
Ghooskhor Pandat: फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा किया है. फिल्म निर्माता नीरज पांडे की ओर से कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि फिल्म का नाम बदला जाएगा. इस विवादित नाम से जुड़ा सारा कंटेंट, ट्रेलर सोशल मीडिया से लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म मेकर के आश्वासन के मद्देनजर केस का निपटारा किया. कोर्ट ने नसीहत भी दी है कि ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लगाए और अब थोड़ा शांति बरतें.
पिछली सुनवाई में फटकार लगाई थी
कोर्ट ने न केवल इस केस को लेकर याचिकाकर्ता से कहा कि वो आगे फिल्म मेकर के खिलाफ कोई FIR दर्ज न करें बल्कि सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को भी नसीहत दी है कि वो भी अब शांति बरते. अतुल मिश्रा नाम के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में इस फिल्म की रिलीज के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि फिल्म का नाम और उसका कंटेंट एक जाति विशेष को बदनाम करने वाला है, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के नाम को लेकर अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की थी, कोर्ट ने फिल्म निर्माता को फटकार लगाते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब ये नहीं है कि आप किसी वर्ग विशेष को नीचा दिखाए. जब समाज में पहले से इतनी अशांति है तो इस तरह के नाम माहौल को और खराब कर रहे है. कोर्ट ने केन्द्र सरकार , सेंसर बोर्ड और निर्माता निर्देशक नीरज पांडे को नोटिस जारी किया था.
फिल्म मेकर की ओर से आश्वासन
फिल्म मेकर की ओर से आज सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है जो एक अपराध की जांच पर आधारित है. फिल्म में किसी भी जाति, धर्म, समुदाय का अपमान नहीं दिखाया गया है. फिल्म मेकर की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनका या उनके प्रोडक्शन हाउस का किसी धर्म/ जाति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. फिल्म निर्माता की ओर से बताया गया कि फिल्म का पुराना नाम “घूसखोर पंडत” वापस ले लिया गया है. नया नाम अभी तय नहीं हुआ है लेकिन जो भी नया नाम होगा, वो बिल्कुल अलग होगा ताकि फिर कोई विवाद न हो. अभी इस फिल्म के नाम से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री, पोस्टर और ट्रेलर वापस ले लिए गए हैं.
कोर्ट ने आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया
कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि फिल्म के नाम को लेकर की गई आपत्ति पर फिल्म निर्माता ने सकारत्मक रुख अपनाया है. फिल्म के नाम को वापस लेने का फैसला लिया गया है. अब इस विवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है.

