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Nicolas Maduro relationship with Satya Sai Baba: लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला पर पिछले 12 साल से शासन कर रहे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन का आखिरकार अंत हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके यूएस आर्मी के हाथों पकड़े जाने का दावा किया है. ट्रेड यूनियन नेता से देश के राष्ट्रपति पद तक पहुंचे मादुरो का जीवन विवादों से भरा रहा. अपने पूरे शासनकाल में वे जहां कम्युनिस्ट देशों से नजदीकी बनाने की कोशिश करते रहे, वहीं अमेरिका समेत पश्चिमी देशों से उन्होंने दूरी बनाए रखी. जिसका खामियाजा उन्हें अब अपनी सत्ता गंवाने के साथ भुगतना पड़ा है. 

सत्य साईं बाबा के अनुयायी रहे मादुरो

निकोलस मादुरो का जन्म 23 नवंबर 1962 को काराकास, वेनेजुएला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता निकोलस मादुरो गार्सिया एक ट्रेड यूनियन नेता थे. वे 1989 में एक दुर्घटना में मारे गए. जबकि मां टेरेसा डी जेसुस मोरोस एक गृहिणी थीं. उनकी तीन बहनें  मारिया टेरेसा, जोसेफिना और अनिता हैं. उनका परिवार मूलत कैथोलिक ईसाई रहा है. हालांकि बाद में मादुरो भारतीय धर्म गुरु सत्य साईं बाबा के संपर्क में आकर उनके अनुयायी बन गए. वे अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री होल्डर रहे हैं. 

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निकोलस मादुरो ने 2 शादियां की हैं. उनकी पहली पत्नी का नाम एड्रियाना गुएरा अंगुलो है. जिससे उन्हें बेटा निकोलस मादुरो गुएरा पैदा हुआ. पत्नी से उनका 1994 में तलाक हो गया. इसके बाद दूसरी शादी सिलिया फ्लोर्स से की. वह पूर्व राष्ट्रीय विधानसभा अध्यक्ष, आवास मंत्री और शावेज की वकील रह चुकी हैं. सिलिया के पहले पति से तीन बेटे वाल्टर जैकब, योस्वेल और योसेर गाविडिया. उन्होंने मादुरो सौतेले बेटे मानते हैं. 

बस ड्राइवर से राष्ट्रपति तक का सफर

मादुरो ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 में की. काराकास मेट्रो में बस ड्राइवर के रूप में काम करते हुए उन्होंने अनौपचारिक यूनियन बनाई. इसके बाद वे 1980 के दशक में क्यूबा में पहुंच गए. जहां पर उन्होंने वामपंथ की ट्रेनिंग ली. फिर वे वेनेजुएला के नेता ह्यूगो शावेज के साथ जुड़ गए. उन्होंने 1998 में शावेज की चुनावी जीत में योगदान दिया. 

वहां से वापसी के बाद के बाद निकोलस मादुरो ने वेनेजेउला की राजनीति में कदम रखा. वे 1998 से राष्ट्रीय विधानसभा के सदस्य बने. इसके बाद 2005-2006 में इसके अध्यक्ष रहे. फिर उन्होंने 2006-2013 तक विदेश मंत्री का पद संभाला. इसके बाद वे 2012-2013 में उपराष्ट्रपति रहे. साल 2013 में शावेज की मौत हो गई. जिसके बाद उन्हें मुल्क का अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया. उसी साल अप्रैल 2013 में देश में नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव हुए. जिसमें उन्हें कथित तौर पर 50.61% वोट मिले. विपक्ष ने उन चुनावों में धांधली का आरोप लगाया. 

लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन

इसके बाद वर्ष 2018 और 2024 के चुनावों में भी मादुरो ने एकतरफा तरीके से जीत हासिल की. हालांकि ये तीनों चुनाव विवादास्पद रहे और पश्चिमी देशों ने इसकी प्रमाणिकता को संदिग्ध माना. वर्ष 2024 के चुनावों में विपक्ष ने एडमुंडो गोंजालेज के विजेता होने का दावा किया. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने मादुरो की जीत पर अपनी मोहर लगा दी.

मादुरो के शासनकाल में वेनेजुएला गंभीर आर्थिक संकट से गुजरा. देश में महंगाई ने तमाम रिकॉर्ड तोड़े. मुल्क में खाद्य पदार्थों की कमी हो गई. 70 लाख से ज्यादा लोगों को देश छोड़कर दूसरे मुल्कों में शरण लेनी पड़ी. साथ ही लोगों के मानवाधिकारों का भी बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ. इन सबके बावजूद मादुरो पर कोई फर्क नहीं पड़ा और वे उसी ठाठ के साथ देश पर शासन करते रहे. 

अमेरिका से दुश्मनी पड़ गई महंगी

लेकिन मादुरो के बुरे दिन तब शुरू हो गए. जब अमेरिका ने 2020 में उन्हें नारकोटेररिज्म का आरोपी बताते हुए 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित कर दिया. इसके बाद 2025 में ट्रंप प्रशासन ने उन्हें विदेशी आतंकवादी करार दे दिया. अब 2026 के पहले हफ्ते में मादुरो की सत्ता खत्म करके अमेरिका ने जहां एक बार फिर अपनी सैन्य श्रेष्ठता मनवाई है. वहीं वेनेजुएला के रूप में एक और वामपंथी और तानाशाही गढ़ का पतन हो गया है.