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Pakistan For NATO Mission: डोनाल्ड ट्रंप को अफ्रीका पर प्रभाव बढ़ाना है तो ट्रंप का फेवरेट फील्ड मार्शल यानी असीम मुनीर इस्लामिक नाटो के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए नई साजिशें रच रहा है.  इस कथित इस्लामिक नाटो को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस बार मुनीर ने क्या किया है. पाकिस्तान में मुनीर ने इस्लामिक देश जॉर्डन के आर्मी चीफ के साथ मीटिंग की है. इस मीटिंग में मुनीर ने जॉर्डन को द्विपक्षीय सामरिक सहयोग का ऑफर दिया है यानी सऊदी अरब की ही तर्ज पर मुनीर जॉर्डन को भी उन देशों की लिस्ट में शामिल करना चाहता है जो युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए बाध्य होंगे. इस प्रस्ताव के साथ ही साथ मुनीर ने जॉर्डन के आर्मी चीफ को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के योगदान का भी प्रस्ताव दिया है. इसका मतलब है कि मुनीर जॉर्डन में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी चाहता है. 

मुनीर का ऑपरेशन इस्लामिक नाटो

पहले मुनीर ने सऊदी अरब से हाथ मिलाया. फिर लीबिया जाकर एक आतंकी की कथित सरकार को अपना समर्थन दिया और अब मुनीर ने जॉर्डन को शीशे में उतारने की कोशिश की है. यही है मुनीर का ऑपरेशन इस्लामिक नाटो यानी इस्लामिक देशों का सामरिक गठबंधन. मुनीर के इस ब्लूप्रिंट में सबसे ऊपर है एटमी ताकत. मुनीर ये हिमायत करता है कि पाकिस्तान के पास एटमी हथियार हैं. इसी वजह से इस्लामिक सामरिक गुट की कमान पाकिस्तान के हाथों में दी जानी चाहिए. दोहा में इस्लामिक समिट के दौरान मुनीर खुलेआम कह चुका है कि इस्लामिक नाटो के दो मकसद होंगे. पहला पश्चिम एशिया में इजरायल को रोकना और दूसरा दक्षिण एशिया में भारत का मुकाबला करना. मुनीर के इस्लामिक नाटो प्लान की तीसरी धुरी है सुरक्षा की गारंटी. मुनीर ये प्रस्ताव दे चुका है कि अगर अमीर अरब मुल्क पैसा दें तो पाकिस्तान अपनी फौज भेजकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. यानी मुनीर एक तीर से दो निशाने लगाना चाहता है. पहला वो अरब देशों का पैसा हड़पना चाहता है और उसका दूसरा टारगेट है अरब देशों से भारत के बढ़ते संबंधों में बाधा डालना. 

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भारत से डकर इस्लाम का हवाला दे रहा मुनीर 

मुनीर को पता है कि वो ताकत के मामले में भारत के सामने टिक नहीं सकता. इसी वजह से वो बार-बार इस्लाम का हवाला देकर इस्लामिक नाटो खड़ा करना चाहता है. मुनीर की करतूतें सिर्फ मुलाकातों और समझौतों तक सीमित नहीं हैं. दूसरे देशों में अपने भाषणों के दौरान मुनीर ऐसे अल्फाज बोल रहा है, जो कोई सेना प्रमुख नहीं बल्कि जिहादी ही बोल सकता है. लीबिया में खलीफा हफ्तार से मुलाकात के दौरान भी मुनीर ने एक ऐसा ही भाषण दिया था. 

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मुस्लिम नेताओं के आगे गिड़गिड़ाया मुनीर 

हफ्तार द्वारा दिए गए सम्मान भोज में मुनीर ने कहा था,’ मुसलमान होने के नाते ये हमारा फर्ज है कि हम दुश्मन को अंदर तक दहलाने के लिए हर वक्त तैयार रहें. हमें ऊपरवाले ने यही हुक्म सुनाया है. सभी मुस्लिम देशों को ताकत के साथ ही साथ वो हिम्मत भी जुटानी होगी जिसके बलबूते हम दुनिया से मुकाबला कर सकें.’ मुनीर के भाषण के ये शब्द सुनकर लगता है जैसे आतंकवादी हाफिज सईद या मौलाना मसूद अजहर बोल रहा हो. इस्लाम के नाम पर मुनीर जिस तरह मुस्लिम देशों को अपनी साजिशों का हिस्सा बनाना चाहता है उन्हें देखकर पाकिस्तान के कुख्यात तानाशाह जिया-उल-हक की याद आ जाती है.