
बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर का पहुंचना, पीएम मोदी का लेटर जिया के बेटे तारिक रहमान को सौंपना, इधर दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बांग्लादेश के उच्चायोग में जाकर दुख व्यक्त करना… ढाका में हिंदुओं पर हमलों की खबरों के बीच भारत सरकार के हालिया कदम क्या इशारा कर रहे हैं? यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि खालिदा जिया और उनकी पार्टी को भारत विरोधी माना जाता रहा है. आज के समय में बांग्लादेश में क्या बदला है, जो भारत नए सिरे से कूटनीतिक संदेश दे रहा है.
दरअसल, ये लगभग तय है कि बांग्लादेश में फरवरी में होने जा रहे चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जीतने वाली है. 17 साल देश से बाहर रहने के बाद लौटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन सकते हैं. एक्सपर्ट मान रहे हैं कि मां के इंतकाल के बाद उनके लिए सहानुभूति की लहर है. वैसे भी, शेख हसीना के भारत में होने और उनकी पार्टी के चुनाव में शामिल ना होने के चलते किसी दूसरे रिजल्ट की संभावना भी नहीं है. हां, एक तीसरा एंगल जरूर है. पाकिस्तान के इशारों पर उछलने वाली, भारत विरोधी जमात-ए-इस्लामी पार्टी. अब तक बीएनपी और जमात का दोस्ताना रहा है.
भारत के दो लक्ष्य
हां, भारत के हालिया कदम एक साथ दो टारगेट को साधते दिख रहे हैं. पहला- भारत चाहता है कि अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस और इस्लामी ताकतों के साथ उनका कनेक्शन टूटे. दूसरा- भारत अपने पुराने रुख को मजबूती देते हुए शेख हसीना के बांग्लादेश में न होने के बावजूद बदले हुए माहौल में लोकतांत्रिक और थोड़ा नरमपंथी लोगों को समर्थन देता दिखना चाहता है.
Went to the High Commission of Bangladesh in New Delhi. Signed the Condolence Book expressing our profound sorrow at the passing of former Prime Minister and BNP Chairperson Begum Khaleda Zia. Our thoughts are with her family and the people of Bangladesh. @bdhc_delhi pic.twitter.com/AscV4ZdIUe
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) January 1, 2026
इसके लिए पहले क्या किया?
खालिदा जिया की मौत की खबर मिलते ही भारत ने औपचारिक प्रोटोकॉल से कहीं आगे बढ़कर मैसेज देने की कोशिश की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ शोक संवेदना व्यक्त की बल्कि तारिक रहमान को सीधे लिखा. इस समय वही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख हैं. पीएम के संदेश में जिया को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्ती बताया गया, बांग्लादेश के लोकतंत्र में जिनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
फिर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका जाते हैं. तारिक रहमान से मिलकर भारत की ओर से शोक व्यक्त करते हैं और पीएम मोदी का पत्र सौंपते हैं. दोनों के बीच मुलाकात की तस्वीरें भी शेयर होती हैं.
On arrival in Dhaka, met with Mr Tarique Rahman @trahmanbnp, Acting Chairman of BNP and son of former PM of Bangladesh Begum Khaleda Zia.
Handed over to him a personal letter from Prime Minister @narendramodi.
Conveyed deepest condolences on behalf of the Government and… pic.twitter.com/xXNwJsRTmZ
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) December 31, 2025
इतना ही नहीं, नई दिल्ली में अचानक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचते हैं. परंपरा के तहत ऐसे समय में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन गया. पूर्व प्रधानमंत्री और BNP चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शोक संदेश लिखा. हमारी संवेदनाएं उनके परिवार और बांग्लादेश के लोगों के साथ हैं.
इसमें अलग क्या है?
1. एक आम धारणा के तहत अब तक शेख हसीना को ही भारत का दोस्त समझा जाता था. हाल के वर्षों में शायद पहली बार है जब भारत ने इतने सीनियर स्तर पर BNP लीडरशिप के साथ खुलकर बातचीत हु है. इसमें भी भारत ने पहल की है. हसीना की अवामी लीग खुद को पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई लड़ने वाली कहती थी, शरणार्थी संकट बढ़ा तो भारत ने इसमें अहम भूमिका निभाई. दूसरी तरफ बीएनपी ने हसीना का विरोध करने के साथ-साथ खुद को देश में भारत विरोधी ताकत के रूप में स्थापित किया. इसका उसे राजनीतिक लाभ भी मिलता रहा.
2. भारत अब पुरानी धारणा से अलग होना चाहता है. बांग्लादेश में यूनुस ने अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर बैन लगा रखा है. ऐसे में BNP ही बांग्लादेश में अकेली लोकतांत्रिक पार्टी रह जाती है. अब पड़ोस में शांति की कामना करने वाले भारतवर्ष के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह कट्टरपंथियों, पाकिस्तान परस्त जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव से इतर बीएनपी से नए सिरे से कनेक्शन साधे.
3. जमात और हसीना विरोधी प्रोटेस्ट से निकली युवा पार्टी NCP को फिलहाल लोकतांत्रिक नहीं कह सकते. जमात पर बैन तभी हटा जब युवा प्रदर्शनकारियों ने ढाका में यूनुस को सत्ता में बिठा दिया. तब से बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के हमले बढ़ गए. ऐसे में भारत चाहता है कि बीएनपी देश में फिर से शांति लाए.
