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Drone base of India: भारतीय सेना के लिए अब एक डेडिकेटेड ड्रोन बेस बनाया जा रहा है. यानी एक ऐसा हवाई अड्डा जहां से सेना के ड्रोन अपने अभियानों के लिए उड़ान भरेंगे. भारतीय सेना का ये ड्रोन हेडक्वार्टर उत्तर प्रदेश के मेरठ में बनाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक इस ड्रोन बेस का कुल क्षेत्रफल 900 एकड़ होगा. इस बेस के अंदर ड्रोन रखने के लिए दो बड़े हैंगर यानी चैम्बर बनाए जाएंगे. मेरठ के इस ड्रोन बेस पर 2110 मीटर लंबा रनवे होगा. आमतौर पर इतना बड़ा रनवे लड़ाकू विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए बनाया जाता है. इतने बड़े रनवे से भारत के प्रीडेटर और हेरोन जैसे लंबी दूरी के ड्रोन उड़ान भर पाएंगे. ड्रोन के साथ-साथ इस बेस से C-130 जैसे भारी मालवाहक विमान भी उड़ान भर सकेंगे.

रक्षा क्षेत्र में बजेगा भारत का डंका

भारत के पहले ड्रोन बेस के निर्माण की जिम्मेदारी BRO यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन को दी गई है. BRO के मुताबिक 80 से 85 महीनों के अंदर ये ड्रोन बेस पूरी तरह तैयार हो जाएगा. यानी भारतीय सेना के पास एक ऐसा एयरबेस होगा जहां से सिर्फ और सिर्फ ड्रोंस ही उड़ान भरेंगे. भारतीय सेना ने एक ड्रोन बेस बनाने की तरफ कदम क्यों बढ़ाया है. इस सवाल का सिर्फ एक ही जवाब है कि ड्रोन वॉरफेयर में भारत कितना आगे बढ़ चुका है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमलों के लिए भारत ने चार किस्म के ड्रोन इस्तेमाल किए थे. इन ड्रोन हमलों के पहले टारगेट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बने आतंकी कैंप्स थे. दूसरा टारगेट पाकिस्तान की मेड इन चाइना हवाई रक्षा प्रणाली थी  और तीसरा टारगेट था पाकिस्तान का अहम नूर खान एयर बेस. इन सभी हमलों में कामयाबी की दर 100 प्रतिशत थी. यानी भारतीय सेनाओं ने जितने भी ड्रोन दागे, उन सभी ने अपने टारगेट को हिट किया था.

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अब तक दुनिया के सिर्फ 4 देशों के पास ड्रोन बेस हैं. ये देश हैं अमेरिका, चीन, इजरायल और तुर्किए. मेरठ का ड्रोन बेस बनते ही भारत इस शक्ति को हासिल करने वाला पांचवां देश बन जाएगा. एक ड्रोन बेस बनाने से किसी सेना को क्या सामरिक फायदा होता है, आइए बताते हैं. 

  • एक पारंपरिक एयरबेस के मुकाबले ड्रोन बेस की लागत काफी कम पड़ती है. वायुसेना के किसी एयरबेस पर मेंटनेंस से लेकर दूसरी जरूरतों के लिए लंबा चौड़ा स्टाफ रखना पड़ता है जबकि ड्रोन बेस पर स्टाफ की तादाद काफी कम होती है. ड्रोन बेस के जरिए लगातार निगरानी का काम जारी रखा जा सकता है. जैसे- एक ड्रोन 12 घंटे उड़ सकता है. उड़ान की मियाद खत्म होने की जानकारी मिलते है दूसरा ड्रोन भेजा जा सकता है. इस कार्रवाई से किसी क्षेत्र में स्थायी निगरानी की जा सकती है. अगर ड्रोन को किसी एक ही जगह रखा जाए तो टकराव या युद्ध जैसे हालात में एक ही इलाके से जरूरत मुताबिक उन्हे अलग-अलग मोर्चों पर भेजा जा सकेगा.

  • इन्हीं सामरिक फायदों को देखते हुए भारतीय सेना के लिए एक मुकम्मल ड्रोन स्टेशन यानी बेस तैयार करने का प्लान बनाया गया है जो सेना की ड्रोन क्षमताओं के लिए एक केंद्र बिंदु की तरह काम करेगा. भारतीय थलसेना के साथ ही, भारतीय नौसेना के लिए भी एक ड्रोन बेस बनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. 

INS बाज

भारतीय नौसेना के लिए जो ड्रोन बेस तैयार किया जा रहा है, उसका नाम है INS बाज. INS बाज निकोबार द्वीप समूह में स्थित है. ये 2012 से सक्रिय है. पहले इस नौसैनिक अड्डे से डोर्नियर जैसे टोही विमान उड़ान भरते थे लेकिन अब इसे ड्रोन ऑपरेशंस के लिए अपग्रेड किया जा रहा है. INS बाज के रनवे यानी हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाकर 3 हजार मीटर तक की जा रही है. इतने लंबे रन-वे से मालवाहक विमानों के साथ ही साथ प्रीडेटर जैसे लंबी दूरी के ड्रोन भी उड़ान भर सकेंगे. इस अपग्रेड के बाद INS बाज एक ऐसा ड्रोन बेस बन जाएगा जिससे पूरे हिंद महासागर पर भारतीय ड्रोंस की निगरानी स्थापित हो जाएगी.

ड्रोन अड्डे बनाने के साथ-साथ भारतीय सेनाओं के लिए ड्रोन की तादाद भी तेजी से बढ़ाई जा रही है. भारतीय सेनाओं के पास फिलहाल 200 लंबी दूरी के ड्रोंस हैं और तकरीबन 5 हजार अटैक ड्रोंस हैं. इन ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हाल ही में भारत सरकार ने अमेरिका की एक कंपनी के साथ समझौता किया है. इस कंपनी के साथ मिलकर सेनाओं के लिए V-BAT ड्रोन बनाए जाएंगे.

V-BAT ड्रोन की खासियत 

V-BAT ड्रोन की यूएसपी यानी सबसे बड़ी खासियत इसका वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम है. यानी इस ड्रोन को उड़ने के लिए किसी हवाई पट्टी की ज़रूरत नहीं पड़ती. ये ड्रोन जहां खड़ा होता है सीधे वही से उड़ान भर सकता है. ये ड्रोन अपने साथ चार छोटी दूरी की मिसाइल लेकर उड़ सकता है और इस ड्रोन को स्मार्ट बम से भी लैस किया जा सकता है. इस स्मार्ट बम को GPS से दिशा दी जा सकती है, जिसकी वजह से बम सीधे अपने टारगेट पर जाकर लगता है.

ड्रोन अड्डों से लेकर मिसाइल वाले ड्रोन तक की तैयारियां बताती हैं कि भारत ने अपनी ड्रोन क्षमताओं को नेक्स्ट लेवल तक पहुंचाने का फैसला कर लिया है. अगर अगली बार पाकिस्तान ने किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया तो पाकिस्तान परस्त आतंकियों का सामना भारत के इन घातक उड़ते शिकारियों से होगा.