्वय केंद्र का विषय है. यानी सभी पक्षों की कानूनी मर्यादा तय की गई है.
लेकिन दिल्ली में पश्चिम बंगाल पुलिस ने जो किया उससे संवैधानिक अधिकार की मर्यादा तार-तार हो गई. सोचिए अगर दिल्ली में ममता बनर्जी की सुरक्षा में कोई चूक हो जाती तो आरोप किसपर लगते. दिल्ली पुलिस पर. लेकिन उसी दिल्ली पुलिस के काम में बाधा खड़ी की गई. और जिन अधिकारियों ने ये किया उन्होंने ममता जी की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया.
ममता बनर्जी को मिली हुई है जेड प्लस
ममता जी को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है. ऐसी सुरक्षा वाले व्यक्ति के लिए अतिरिक्त सावधानी और गोपनीयता बरती जा रही है. लेकिन बंग भवन के सामने एक महिला अधिकारी मोबाइल से गाड़ियों का वीडियो बना रही थी. ये कानूनी तौर पर गलत है. क्योंकि वीडियोग्राफी के लिए एक अलग डिपार्टमेंट होता है. आदेश मिलने के बाद ये डिपार्टमेंट तय नियम के तहत वीडियोग्राफी कराता है. सोचिए जेड प्लस सिक्योरिटी वाले व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ा ये वीडियो अगर लीक हो जाए तो क्या होगा. ये जानकारी सार्वजनिक हो जाएगी कि ममता जी के काफिले में कैसी गाड़ियां होती हैं. कितनी गाड़ियां होती है. इससे खतरा बढ़ सकता है.
प्रसिद्ध विद्वान एलेक्सिस डी टॉकविल ने कहा है कि शक्तियों के केंद्रीयकरण और अतिक्रमण से लोकतंत्र कमजोर पड़ता है. दिल्ली में जो हुआ वो शक्तियों के केंद्रीयकरण और अधिकारों के अतिक्रमण का साक्ष्य है. ममता जी को खुश होना चाहिए था कि दिल्ली पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए सतर्क है. लेकिन उन्होंने अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए दिल्ली पुलिस की तलाशी करा दी. राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में अधिकारों के अतिक्रमण का ये ट्रेंड यहीं थमना चाहिए. क्योंकि अगर ममता जी की देखा देखी दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी ऐसा करने लगे तो इससे अराजकता बढ़ेगी. व्यवस्था चरमराएगी.
