
Hizbul commander mother Janna Begum dies: एक मां का बेटे की फिक्र करते-करते मर जाना दुखद होता है. मामला तब और गंभीर हो जाता है जब एक नाशुक्रा दहशतगर्द बेटा मां की नहीं सुनता. फिर एक दिन उसकी मां की मौत हो जाती है, इस तरह उसकी आखिरी इच्छा अधूरी रह जाती है. ये सच्ची कहानी है जन्ना बेगम की जिन्होंने आतंकवाद की राह पर चल चुके बेटे को दहशतगर्दी छोड़कर सरेंडर करने की अपील की थी, लेकिन बेटे ने उसकी बात नहीं मानी. अब शायद ही वो अपनी मां के अंतिम दर्शन कर पाएगा, क्योंकि उसे पता है कि मां के जनाजे को जब उसके परिवारवाले और पड़ोसी कंधा दे रहे होंगे तो वहां भी पुलिस उस पर नजर रख रही होगी.
नहीं लौटा मिलिटेंट बेटा
जम्मू-कश्मीर की एक दुखियारी मां जन्ना बेगम ने अपने मिलिटेंट बेटे से सरेंडर करने की इमोशनल अपील की थी. उसकी गुहार का वीडियो वायरल हुआ था. उसने अपने बेटे के हिंसा के रास्ते पर चलने की वजह से खुद को हुए निजी नुकसान के बारे में बताया था.
आतंकवादी किसी के सगे नहीं होते
आतंकी घरवालों तक की नहीं सुनते. पाकिस्तानी आतंकवादी, ISI और PAK फौज मिलकर कश्मीर के युवाओं का ब्रेन वाश करके न जाने कौन से ‘जेहनी जहर’ की घुट्टी पिलाते हैं कि वो जन्नत का मुकान पाने के लिए गोली खाकर मरने या फिदाईन बन बम लगाकर फटने को भी रेडी रहते हैं. यही हुआ जन्ना बेगम के साथ जो बेटे के लौटने की आस में जिंदा थीं लेकिन किश्तवाड़ जिले में उनकी मौत हो गई.
ये कैसा जिहाद: जन्ना बेगम
मारवाह बेल्ट के अनियार गांव की रहने वाली जन्ना बेगम का चार दिन पहले उनके घर पर मौत हो गई. उन्होंने पिछले साल नवंबर और दिसंबर में एक इमोशनल वीडियो जारी करके अपने बेटे रियाज अहमद से घर लौटने और आतंकवाद का रास्ता छोड़ने की अपील की थी. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उन्होंने कहा था, ‘उसे सरेंडर करने दो और हमारी देखभाल करने के लिए वापस आने दो. कम से कम जब हम उसे देखकर सुकून से जिंदा रहेंगे. वो यहां होगा तभी तो मेरे जनाजे को कंधा दे सकेगा.’ उन्होंने ये भी कहा था कि माता-पिता को बुढ़ापे में तकलीफें झेलनी पड़ती हैं. यह कैसा जिहाद है जहां माता-पिता को छोड़ दिया जाता है? हम अकेले हैं, हमारा ख्याल कौन रखेगा.
कौन है रियाज अहमद?
आतंकी रियाज के एक रिश्तेदार ने मीडिया को बताया कि बेगम, बेटे को वापस देखे बिना चल बसीं. उनकी आखिरी इच्छा अधूरी रह गई. रियाज अहमद, ‘A-plus’ कैटेगरी का आतंकी है. हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज की सुरक्षाबलों को तलाश है. 10 लाख रुपये का ईनामी रियाज 15 साल पहले आतंकवाद की राह पर निकला था. माना जाता है कि वह किश्तवाड़ इलाके और आस-पास में सबसे लंबे समय तक एक्टिव रहने वाला आतंकी कमांडर है.

