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यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्णों का विरोध बढ़ता ही जा रहा है. संसद में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने यूजीसी के नए नियमों को भारत के युवाओं के साथ नया धोखा कहा है. सोशल मीडिया पर लिखे लंबे पोस्ट में उन्होंने इन नियमों को लाने के पीछे यूजीसी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि असल में इक्विटी का उद्देश्य एक दिखावा है, असली मकसद सरकार का कुछ और है. 

उन्होंने विस्तार से लिखा है कि UGC ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट 1956 के तहत इक्विटी (समानता) को बढ़ावा देने के लिए हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 इस साल 13 जनवरी से लागू कर दिया है. यह देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए हैं. उन्होंने कहा कि रेगुलेशन में उद्देश्य बताया गया है- धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर और दिव्यांगों के साथ भेदभाव को खत्म करना और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में इक्विटी को बढ़ावा देना. काटजू ने कहा कि मेरे विचार से यह उद्देश्य सिर्फ एक दिखावा है और भारत के युवाओं के साथ एक धोखा है जबकि असली मकसद भारत के कई राज्यों में आने वाले चुनावों में वोट हासिल करना है.

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