
Justice Varma: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद वाले जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित किया है, जिसमें उनकी ओर से अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा अध्यक्ष की ओर से जांच कमेटी बनाने की मंजूरी देने में प्रक्रिया के तरीकों का आरोप लगाया है. बता दें कि जस्टिस वर्मा का कहना था कि जब 21 जुलाई 2025 को लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था. ऐसी स्थिति में जब जजेस इन्क्वारी एक्ट के तहत दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक कोई कमेटी का गठन नहीं हो सकता. ऐसे में स्पीकर की ओर से कमेटी के गठन का फैसला गलत है.
जस्टिस वर्मा की याचिका
जस्टिस वर्मा ने इस याचिका में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई पार्लियामेंट्री कमेटी की वैधता को चुनौती दी गई है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव खारिज किया था. जस्टिस वर्मा का तर्क था कि जब संसद के दोनों सदनों में एक ही दिन महाभियोग का प्रस्ताव दिया जाता है तो इसे आगे बढ़ने के लिए एक जॉइंट कमेटी के लिए प्रस्ताव को दोनों सदनों में स्वीकार करना जरूरी है.
SC ने उठाए सवाल
जस्टिस वर्मा ने तर्क दिया है कि क्योंकि राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन की ओर से उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था. ऐसे में जजेज इन्क्वायरी एक्ट के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित जांच कमेटी अस्थिर हो गई है. बता दें कि बुधवार 7 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस धारणा पर सवाल उठाया गया था कि अगर राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो जाता है और उसी दिन लोकसभा में भी वह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो उसे विफल कैसे माना जा सकता है. SC ने इस विचार पर संदेह जताया की जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग के लिए लोकसभा की ओर से स्वीकार किए गए प्रस्ताव को विफल माना जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए दोनों पक्षों को लिखित दलीलें जमा कराने को कहा है. बता दें कि जस्टिस वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई कमेटी के सामने पेश होने की समय सीमा बढाने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा की मांग ठुकराई. 12 जनवरी 2026 को जस्टिस यशवंत वर्मा को लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई कमेटी के सामने पेश होना है.
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि बीते साल 14 मार्च 2025 को दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के घर पर आग लग गई थी. इस दौरान दमकल विभाग को आग बुझाते समय वहां से बड़ी मात्रा में आधे जले कैश मिले थे. इस घटना के बाद से जस्टिस वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. इसको देखते हुए उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था. SC ने इस मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय एक इंटरनल कमेटी बनाई, जिसने जांच में पाया कि जस्टिस वर्मा का उस कैश पर कंट्रोल था. उन्हें मिसकंडक्ट का दोषी पाया गया.

